>>: Digest for February 14, 2024

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माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से बोर्ड परीक्षाओं का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। नवगठित जिले इस बार खुद ही बोर्ड परीक्षा कराएंगे। अलवर जिले के पास केवल पेपर व उत्तर पुस्तिकाएं पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी।

जिला शिक्षा अधिकारी नेकीराम ने बताया कि 23 व 24 फरवरी को बोर्ड के पेपर अलवर पहुंचेंगे। 25 फरवरी को पेपरों का बटवारा होगा। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने की जिम्मेदारी सभी जिलों के पास होगी। उसी के मुताबिक उड़नदस्ते बनाए जाएंगे। अलवर जिले के पास अतिरिक्त उड़नदस्ते बनाने की जिम्मेदारी भी आ सकती है।

तीनों जिले में कक्षा 10 व 12 की परीक्षा के लिए 514 केंद्र बनाए गए हैं। इसमें सरकारी और गैर सरकारी स्कूल शामिल हैं। केन्द्र पर जाने के लिए विद्यार्थियों को कोई रेलवे फाटक और हाइवे क्रॉस नहीं करना होगा।परीक्षा के लिए अलवर में 365, कोटपूतली-बहरोड़ में 152 (141 सरकारी स्कूल व 11 गैर सरकारी स्कूल ), खैरथल- तिजारा में 97 (सरकारी स्कूलों में 93 व गैर सरकारी स्कूलों में 4 ) केन्द्र बनाए गए हैं।


49 हजार विद्यार्थी शामिल होंगे बोर्ड परीक्षा मेंकक्षा 10 वीं की बोर्ड परीक्षाएं 7 मार्च से शुरू होंगी और कक्षा 12 वीं की परीक्षाएं 17 दिन बाद यानी 29 फरवरी से होंगी। ये परीक्षाएं अप्रेल माह तक चलेंगी। विभाग की ओर से बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले विद्यार्थियों की संख्या जारी नहीं की है, लेकिन वर्तमान में बोर्ड कक्षाओं में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 49 हजार 855 है। इसमें कक्षा 10 वीं में 26 हजार 976 और कक्षा 12 वीं में 22 हजार 879 विद्यार्थी हैं।
नए जिले बोर्ड परीक्षा खुद ही करवाएंगे। परीक्षा को लेकर स्थानीय स्तर पर सभी तैयारियां हो गई हैं।— रामेश्वर दयाल मीणा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, अलवर।

जिले में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा विभाग के साथ-साथ सभी सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन के माध्यम से हाजिरी होनी थी। इसके लिए सरकार ने आदेश भी जारी किए, लेकिन अब यह पहल केवल कागजों में दबकर रह गई है। इस व्यवस्था से पता लगता कि कौन-कितने बजे कार्यालय में प्रवेश करता है और कब कार्यालय से निकलता है।

अलवर जिले में सरकारी स्कूलों की संख्या 2782 और सरकारी सरकारी महाविद्यालयों की संख्या 200 है। स्कूलों के साथ ही महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी का प्रावधान किया गया। बताया जाता है कि शिक्षक, स्कूल, महाविद्यालयों में विद्यार्थियों का पहुंचने का कोई समय निश्चित नहीं हो रहा है। मशीन लगने पर सभी को समय पर आना होगा।

विद्यार्थियों के लिए 75 फीसदी हाजिरी अनिवार्य: स्कूल-कॉलेजों में बायोमेट्रिक मशीन नहीं होने के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों की हाजिरी रजिस्ट्ररों में दर्ज की जा रही है। इसमें पारदर्शिता नहीं रह गई है। मशीनें लगे तो सभी स्थितियां सामने आ जाएंगी। इस पर जोर सरकार दे रही है लेकिन शिक्षण संस्थान आगे नहीं बढ़ रहे हैं। विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठने के लिए 75 फीसदी हाजिरी होना अनिवार्य है। ऐसे में मशीन से हाजिरी लगेगी तो इससे तमाम छात्र परीक्षा से बाहर हो सकते हैं। क्योंकि कॉलेज आदि में छात्र नहीं पहुंच पाते।

