>>: लेटलतीफी की सारी हदें पार, रोड बनने के बाद वापस मरम्मत भी हो गई, पर नहीं बन पाया आरओबी

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नागौर. राष्ट्रीय राजमार्ग-89 (नया 58) के नागौर-अजमेर सेक्शन की सडक़ का नवीनीकरण एवं चौड़ाईकरण करने का काम 10 साल बाद भी अधूरा पड़ा है। पहले पीपीपी मोड पर दिए गए ठेके का काम पूरा नहीं होने पर अगस्त 2019 में पीडब्ल्यूडी एनएच ने नया ठेका दिया, इसके बावजूद काम आज भी अधूरा है। वजह चाहे सरकारी सिस्टम रहा हो या फिर ठेकेदार की लापरवाही, जनता को टोल चुकाने के बावजूद न तो सही सडक़ मिली और न ही रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी की सुविधा। चिंता का विषय यह है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पूर्व सरकार में शुरू हुआ काम न तो भाजपा के पांच साल के कार्यकाल में पूरा हो पाया और न ही वापस सत्ता में आई गहलोत सरकार के कार्यकाल में पूरा होता नजर आ रहा है।

गौरतलब है कि नागौर-अजमेर एनएच-58 की 148.25 किलोमीटर की इस सडक़ के लिए सरकार ने पहले पीपीपी मोड पर काम कराने के लिए जीवीआर कम्पनी को 377 करोड़ में ठेका दिया, लेकिन कम्पनी ने काम पूरा किए बिना ही मार्च 2016 में टोल वसूली शुरू कर दी। इसके बावजूद करीब सवा तीन साल तक काम पूरा नहीं हुआ तो एनएच ने अगस्त 2019 में टेंडर प्रक्रिया अपना 144 करोड़ में नया ठेका दिया, जिसमें अधूरा काम पूरा कराने के साथ पूरी सडक़ की मरम्मत (रिन्युअल) भी शामिल थी। पिछले करीब चार साल में ठेकेदार कम्पनी ने ईनाणा, मूण्डवा, भडाणा सहित अन्य बायपास व रिन्युअल का काम तो कर दिया, लेकिन रेण बायपास और रेण रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी का काम आज भी अधूरा है।

एक नजर - अजमेर - नागौर एनएच-58
148.25 किमी कुल लम्बाई
3 अगस्त 2013 को पीपीपी मोड पर काम दिया
2 फरवरी 2015 तक पूरा करना था
10 मीटर चौड़ी करनी थी सडक़, 2-2 मीटर की पटरियां भी बनानी थी
377 करोड़ कुल बजट - पुराना ठेका
36 किमी कुल बायपास निर्माण
02 टोल नाकों कुचेरा व बाड़ी घाटी के पास हो रही टोल वसूली
18 मार्च 2016 को कम्पनी को टोल वसूली की मंजूरी दी
144 करोड़ बजट - नया ठेका अगस्त 2019 में दिया गया


आरओबी की ड्राइंग अप्रूवल का काम चल रहा
पहले पीपीपी मोड पर ठेके के लिए आरओबी की ड्राइंग रेलवे से अप्रूव करवाई, लेकिन चार साल तक काम नहीं हो पाया। पहले आरओबी स्पान की लम्बाई 28 मीटर थी, लेकिन अब रेलवे लाइनों की संख्या बढऩे से स्पान की लम्बाई 37 मीटर हो गई है, जिसके हिसाब से नई ड्राइंग बनाकर 26 जुलाई 2022 को जीएडी अप्रूव करवाई। अब स्ट्रक्चरल डिजाइन तैयार करवाकर उच्चाधिकारियों को भेजी है, जहां से अप्रूवड होने के बाद रेलवे को भेजी जाएगी। इस प्रक्रिया में कम से कम दो महीने और लगेंगे। उसके बाद आरओबी का काम शुरू हो पाएगा
- वेदप्रकाश, अधिशासी अभियंता, एनएच-58 (अजमरे-नागौर)

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