>>: 10 साल बाद भी नहीं बन पाया पुल, 7 साल से वसूल रहे टोल

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नागौर. राष्ट्रीय राजमार्ग-89 (नया 58) के नागौर-अजमेर सेक्शन की सड़क का नवीनीकरण एवं चौड़ाईकरण का काम 10 साल बाद भी अधूरा पड़ा है। पहले पीपीपी मोड पर दिए गए ठेके का काम पूरा नहीं होने पर अगस्त 2019 में पीडब्ल्यूडी (एनएच) ने नया ठेका दिया। इसके बावजूद काम आज भी अधूरा है। जनता को टोल चुकाने के बावजूद न तो सही सड़क मिली और न ही रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी (पुल) की सुविधा। मुख्यमंत्री की पूर्ववर्ती सरकार में शुरू हुआ काम न तो भाजपा पांच साल में पूरा करवा पाई और न दुबारा सत्ता में आई गहलोत सरकार के कार्यकाल में पूरा होता नजर आ रहा है।

पहले रेलवे से अप्रूव ड्राइंग के अनुसार रेलवे क्रॉसिंग पर स्पान की लम्बाई 28 मीटर थी, लेकिन अब रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ने से स्पान की लम्बाई 37 मीटर हो गई है। उसके हिसाब से नई ड्रॉइंग बनाकर 26 जुलाई 2022 को जीएडी अप्रूव करवाई। अब डिजाइन तैयार करवाकर उच्चाधिकारियों को भेजी है, वहां से अप्रूवड होने के बाद रेलवे से अप्रूव करानी पड़ेगी। इस प्रक्रिया में कम से कम दो महीने और लगेंगे। उसके बाद आरओबी का काम शुरू हो पाएगा।

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वेदप्रकाश, अधिशासी अभियंता, एनएच-58 (अजमेर-नागौर)

एक नजर: अजमेर -नागौर एनएच-58
- 148.25 किमी लम्बाई

- 03 अगस्त 2013 को पीपीपी मोड पर पहला ठेका

- 377 करोड़ कुल बजट - पुराना ठेका

- 02 फरवरी 2015 तक पूरा करना था काम

- 02 टोल नाकों कुचेरा व बाड़ी घाटी के पास हो रही वसूली

- 18 मार्च 2016 को कम्पनी को टोल वसूली की मंजूरी दी

- 144 करोड़ का नया ठेका अगस्त 2019 में दिया, काम आज भी अधूरा

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377 करोड़ रुपए में दिया था ठेका, काम अधूरा
नागौर-अजमेर एनएच की 148.25 किलोमीटर की इस सड़क के लिए सरकार ने पहले पीपीपी मोड पर काम कराने के लिए जीवीआर कम्पनी को 377 करोड़ में ठेका दिया, लेकिन कम्पनी ने काम पूरा किए बिना मार्च 2016 में टोल वसूली शुरू कर दी। इसके बावजूद करीब सवा तीन साल तक काम पूरा नहीं हुआ, तो एनएच ने अगस्त 2019 में 144 करोड़ में नया ठेका दिया। इसमें अधूरा काम पूरा कराने के साथ पूरी सड़क की मरम्मत (रिन्युअल) भी शामिल थी। रेण बायपास और रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी का काम अधूरा है।

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