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भरतपुर पुलिस रेंज की नई कवायद: पुलिस तथ्यों से न करे छेड़छाड़, इसके लिए जारी किए नए नियम Friday 29 March 2024 09:55 AM UTC+00 भरतपुर। फर्जी चोट। झूठी गवाही। घटनास्थल की दूरी कम-ज्यादा कर एफआइआर में मनगढ़ंत बातें लिखाकर तथ्यों से छेड़छाड़ करने वाले पुलिसकर्मी और रिपोर्टकर्ता अब ऐसा नहीं कर सकेंगे। अब सूचना मिलने पर मौके पर जाने वाले पुलिसकर्मी को घटना स्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने के साथ घायल व्यक्ति की चोट भी कैमरे में कैद करनी होंगी, ताकि तथ्य सलामत रह सकें।
घटना की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी अनिवार्यइसको लेकर पुलिस महानिरीक्षक ने संभाग के सभी जिलों के एसपी को निर्देश जारी किए हैं। रेंज में आपराधिक घटना होने की सूचना पर थाने से ड्यूटी ऑफिसर या बीट प्रभारी मौके पर पहुंचते हैं, लेकिन घटनास्थल पर पहुंचने के बाद यह पुलिसकर्मी घटनास्थल की स्थिति का निरीक्षण करते समय फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी नहीं करते। इतना ही नहीं घटना में घायल व्यक्ति की चोटों की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी तक भी नहीं की जाती है। इसके चलते घटना एवं आहत व्यक्ति की चोटों के वास्तविक तथ्यों के परिवर्तित होने की आशंका रहती है।
पुलिस अनुसंधानिक कार्रवाई पर न खड़े हो प्रश्नचिन्हइसका असर यह होता है कि अनुसंधान के दौरान घटना की सत्यता को विधीय जटिलता के कारण स्पष्ट किए जाने में पुलिस एवं अनुसंधान अधिकारियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। साथ ही पुलिस अनुसंधानिक कार्रवाई पर प्रश्नचिन्ह भी लगता है। आईजी ने निर्देश दिए हैं कि क्षेत्र में घटित होने वाली आपराधिक घटनाओं की सूचना प्राप्त होने पर थाने से जो भी पुलिस अधिकारी सर्वप्रथम घटनास्थल पर पहुंचता है तो घटनास्थल की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी आवश्यक रूप से की जाए। यह भी पढ़ें : अजूबे से कम नहीं होगी राजस्थान के इस जिले की यह सड़क, जयपुर के जेएलएन मार्ग की तर्ज पर बनेगी |
राजस्थान के इस स्टेडियम से क्रिकेट 'आउट', इंटरनेशनल बनाने के दावों की निकली हवा Friday 29 March 2024 12:19 PM UTC+00 Lohagarh Stadium Of Bharatpur : खेलों को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र और राजस्थान सरकार खूब फिक्रमंद नजर आ रही हैं। भरतपुर के लोहागढ़ स्टेडियम को भी इंटरनेशनल की तर्ज पर विकसित करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इनडोर गेम्स के लिए खड़ी की जा रही बिल्डिंग स्टेडियम के मैदान को सिकोड़ रही हैं। यहां बनने वाली बिल्डिंग पर नजर डाली जाए तो स्टेडियम से क्रिकेट खेल आउट हो गया है। स्टेडियम के सिकुडऩे का सिलसिला ऐसे ही चलता रहे तो खिलाडिय़ों के लिए फुटबॉल और हॉकी जैसे गेम्स के लिए भी जगह कम पड़ जाएगी, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। स्टेडियम की 17 बीघा जमीन पर वॉकिंग ट्रेक बनाने के साथ टॉयलेट, बैठने को कुर्सी एवं हरियाली के लिए पौधे लगाने की योजना है। साथ ही यहां स्टेडियम की आय के लिए 40 से 50 दुकानों का निर्माण होना भी प्रस्तावित है। साथ ही यहां खेल अकादमी भी बन रही है। ऐसे में क्रिकेट के लिए तो यहां कतई जगह नहीं बची है। अन्य मैदानी खेलों के लिए भी मुश्किल हो सकती है। बिल्डिंग के बाद यहां सिर्फ क्रिकेट की प्रेक्टिस ही की जा सकती है। 60 मीटर का होता है अंडाकार ग्राउंड 'स्टेडियम में खेलों के लिए निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन सबके चलते क्रिकेट के लिए यहां जगह नहीं बच सकेगी। अन्य जगह इसके लिए प्रयास जारी हैं।-अभिषेक पंवार, जिला खेल अधिकारी 8.50 करोड़ की लागत से बन रहा सिंथेटिक ट्रेक 12 करोड़ की लागत से बनेगा मल्टीपरपज इंडोर हॉल 3.50 करोड़ की लागत से बन रहा यूथ हॉस्टल 100 खिलाड़ी रह सकेंगे यूथ हॉस्टल में 13 करोड़ रुपए की लागत से सलीम दुर्रानी हॉस्टल का चल रहा निर्माण 1.50 करोड़ रुपए की लागत से कुश्ती अकादमी का निर्माण |