मशीन लगाने का कई बार उठाया मुद्दा
टेंडरों पर रोक लगी हुई थी। अब खुल गए हैं। जल्द से जल्द बायोमेट्रिक मशीन लगाने के लिए नियमानुसार प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

डॉ. अशोक आर्य, प्राचार्य, कला कॉलेज।

महाविद्यालय में स्कॉलरशिप लेने वाले विद्यार्थियों की बायोमेट्रिक मशीन के माध्यम से हाजिरी की जा रही है। अभी स्टॉफ के लिए मशीन नहीं हैं।

- डॉ. गोपी चंद पालीवाल, प्राचार्य, राजर्षि कॉलेज, अलवर।

सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की हाजिरी शाला दर्पण के माध्यम से की जा रही है। शिक्षक व छात्र स्कूल में आते हैं तो उनकी हाजिरी भरी जाती है।

रामेश्वर दयाल मीणा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, अलवर।
सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन के माध्यम से हाजिरी करने के लिए कई बार मांग उठी, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत के कारण लगने वाली बायेमेट्रिक मशीन की प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अगर सभी कार्यालयों में मशीन लग जाएगी तो समय की बाध्यता होगी।

शहर में गर्मी आने से पहले ही पेयजल समस्या गहराने लगी है। अभी फरवरी में ही शहर के लगभग सभी पुराने मोहल्लों में पेयजल किल्लत से लोग परेशान हैं। जलदाय विभाग के अनुसार शहर की आबादी करीब 4 लाख 15 हजार 579 है। वहीं, एनसीआर के नियमों के अनुसार शहर में रोजाना करीब 561 लाख लीटर पानी की जरुरत है। जबकि वर्तमान में आमजन को रोजाना 261 लाख लीटर पानी कम मिल रहा है। यानि 300 लाख लीटर पानी की ही सप्लाई दी जा रही है। ऐसे में आगामी दिनों में तेज गर्मी पड़ने पर शहर में भीषण जल संकट की िस्थति पैदा हो सकती है।

एकांतर सप्लाई फिर भी पेयजल किल्लत:
अलवर शहर में जलदाय विभाग के 69 उच्च और 2 स्वच्छ जलाशय है। इसके हिसाब से विभाग ने शहर को पेयजल सप्लाई के लिए 59 जोन में बांटा हुआ है। इन सभी जोन में एकांतर दिवस के हिसाब से पेजयल सप्लाई दी जा रही है। यानि कि एक दिन छोड़कर दूसरे पेयजल सप्लाई दी जा रही है। फिर भी शहर में पानी की किल्लत बनी हुई है। वहीं, कुछ इलाकों में नलकूपों से सीधे बूस्टिंग कर पेजयल सप्लाई दी जा रही है।

शहर में जलदाय विभाग के 326 ट्यूबवेल:
अलवर शहर में जलदाय विभाग के 326 थ्री-फेज ट्यूबवेल हैं। इसमें मुख्य रूप से शहर की पेयजल सप्लाई बुर्जा, तूलेड़ा और अम्बेडकर नगर पम्प हाउस से दी जाती है, लेकिन भूजल स्तर में आ रही लगातार गिरावट से ट्यूबवेल की क्षमता पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। इसके कारण आए दिन किसी ना किसी क्षेत्र की पेजयल सप्लाई बाधित होती रहती है।

अभी 12 टैंकर से करीब 90 फेरे कर रहे:
शहर के सभी पुराने मोहल्लों सहित कई इलाकों में सर्दी में भी पेयजल संकट बना हुआ है। इन क्षेत्रों में जलदाय विभाग की ओर से टैंकरों से जलापूर्ति कराई जा रही है। इसके लिए 12 टैंकर लगाए हुए हैं। जो हर दिन करीब 90 से 95 फेरे लगाकर शहर में पानी की सप्लाई कर रहे हैं। वहीं, आगामी दिनों में तेज गर्मी पड़ने पर िस्थति और भी बिगड़ सकती है।

