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सुखद संकेत ... काम में दमदार, दूध गुणकारी, इसलिए बढ़ रही मेवाड़ी ऊंट की संख्या Thursday 15 February 2024 08:18 PM UTC+00 एक ओर जहां देश और प्रदेश में ऊंटों की संख्या घट रही है। वहीं मेवाड़ी नस्ल के ऊंटों (Mewari Camel) की तादाद में बढोतरी सुखद संकेत है। मेवाड़ के ऊंटों (Ship of Desart) की नस्ल राजस्थान के पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर गुजरात तक फैली है। इनका दूध खास गुणकारी है, ऐसे में यह ऊंट (Camel) पूरे देश में प्रसिद्ध है। उदयपुर संभाग (Udaipur Division) में 2012 की गणना में जहां 8772 मेवाड़ी ऊंट थे, वहीं इनकी संख्या 2019 में बढ़कर 9903 हो गई। हालांकि उदयपुर जिले में इनकी संख्या घटी है। लेकिन संभाग के अन्य जिलों में यह संख्या बढ़ रही है। इनकी सर्वाधिक आबादी डूंगरपुर जिले में बढ़ी है। जानकारों के अनुसार उदयपुर (Udaipur) के आसपास के क्षेत्र में कभी सामान परिवहन की दृष्टि से पंजाब से ऊंट लाए गए थे। इन ऊंटों ने अरावली क्षेत्र में अपने आप को बखूबी ढाल लिया और एक नस्ल का रूप ले लिया। ये मेवाड़ी नस्ल के ऊंट कहलानेे लगे। इनकी लंबाई मध्यम होती है। हल्का भूरा रंग और आंखें छोटी-छोटी होती है। छोटे होने के बावजूद ये कठोर होते हैं। हड्डियां मोटी और मजबूत है। मुंह के नीचे का होंठ गिरा हुआ रहता है। जो इस नस्ल की खास पहचान है। सिर बड़ा एवं भारी होता है। गर्दन छोटी और मोटी है। शरीर पर घने बाल, सख्त एवं मोटे होते हैं। दूध देने और काम में आगे देश में घट रही ऊंटों की संख्या
एक रिपोर्ट के अनुसार ऊंट के दूध में गाय के दूध की तुलना में 10 गुना अधिक लोहा एवं 3 गुना से अधिक विटामिन सी होता है। यह दूध कम वसा युक्त होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार मधुमेह एवं मानसिक रोगों में यह दूध लाभदायक है। पर्यटन एवं मनोरंजन की दृष्टि सेे ऊंट उपयोगी है। मरने पर इसके चमड़े से बेग, पर्स, जूते, अन्य चमड़े के उत्पाद बनाए जाते हैं।
जिले का नाम : 2012 : 2019 कुल : 8772 : 9903
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