>>: सुखद संकेत ... काम में दमदार, दूध गुणकारी, इसलिए बढ़ रही मेवाड़ी ऊंट की संख्या

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एक ओर जहां देश और प्रदेश में ऊंटों की संख्या घट रही है। वहीं मेवाड़ी नस्ल के ऊंटों (Mewari Camel) की तादाद में बढोतरी सुखद संकेत है। मेवाड़ के ऊंटों (Ship of Desart) की नस्ल राजस्थान के पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर गुजरात तक फैली है। इनका दूध खास गुणकारी है, ऐसे में यह ऊंट (Camel) पूरे देश में प्रसिद्ध है। उदयपुर संभाग (Udaipur Division) में 2012 की गणना में जहां 8772 मेवाड़ी ऊंट थे, वहीं इनकी संख्या 2019 में बढ़कर 9903 हो गई। हालांकि उदयपुर जिले में इनकी संख्या घटी है। लेकिन संभाग के अन्य जिलों में यह संख्या बढ़ रही है। इनकी सर्वाधिक आबादी डूंगरपुर जिले में बढ़ी है।

जानकारों के अनुसार उदयपुर (Udaipur) के आसपास के क्षेत्र में कभी सामान परिवहन की दृष्टि से पंजाब से ऊंट लाए गए थे। इन ऊंटों ने अरावली क्षेत्र में अपने आप को बखूबी ढाल लिया और एक नस्ल का रूप ले लिया। ये मेवाड़ी नस्ल के ऊंट कहलानेे लगे। इनकी लंबाई मध्यम होती है। हल्का भूरा रंग और आंखें छोटी-छोटी होती है। छोटे होने के बावजूद ये कठोर होते हैं। हड्डियां मोटी और मजबूत है। मुंह के नीचे का होंठ गिरा हुआ रहता है। जो इस नस्ल की खास पहचान है। सिर बड़ा एवं भारी होता है। गर्दन छोटी और मोटी है। शरीर पर घने बाल, सख्त एवं मोटे होते हैं।

दूध देने और काम में आगे
मेवाड़ी नस्ल के ऊंट काम में दमदार होते हैं। इनकी औसत गति 3 से 5 मील प्रति घंटा है। इनको कृषि कार्य एवं भार ढोने के काम लिया जाता है। इस नस्ल की मादा पौष्टिकता से भरपूर 4 से 6 लीटर दूध प्रतिदिन देती है।

देश में घट रही ऊंटों की संख्या
देश में लगातार ऊंटों की संख्या में गिरावट हो रही है। वर्तमान में देश में करीब ढाई लाख ऊंट हैं। इनमें से 2.12 लाख राजस्थान में है। जो कुल ऊंटों की 85 प्रतिशत संख्या है। वर्ष 1983 में राज्य में 7.56 लाख ऊंट थे। जो लगातार घट रहे हैं।


ऊंट के दूध के कई लाभ

एक रिपोर्ट के अनुसार ऊंट के दूध में गाय के दूध की तुलना में 10 गुना अधिक लोहा एवं 3 गुना से अधिक विटामिन सी होता है। यह दूध कम वसा युक्त होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार मधुमेह एवं मानसिक रोगों में यह दूध लाभदायक है। पर्यटन एवं मनोरंजन की दृष्टि सेे ऊंट उपयोगी है। मरने पर इसके चमड़े से बेग, पर्स, जूते, अन्य चमड़े के उत्पाद बनाए जाते हैं।


बाजार में मिल रहा पाउडर और दूध
कई ऑनलाइन साइट्स पर ऊंट का दूध, पाउडर, चॉकलेट आदि मिल रहे हैं। जो लोग इसके दूध की गुणवत्ता को जानते हैं, वे इनका उपयोग करने लगे हैं। ऊंट के दूध को बढ़ावा दिया जाए तो आने वाले समय में डेयरियों पर भी मिलने लगेगा।


मेवाड़-वागड़ में ऊंटों की संख्या

जिले का नाम : 2012 : 2019
उदयुपर : 2695 : 2349
चित्तौड़गढ़ : 2166 : 2723
राजसमंद : 1572 : 1558
डूंगरपुर : 1672 : 2670
बांसवाड़ा : 558 : 451
प्रतापगढ़ : 109 : 152

कुल : 8772 : 9903


राज्य सरकार ऊंट पालन के लिए उनके नवजात टोडा, टोडी (बच्चा) होने पर 10 हजार रुपए तक नकद राशि अलग-अलग किस्तों में प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त ऊंट चिकित्सा शिविर, ऊंट पालन प्रशिक्षण शिविर जैसे कार्यक्रम कर इनकी संख्या में वृद्धि का प्रयास कर रही है। परिवहन, पर्यटन के अलावा इसका दूध पौष्टिक एवं लाभदायक होने से इसका प्रचलन बढ़ रहा है। ऊंट के दूध को लेकर जागरूकता व संस्थागत तरीके से वितरण व्यवस्था की आवश्यकता है। इससे ऊंट पालन के प्रति पशुपालकों का रुझान फिर बढ़ने लगेगा।
- डॉ. सुरेन्द्र छंगाणी, उपनिदेशक, राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर

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