>>: नगर निगम ने अब ये ठान लिया...

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कचरा निस्तारण प्लांट 6 माह से बंद है। इसे शुरू करने के लिए नगर निगम ने पहल की न प्लांट संचालक ने। हैरत तो ये है कि करीब एक साल पहले 4.10 करोड़ रुपए का भुगतान भी कर दिया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी न मिलना इसका कारण माना जा रहा है। निगम को कचरे की चिंता शायद नहीं है। यही कारण है कि कभी कचरे में आग लगाई जा रही है तो कभी ट्रंचिंग ग्राउंड से कचरा प्लांट तक नहीं पहुंचता।
6 साल पहले प्लांट की स्थापना अग्यारा में की गई थी। कुछ माह ये प्लांट चला लेकिन बाद में बंद हो गया। करीब 4 साल तक प्लांट का पहिया नहीं घूमा। एक साल पहले राजस्थान पत्रिका ने अभियान चलाया तो बमुश्किल पहिया घूमा। करीब 4 माह तक प्लांट चला और कचरे का निस्तारण हुआ। सितंबर माह के आखिरी सप्ताह में फिर ये प्लांट बंद हो गया। अग्यारा में कचरे का पहाड़ लगना शुरू हो गया। 10 लाख एमटी से ज्यादा कचरा यहां जमा बताया जा रहा है। कुछ समय पहले कचरे में फिर आग लगी तो आसपास के गांव प्रभावित हो गए। दुर्गंध से भी जनता परेशान है।

शहर से निकलता है 200 एमटी कचरा
शहर के 65 वार्डां से हर दिन करीब 200 एमटी कचरा निकलता है। ये कचरा अंबेडकर नगर ट्रंचिंग ग्राउंड में लाया जाता है। यहां से अग्यारा प्लांट पर भेजा जाता है। इसके लिए अलग से टेंडर भी किया गया है। अग्यारा में अब कचरा लगातार बढ़ रहा है। प्लांट चल नहीं रहा। ऐसे में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। वहां कचरा डालने की जगह नहीं बचेगी तो फिर कचरा शहर से भी नहीं उठ पाएगा। शहरियों को परेशानी होगी। पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने की संभावनाएं प्रबल हो रही हैं।

प्लांट संचालक बदल सकता

नगर निगम के एक अधिकारी का कहना है कि कचरा निस्तारण प्लांट संचालक को एनओसी प्रदूषण बोर्ड से लेनी चाहिए। इसके लिए पहले भी पत्र लिखे गए हैं और आगे भी लिखेंगे। कोशिश होगी कि जल्द ये चले। यह भी कहा जा रहा है कि काम न करने पर प्लांट संचालक बदल सकता है।

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