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नागौर. लोकसभा चुनाव-2019 में जिले के जिन बूथों पर कम मतदान हुआ था, उनमें इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए जिला निर्वाचन विभाग ने कमर कस ली है। जिला स्वीप टीम ने इसके लिए विधानसभावार कम मतदान प्रतिशत वाले केन्द्रों का चयन कर लिया है तथा अब नुक्कड़ नाटक एवं स्वीप रथ के माध्यम से मतदाताओं को मतदान के प्रति जागरूक किया जाएगा। स्वीप प्रोग्राम नागौर के जिला समन्वयक मनीष पारीक ने बताया कि उन्होंने नागौर लोकसभा क्षेत्र में आने वाली आठों विधानसभा के 50 प्रतिशत से कम मतदान प्रतिशत वाले मतदान केन्द्रों को चिह्नित किया है, जहां आगामी दिनों में नुक्कड़ नाटक, मतदाता जागरुकता रैली, स्लोगन प्रतियोगिता, स्वीप रथ आदि के माध्यम से मतदाताओं को जागरूक किया जाएगा। मतदाताओं को मतदान का महत्व बताया जाएगा।

गौरतलब है कि लोकतंत्र की नींव मताधिकार पर ही रखी जाती है। इस प्रणाली पर आधारित समाज व शासन की स्थापना के लिए प्रत्येक वयस्क नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मत का अधिकार प्रदान किया गया है। जितने अधिक नागरिकों को मताधिकार प्राप्त रहता है, उस देश को उतना ही अधिक जनतांत्रिक समझा जाता है। इसके बाद भी नागरिक मताधिकार का प्रयोग नहीं करते हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जहां-जहां मतदान कम हुआ था, वहां मतदान प्रतिशत बढ़ाने के उद्देश्य से मतदाताओं को जागरूक किया जा रहा है।

नागौर व परबतसर में कम मतदान वाले केन्द्र ज्यादा
वर्ष 2019 के चुनाव में यूं तो लगभग सभी विधानसभाओं में 10 से 15 मतदान केन्द्र ऐसे रहे, जहां 50 प्रतिशत से कम मतदान हुआ। लेकिन नागौर और परबतसर ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां 20-20 मतदान केन्द्र ऐसे हैं, जहां 50 प्रतिशत से कम मतदान हुआ था। नागौर विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो 20 में से 10 बूथ अकेले बासनी बेलिमा के हैं। जबकि अन्य मतदान केन्द्रों में बू-कर्मसोता, श्रीबालाजी, ताऊसर, भदवासी, करनेतपुरा, जाखानियां आदि गांव-कस्बे हैं। नागौर के चार बूथ तो ऐसे हैं, जहां 40 प्रतिशत से भी कम मतदान हुआ। इसी प्रकार परबतसर में कम मतदान वाले बूथों में रूपपुरा, उलाणा, पालड़ी, गूलर, गुढ़ा राजावता, लिचाना, गुजरों की ढाणी, भादवा, झालरा, मेहगांव, बंवली गुढ़ा आदि गांव हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2019 के चुनाव में नागौर लोकसभा में 62.19 प्रतिशत मतदान हुआ था।

वर्ष 2014 व 2019 के मतदान का तुलनात्मक अध्ययन
विधानसभा - 2014 - 2019
मकराना - 63.06 - 64.94
नागौर - 61.05 - 62.42
खींवसर - 60.65 - 64.08
डीडवाना - 59.91 - 60.65
लाडनूं - 59.51 - 59.83
परबतसर - 58.93 - 61.32
जायल - 57.34 - 61.09
नावां - 58.57 - 62.96