Hitesh Kumar Meena : IIT में पहले प्रयास में दाखिला लेकिन UPSC में 2 बार फेल हुए, फिर जिद ने बनाया IAS Friday 29 March 2024 12:37 PM UTC+00 आज की सफलता की कहानी हितेश कुमार मीना की है, जो किसान परिवार में पैदा हुए, सीमित संसाधनों में पढ़ाई की, दो बार सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में असफल हुए, सफलता के लिए अगला प्रयास किया। इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और सिविल सर्विसेस की तीनों परीक्षाओं में सफलतापूर्वक पास हुए। हितेश IAS बने। जिसका सपना उन्होंने बचपन में देखा था। कहा जाता है जहां आकांक्षाएं सीमित अवसरों से टकराती हैं, वहां दृढ़ संकल्प और विजय की कहानी सामने आती है। हितेश कुमार मीना गांव की गलियों से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के प्रतिष्ठित स्तर तक की उल्लेखनीय यात्रा कम नहीं है। वर्तमान में एडीसी गुरुग्राम के रूप में तैनात, हितेश कुमार मीना ने उन सभी चुनौतियों का सामना किया, जिनसे अक्सर घबराने वालों का रास्ता खत्म हो जाता है।
गांव की गलियों से IIT और फिर IAS तक का सफरराजस्थान के करौली जिला के गाधौली गांव के किसान परिवार में जन्मे हितेश ने प्रारंभिक पढ़ाई गांव से की। 10वीं कक्षा पूरी करने के बाद महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब वह आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा चले गए।उन्होंने प्रवेश परीक्षा पास की, IIT-BHU (वाराणसी) में उनका दाखिला हुआ, जहां उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक पूरा किया। चुनौतियों से घबराए बिना, उनकी शैक्षणिक यात्रा जारी रही और उन्होंने ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) के माध्यम से ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग में एम.टेक के लिए IIT-Delhi में प्रवेश प्राप्त कर लिया। यह भी पढ़ें : Nagaur : राजस्थान के इस गांव के पहले आर्मी अफसर बने सिद्धांत राठौड़, 10 अटेम्प्ट के बाद हुआ चयन दादा-दादी के अथक संघर्षों ने हितेश को किया प्रेरितहितेश का इंजीनियरिंग से सिविल सेवाओं में आने का फैसला अचानक नहीं था। वह बचपन से ही समाज में जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने की इच्छा रखते थे। उन्हें ज्ञात था कि साधारण परिवार से आने वाले व्यक्ति के लिए सिविल सर्विसेस की परीक्षाओं में सफलता हासिल किए बिना यह कर पाना मुश्किल है। उन्होंने अपने दादा-दादी के अथक संघर्षों से प्रेरणा लेते हुए इसकी तैयारी शुरू की। हितेश कहते हैं, "मैं हमेशा मानता था कि शिक्षा एक ऐसा टूल है जिसके माध्यम से मैं कुछ भी हासिल कर सकता हूं।" सिविल सेवाओं में करियर का विचार उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने का एक आदर्श माध्यम बन गया। उनके दादा-दादी, किसान थे जिन्होंने अदम्य साहस के साथ विपरीत परिस्थितियों का सामना किया, उनकी प्रेरणा का आधार बने। हालांकि, UPSC CSE के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में सफलता की राह चुनौतियों से रहित नहीं थी। तीन प्रयास, दो साक्षात्कार और अनगिनत घंटों की तैयारी के बाद हितेश का एक मात्र लक्ष्य इसमे सफलता पाना था। आख़िरकार अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने वर्ष 2018 में AIR 417 के साथ परीक्षा उत्तीर्ण की।
