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नौ सितंबर से विधानसभा का सत्र, मगर हेमाराम चौधरी के इस्तीफे पर नहीं हुआ कोई फैसला Monday 30 August 2021 10:40 AM UTC+00 ![]() जयपुर। राजस्थान विधानसभा का सत्र 9 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। सत्र हंगामेदार रहने की संभावना है। बिगड़ी कानून व्यवस्था, किसानों की कर्जमाफी, बिजली बिलों का करंट सहित कई मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति बना ली है। मगर इस सत्र में दो नए मुद्दे भी जुड़ गए हैं, जिन्हें लेकर विपक्ष हंगामा करने वाला है। इनमें से एक है बाड़मेर के गुढ़ामालानी कांग्रेस विधायक हेमाराम चौधरी के इस्तीफे का मामला। सचिन पायलट गुट के असंतुष्ट विधायक हेमाराम ने विधायक पद से तीन महीने पहले इस्तीफा दिया था। हेमाराम ने ई-मेल और डाक से अलग-अलग इस्तीफे की कॉपी विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को भेजी थी, जिसकी पुष्टि भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक उनके इस्तीफे को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया है। बल्कि विधानसभाध्यक्ष सीपी जोशी ने उनको राजकीय उपक्रम समिति का सभापति बनाकर मामले को और ज्यादा उलझा दिया है। 18 मई को दिया था इस्तीफा हेमाराम चौधरी ने 18 मई को विधायक पद से इस्तीफा दिया था। इसके दो दिन बाद विधानसभा सचिवालय ने चौधरी को सूचना भेजी थी कि इस्तीफे के संबंध में वो लॉकडाउन की बाध्यता हटने के सात दिन में विधानसभा अध्यक्ष से मिलें। इसके बाद चौधरी विधानसभाध्यक्ष से मुलाकात ही नहीं हुई। चौधरी ने खुद के क्षेत्र में विकास नहीं होने से नाराज होकर इस्तीफा दिया था। इससे पहले भी 14 फरवरी, 2019 को भी उन्होंने इस्तीफा दिया था, लेकिन उस वक्त विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था और सामने लोकसभा चुनाव होने वाले थे। जिसकी वजह से पार्टी ने उन्हें मना लिया था। राजकीय उपक्रम समिति का बनाया है सभापति सीपी जोशी ने विधानसभा में 4 वित्तीय समितियों और 15 अन्य समितियों का गठन पिछले दिनों किया था। साल 2021-22 के लिए बनाई गई इन समितियों में राजकीय उपक्रम समिति का चौधरी को सभापति बनाया गया है। हालांकि इस समिति की अभी तक एक भी बैठक नहीं हो पाई है, जिसे लेकर उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने जुबानी हमला भी बोला था। उन्होंने कहा था कि सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि अपनी बात पर अडिग रहने वाले चौधरी को राजक्रीय उपक्रम समिति के सभापति के रूप में मनोनीत करने से पूर्व उनकी सहमति ली गई थी ? बिना सहमति के सरकारी मुख्य सचेतक द्वारा विधानसभाध्यक्ष को सभापति के रूप में नाम प्रस्तावित करना कहां तक उचित है ? |
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