ये हैं कम मतदान प्रतिशत के कारण
कम मतदान प्रतिशत के कारणों की बात करें तो मुख्य वजह मतदाताओं का रोजगार के चलते दूसरे राज्यों एवं शहरों में पलायन करना है। नागौर विधानसभा के जिन गांवों में गत चुनाव में मतदान कम हुआ, वहां के लोग दूसरे राज्यों में कमाने गए हुए हैं। लोकसभा का चुनाव बड़ा होने के कारण मतदाता इतनी रुचि भी नहीं दिखाते हैं। उदाहरण के तौर पर बासनी के ज्यादातर युवा मुम्बई रहते हैं, जो सरपंच व विधानसभा के चुनाव में तो मतदान करने आते हैं, लेकिन लोकसभा के चुनाव में अमूमन कम आते हैं। इसके साथ कई जगह मतदान केन्द्र दूर होने, मतदान केन्द्र तक आने-जाने के लिए पर्याप्त साधन नहीं होने, विकास कार्यों को लेकर नाराजगी भी मतदान प्रतिशत कम होने का कारण रहती है।

नागाैर. राजस्थान में अलग-अलग एनफोर्समेंट एजेंसियों ने मार्च महीने की शुरुआत से अब तक नशीली दवाओं, शराब, कीमती धातुओं, मुफ्त बांटी जाने वाली वस्तुओं (फ्रीबीज) और अवैध नकद राशि के रूप में लगभग 507.44 करोड़ रुपए कीमत की जब्तियां की हैं। निर्वाचन विभाग के निर्देश पर लोकसभा आम चुनाव-2024 Lok Sabha General Election-2024 के मद्देनजर आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद 16 मार्च से अब तक एजेंसियों द्वारा पकड़ी गई वस्तुओं की कीमत 400.44 करोड़ रुपए से ज्यादा है। सीजर के मामले में राजस्थान देश में पहले स्थान पर है। आचार संहिता लागू होने के बाद महाराष्ट्र में 277 करोड़ रुपए, पंजाब में 151 करोड़, दिल्ली में 125 करोड़, पश्चिम बंगाल में 95 करोड़, तमिलनाडू में 78 करोड़, तेलंगाना में 70 करोड़, कर्नाटक में 68 करोड़, गुजरात में 64 करोड़ और मध्य प्रदेश में 59 करोड़ रुपए मूल्य की जब्ती की गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रवीण गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में अलग-अलग एजेंसियां चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से संदिग्ध वस्तुओं और धन के अवैध उपयोग पर कड़ी निगरानी कर रही हैं। इसी क्रम में प्रदेश भर में लगातार जब्ती की कार्रवाई की जा रही है। 1 मार्च से अब तक राजस्थान में 14 जिलों में 15-15 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की संदिग्ध वस्तुएं और नकदी जब्त की गई है।

14 जिलों में 15 करोड़ से अधिक की जब्ती
जोधपुर: 39.31
पाली: 27.22
जयपुर: 26.96
उदयपुर: 25.33
अलवर: 23.18
नागौर: 22.03
चूरू: 21.84
झूंझुनू: 20.46
भीलवाड़ा: 20.24
दौसा: 19.79
बाड़मेर: 19.40
श्रीगंगानगर: 18.94
चित्तौड़गढ़: 17.39
बीकानेर: 15.47
(राशि करोड़ रुपए में)


चुनाव आयुक्त गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में अलग-अलग एजेंसियों की ओर से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, 1 मार्च, 2024 से अब तक 23 करोड़ 72 लाख रुपए नकद, लगभग 95 करोड़ 61 लाख रुपए मूल्य की ड्रग्स, लगभग 33 करोड़ 13 लाख रुपए कीमत की शराब और 39 करोड़ 7 लाख रुपए मूल्य की सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं की जब्ती की गई है। साथ ही, 314 करोड़ 75 लाख रुपए कीमत की अन्य सामग्री तथा 1 करोड़ 16 लाख रुपए से अधिक कीमत की मुफ्त वितरण की वस्तुएं (फ्रीबीज) भी जब्त की गई हैं।
उन्होंने ने बताया कि आचार संहिता लागू होने के बाद 16 मार्च, 2024 से अब तक 22 करोड़ 76 लाख रुपए नकद, लगभग 48 करोड़ 58 लाख रुपए मूल्य की ड्रग्स, लगभग 27 करोड़ 5 लाख रुपए कीमत की शराब और 31 करोड़ 19 लाख रुपए मूल्य की सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं की जब्ती की गई है। साथ ही, 269 करोड़ 89 लाख रुपए कीमत की अन्य सामग्री तथा लगभग 95 लाख रुपए से अधिक कीमत की मुफ्त वितरण की वस्तुएं (फ्रीबीज) भी जब्त की गई हैं।
इन संदिग्ध वस्तुओं के अवैध परिवहन पर कार्रवाई करने वाली कार्यकारी एजेंसियों में राज्य पुलिस, राज्य एक्साइज, नारकोटिक्स विभाग एवं आयकर विभाग प्रमुख हैं। इन जांच एवं निगरानी एजेंसियों और विभागों द्वारा प्रदेश भर में कड़ी निगरानी रखी जा रही है और किसी भी संदेहास्पद मामले पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