इन क्षेत्रों में पेयजल संकट अधिक:
वैसे तो पूरे शहर में ही पानी की समस्या है, लेकिन खासतौर से पुराने मोहल्ले के लोग पेयजल समस्या से अधिक त्रस्त हैं। इसमें होली ऊपर मोहल्ला, हरबक्स का मोहल्ला, लादिया मोहल्ला, अखैपुरा लालखान, चमेली बाग, पहाड़गंज, धोबीघट्टा, सोनावा डूंगरी, चेतन एन्क्लेव, मरेठियाबास, नवाबपुरा मोहल्ला, अशोका टाकीज के आसपास, खपटा पाड़ी, भीकम सैयद, बापू बाजार, एनईबी, दाउदपुर, शिवाजी पार्क, बुधविहार, हसनखां मेवात नगर, साहब जोहड़ा, इंदिरा कॉलोनी, नयाबास, स्कीम-10, स्कीम-3, विवेकानंद नगर व काला कुआं सहित कई इलाकों में आमजन पेयजल किल्लत से परेशान हैं।

इनका कहना:
गर्मियों में आमजन को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कंटीजेंसी प्लान बनाया गया है। इसके साथ ही नए ट्यूबवैल आदि के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। शहर की पेयजल समस्या के निराकरण के लिए दीर्घकालिक योजना को लेकर भी प्रयास किए जा रहे हैं। पेयजल को लेकर आमजन को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
ललित करोल, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जलदाय विभाग।

केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को उदयपुर में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश की विभिन्न परियोजनाओं के साथ अलवर जिले में बनने वाले तीन रेलवे ओवरब्रिज का वर्चुअली शिलान्यास किया। इस दौरान कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा भी मौजूद रहे।

वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने प्रदेश के साथ-साथ अलवर जिले को तीन रेलवे ओवरब्रिज की सौगात दी है। उन्होंने बताया कि सेतुबंध परियोजना के तहत 62.86 करोड रूपये की लागत से एलसी-111ए (अलवर शहर में टेल्को सर्किल से अलवर-बहरोड) को जोडने वाले रोड, 36.31 करोड की लागत से बनने वाले एलसी-86 (सोडावास-नूंह सडक एसएच-11) एवं 44.43 करोड की लागत से बनने वाले एलसी-68 (हिण्डौन-कठूमर सडक एसएच-22) पर रेलवे कॉसिंग पुल का शिलान्यास किया।

उन्होंने कहा कि इन आरओबी के निर्माण होने पर जिले सहित प्रदेश के इन्सफ्रास्ट्रक्चर को बल मिलेगा तथा आमजन को आगमन में सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा दिल्ली-मुम्बई नेश्नल हाईवे, बडोदामेव से पनियाला हाईवे की सौगात दी है तथा सरिस्का एलिवेटेड रोड निर्माण कराने की घोषणा भी गई है जिससे पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिलने के साथ पर्यटन क्षेत्र को बढावा मिलेगा।

 

विकसित भारत संकल्प यात्रा (शहरी अभियान) के तहत 14 एवं 15 फरवरी को विभिन्न स्थानों पर कैंप आयोजित होंगे। नगर निगम के आयुक्त एवं विकसित भारत संकल्प यात्रा अभियान के नोडल अधिकारी मनीष कुमार फौजदार ने बताया कि विकसित भारत संकल्प यात्रा (शहरी अभियान) के तहत 14 फरवरी को दोपहर पूर्व आईटीआई कॉलेज मोती नगर व दोपहर पश्चात भांड बस्ती पीएनबी बैंक के पास साइड रोड पर तथा 15 फरवरी को दोपहर पूर्व वार्ड नं. 61 तिजारा पुलिया से रेलवे अण्डरपास वाले रोड पर खाली मैदान में व दोपहर पश्चात कंपनी गार्डन के अंदर प्रस्तावित पार्किंग स्थल पर कैंप आयोजित होंगे।