हितेश की UPSC अभ्यर्थियों के लिए मैसेजहितेश बताते हैं कि उनकी तैयारी में टेस्ट सीरीज़ का अहम योगदान रहा। बह कहते हैं कि जितनी अधिक टेस्ट सीरीज़ देंगे, पिछले साल के जितने अधिक प्रश्न हल करेंगे, सफलता की संभावना उतनी ही अधिक होगी। टेस्ट सीरीज़ ने न केवल उनकी ताकत को निखारा, बल्कि उनकी कमजोरियों को भी उजागर किया और उन्हें सुधारा, जिससे उनकी सफलता की संभावनाएं बढ़ती गई। हितेश ने अभ्यर्थियों के लिए सोशल मीडिया के कम उपयोग पर भी जोर दिया है। IAS अधिकारी हितेश मीना की सफलता इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प के साथ, सबसे साधारण जड़ें भी बड़ी सफलताओं को जन्म दे सकती हैं। उनकी कहानी सिर्फ एक व्यक्तिगत जीत नहीं है; यह गुमनामी से महानता की ओर रास्ता बनाने की चाहत रखने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है। यह भी पढ़ें : Success Story: कौन हैं अनुकृति शर्मा ; जो NASA का ऑफर ठुकरा देश लौटी और फिर हासिल की यह उपलब्धि |
Bharatpur News : पत्नी की मौत मामले में 11 दिन बाद खुलासा, सच सामने आने के बाद सभी के होश उड़े Friday 29 March 2024 04:30 PM UTC+00 भरतपुर जिले की गढ़ी बाजना थाना पुलिस ने पत्नी की गोली मारकर हत्या करने वाले आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पति ने 11 दिन पहले शराब के नशे में घरेलू विवाद के चलते जंगली जानवर भगाने वाली बंदूक से गोली मारकर पत्नी की हत्या कर दी थी। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए आनन-फानन में पत्नी का अंतिम संस्कार कर दिया। एसपी मृदुल कच्छावा ने बताया कि 26 मार्च को रूपवास के शक्करपुर निवासी अमर सिंह पुत्र सुखचंदी ने हत्या का मामला दर्ज कराया था। रिपोर्ट में लिखा था कि उसकी बहन प्रेम उर्फ सुमेरा की 18 मार्च को शराब के नशे में उसके जीजा गढ़ी बाजना के गांव हल्लनपुरा सहायपुर निवासी बहादुर सिंह (64) ने बंदूक जैसे हथियार से गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसे बिना बताए उन लोगों ने 3-4 अन्य लोगों के साथ मिलकर उसकी बहन के शव को जला दिया और सबूत नष्ट कर दिए। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू किए।
पति ने गोली चलाने की बात कबूली
गढ़ी बाजना थाना अधिकारी हीरालाल के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया और जांच शुरू की गई। टीम ने आरोपी बहादुर सिंह के मोबाइल नंबर की सीडीआर प्राप्त कर उसका विश्लेषण किया। सीडीआर के विश्लेषण से प्राप्त तथ्यों के आधार पर आगे की पूछताछ करने पर बहादुर सिंह ने अपनी पत्नी की गोली मारकर हत्या करना स्वीकार किया है। मामले में आरोपी पति बहादुर सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके कब्जे से एक नाली बंदूक जब्त कर ली गई है।
घरेलू विवाद में हुई मौत
गढ़ी बाजना थाना प्रभारी हीरालाल मीना ने बताया कि 18 मार्च की रात को बहादुर सिंह भील शराब के नशे में अपनी पत्नी प्रेम उर्फ सुमेरा (55) से झगड़ा कर रहा था। इसी बीच बहादुर ने अपनी कारतूस भरी हुई बंदूक उठा ली, जिसका इस्तेमाल जंगली जानवरों के शिकार के लिए किया जाता है। पत्नी प्रेम ने बंदूक की नाल पकड़कर विरोध किया। इसी हाथापाई के दौरान अचानक गोली चल गई। जिससे पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। अधिक खून बहने से पत्नी प्रेम की मौत हो गई। इसके बाद आरोपी पति बहादुर सिंह ने बचने के लिए आनन-फानन में अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार भी कर दिया था। यह भी पढ़ें : भरतपुर पुलिस रेंज की नई कवायद: पुलिस तथ्यों से न करे छेड़छाड़, इसके लिए जारी किए नए नियम |
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