मूण्डवा नागौर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर आबाद होने के बावजूद बायपास से बसों के गुजरने से परेशान ईनाणा के ग्रामीणों ने मंगलवार को गांधीगिरी से प्रदर्शन किया। युवा सुबह शहीद स्मारक के पास बायपास के किनारे टेंट लगाकर बैठ गए। बायपास से जाने वाली रोडवेज व प्राइवेट बसों के चालकों को फूलों की मालाएं पहनाकर गांव में होकर बसों का संचालन करने के लिए आग्रह किया। युवाओं के इस प्रकार के आचरण से वाहन चालक काफी प्रभावित हुए। ग्रामीणों के इस तरह के व्यवहार की खबर आने जाने वाले सभी वाहन चालकों तक पहुंच गई। शाम होने तक अजमेर की तरफ से आने वाली बसें भी गांव में से होकर निकली।

नागौर डीपो के अलावा अन्य डीपो की बसें भी गांव में से होकर गई। दिन भर लोग बायपास के पास बैठे रहे। सरपंच रूपाराम रोज, कालूराम ईनाणियां, बबलू ईनाणियां, गणपतसिंह, कैलाश, विजय पाराशर, ज्ञानप्रकाश, गरीब राम, रामप्रसाद, सुरेन्द्र ईनाणियां, कंवरीलाल जांगिड़, कैलाश धाकड़, ईश्वर ईनाणियां सहित युवाओं ने बताया कि बसों के बायपास जाने से ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है। सम्पन्न लोग तो निजी वाहनों से चले जाते हैं। महिलाओं, विद्यार्थियों, मजदूरों, अस्वस्थ लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। बायपास दूर होने तथा आबादी क्षेत्र नहीं होने से बसों का संचालन गांव में होकर करना बेहद जरूरी है।

नागौर. शहर की निकटवर्ती ग्राम पंचायत ताऊसर की ओर से गांव में मंगलवार को शीतलाष्टमी पर डांडिया उत्सव व मेले का आयोजन किया गया। ढोल की थाप के साथ राजस्थानी वेशभूषा पहने युवाओं ने पैरों में घुंघरू बांधकर जमकर डांडिया नृत्य किया। डांडिया करने पहुंचे युवाओं में कुछ ने कालबेलिया महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा पहनी हुई थी तो कुछ युवाओं ने राजस्थानी साफा, धोती-कुर्ता धारण किया हुआ था। ढोल की थाप के साथ बजती संगीत की धुनों ने डांडिया कार्यक्रम को ऊंचाइयां प्रदान की।

डांडिया उत्सव शुरू होने के साथ ही पूरा मेला डांडिया के रंग में रंगने लगा। राजस्थानी गीतों पर सधे कदमों से डांडिया खनकाते ग्रामीण उत्साहित नजर आ रहे थे। इस दौरान युवाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर डांडिया किया, वहीं ढोल की थाप, डांडिया की खनक व घुंघरू की आवाज उनको उत्साहित कर रही थी। सांस्कृतिक विशेषताओं को दर्शाती पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक व युवतियों के साथ बच्चे व बड़े भी डांडिया नृत्य करने में पीछे नहीं रहे। इस दौरान शहर से भी काफी संख्या में लोग डांडिया देखने पहुंचे।

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