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मिर्ची की खेती ने बदली राजस्थान के इस गांव की तस्वीर, हजारों लोगों को मिल रहा रोजगार Thursday 22 February 2024 12:42 PM UTC+00 राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले के खंडार उपखंड के छान गांव का नजारा इन दिनों लालिमा लिए हुए है। पहाड़ की ऊंचाई पर चढ़कर देखें तो दूर दूर तक सिर्फ मिर्ची ही मिर्ची सूखती हुई दिखाई देती है। यहां की मिर्ची ना केवल देश में बल्कि विदेशों में भी धूम मचा रही है। देशभर के व्यापारी गांव में आकर मंडी लगाते हैं और यहां से विदेशों तक सप्लाई करते हैं। क्षेत्र के किसानों ने बताया, गांव की जलवायु मिर्ची के लिए उपयोगी है। पारम्परिक खेती छोड़ चुनी बागवानी की राह किसानों ने बताया, पहले वह गेहूं, सरसों, चना, ज्वार, बाजरा व तिल की फसल लेते थे। आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए अब यहां के अधिकतर किसानों ने मिर्ची एवं अन्य सब्जियों की खेती करना शुरू किया है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में जबरदस्त सुधार आया है। अस्थाई बसेरा बना गांव उपखंड में राजस्थान, मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश के लगभग 2000 लोगों को 9-10 माह तक लगातार मिर्ची की फसल से रोजगार मिल रहा है। इसके चलते बाहर से आए व्यापारी व अन्य लोग अस्थाई तौर पर यहां आकर रहने भी लगे हैं। यूपी से भी आते हैं व्यापारी गांव चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा होने के कारण सर्दी में पाले के प्रकोप से बचाव हो जाता है। जमीन की तुलना में पत्थर ज्यादा समय तक गर्म रहते हैं। इसलिए जब हम पहाड़ पर मिर्ची सुखाते हैं, तो नीचे एवं ऊपर का तापमान अच्छा होने की वजह से मिर्ची का रंग गहरा लाल हो जाता है। यूपी के किसानों से भी व्यापारी मिर्ची खरीदकर यहां सुखाने के लिए लाते हैं। संतुलित मात्रा में खाद व उर्वरकों का उपयोग एक बीघा में लगभग 150 क्विंटल तक उत्पादन हो जाता है। प्रति किलो मिर्ची के 25 से 30 रुपए मिल जाते हैं। इस तरह खर्चे कम कर के प्रति बीघा लगभग तीन से चार लाख रुपए मुनाफा हो जाता है। |
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