लाभार्थियों को स्वीकृति ऋण पत्र वितरित किए गए

विकसित भारत संकल्प यात्रा (शहरी अभियान) के तहत सोमवार को रणजीत नगर स्थित कॉम्पलेक्स व रामलीला मैदान शिवाजी पार्क में कैंप आयोजित हुआ। शिविर में विभिन्न योजनाओं में लाभार्थी रहे व्यक्तियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। साथ ही प्रतिभाशाली एवं विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर बालक-बालिकाओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

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राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित स्नातक प्रथम सेमेस्टर परीक्षा में एक बार फिर चूक हुई है। ङ्क्षहदी माध्यम के विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम का पेपर थमा दिए गए। ये मामला विश्वविद्यालय तक पहुंचा तो कई लोग कठघरे में आ गए।
मंगलवार को विद्यार्थियों की कंप्यूटर परीक्षा का पेपर अंग्रेजी माध्यम में मिला। इसे देखकर सभी विद्यार्थी चौंक गए। पेपर हल करने में विद्यार्थियों के पसीने आ गए। क्योंकि विद्यार्थियों की ओर से ङ्क्षहदी माध्यम में दाखिला लिया गया था और परीक्षा के दौरान पेपर अंग्रेजी माध्यम में मिला। बताया जाता है विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आयोजित सेमेस्टर परीक्षा के दौरान ये विश्वविद्यालय की दूसरी गलती सामने आई है। इससे पहले विश्वविद्यालय ने जारी किए एडमिट कार्ड में परीक्षा का समय गलत ङ्क्षप्रट किया था और अब कम्प्यूटर परीक्षा में केवल एक माध्यम में पेपर को देकर सभी विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। इसको विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने स्वीकारा। पेपर दोनों माध्यमों (ङ्क्षहदी और अंग्रेजी) में होना चाहिए था, लेकिन पेपर केवल अंग्रेजी माध्यम में ही ङ्क्षप्रट हुआ है। परीक्षा को लेकर छात्र नेताओं ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों का भविष्य खराब करने पर तुला हुआ है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों की गलती विद्यार्थियों को भुगतनी पड़ती है। इसमें स्नातक से लेकर पीएचडी करने वाले विद्यार्थी शामिल हैं।

दोबारा हो सकती है परीक्षा
विश्वविद्यालय गडबडियों को लेकर लगातार चर्चाओं में रहता है। अब स्नातक प्रथम सेमेस्टर परीक्षाओं को लेकर विवादों में आ गया है। ङ्क्षहदी माध्यम के विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम पेपर थमाने के बाद विश्वविद्यालय के अधिकारी विद्यार्थियों की कुंडली खंगालने में जुट गए हैं। इसमें विद्यार्थियों की गिनती लगाई जा रही है कि प्रथम सेमेस्टर के दौरान कितने विद्यार्थियों ने ङ्क्षहदी में व कितने विद्यार्थियों ने अंग्रेजी में दाखिला लिया है। बताया जाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ङ्क्षहदी माध्यम वाले विद्यार्थियों की दोबारा परीक्षा करवा सकता है। इसमें अंग्रेजी माध्यम से दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा।

विश्वविद्यालय की ओर से परीक्षा के दौरान चूक हुई है। अगर विद्यार्थी लिखित में विश्वविद्यालय को शिकायत देते हैं तो ङ्क्षहदी माध्यम वाले विद्यार्थियों की परीक्षा दोबारा हो सकती है।
प्रो. शील ङ्क्षसधु पांडेय, कुलपति, मत्स्य विश्वविद्यालय।

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