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लेटलतीफी की सारी हदें पार, रोड बनने के बाद वापस मरम्मत भी हो गई, पर नहीं बन पाया आरओबी Thursday 27 April 2023 07:28 AM UTC+00 नागौर. राष्ट्रीय राजमार्ग-89 (नया 58) के नागौर-अजमेर सेक्शन की सडक़ का नवीनीकरण एवं चौड़ाईकरण करने का काम 10 साल बाद भी अधूरा पड़ा है। पहले पीपीपी मोड पर दिए गए ठेके का काम पूरा नहीं होने पर अगस्त 2019 में पीडब्ल्यूडी एनएच ने नया ठेका दिया, इसके बावजूद काम आज भी अधूरा है। वजह चाहे सरकारी सिस्टम रहा हो या फिर ठेकेदार की लापरवाही, जनता को टोल चुकाने के बावजूद न तो सही सडक़ मिली और न ही रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी की सुविधा। चिंता का विषय यह है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पूर्व सरकार में शुरू हुआ काम न तो भाजपा के पांच साल के कार्यकाल में पूरा हो पाया और न ही वापस सत्ता में आई गहलोत सरकार के कार्यकाल में पूरा होता नजर आ रहा है। गौरतलब है कि नागौर-अजमेर एनएच-58 की 148.25 किलोमीटर की इस सडक़ के लिए सरकार ने पहले पीपीपी मोड पर काम कराने के लिए जीवीआर कम्पनी को 377 करोड़ में ठेका दिया, लेकिन कम्पनी ने काम पूरा किए बिना ही मार्च 2016 में टोल वसूली शुरू कर दी। इसके बावजूद करीब सवा तीन साल तक काम पूरा नहीं हुआ तो एनएच ने अगस्त 2019 में टेंडर प्रक्रिया अपना 144 करोड़ में नया ठेका दिया, जिसमें अधूरा काम पूरा कराने के साथ पूरी सडक़ की मरम्मत (रिन्युअल) भी शामिल थी। पिछले करीब चार साल में ठेकेदार कम्पनी ने ईनाणा, मूण्डवा, भडाणा सहित अन्य बायपास व रिन्युअल का काम तो कर दिया, लेकिन रेण बायपास और रेण रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी का काम आज भी अधूरा है। एक नजर - अजमेर - नागौर एनएच-58
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