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शिक्षक मांग रहे गैर शैक्षिक कार्यों से मुक्ति, सरकार ने महंगाई राहत शिविरों में भी लगाया Thursday 27 April 2023 06:30 AM UTC+00 सीकर. इसे विडंबना कहें या शासन- प्रशासन की मनमानी! 'हमें पढ़ाने दो' की मांग सहित सरकारी शिक्षक एक तरफ 41 दिन से कलक्ट्रेट पर धरना देकर गैर शैक्षिक कार्यों का विरोध कर रहे हैं, उन्हें ही अब महंगाई राहत शिविर में भी नियुक्त कर दिया गया है। जहां शैक्षिक कार्यों से दूर अब वे सरकारी योजनाओं के लिए लोगों के पंजीयन संबंधी कार्य करने को मजबूर हैं। अब चूंकि परीक्षा परिणाम जारी करने के साथ सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए जनसंपर्क अभियान भी राहत शिविर कार्यक्रम के बीच में ही संचालित होना है। ऐसे में बेपटरी होती व्यवस्थाओं के साथ नए सत्र में सरकारी स्कूलों के नामांकन पर भी नकारात्मक असर पडऩे की आशंका गहरा गई है। 500 शिक्षक प्रभावित, 1500 बीएलओ नियुक्त महंगाई राहत शिविर तथा प्रशासन गांवों व शहरों के संग अभियान में प्रशासन ने करीब 500 शिक्षकों की नियुक्ति की है। वहीं, 1500 शिक्षक पहले से बीएलओ का कार्य कर रहे हैं। शिक्षकों को करने पड़ रहे 32 से ज्यादा शैक्षिक कार्य शिक्षकों को बीएलओ व जनआधार पंजीकरण, मिड- डे मील, बाल गोपाल दूध व शाला दर्पण के अलावा छात्रवृत्ति, राजश्री व पालनहार योजना, यूनिफॉर्म, एसआईक्यूई, उत्सव- जयंती, शाला स्वास्थ्य, स्वच्छता, मीना मंच, यूथ ईको क्लब, इंस्पायर अवार्ड, प्रवेशोत्सव, एसएमसी बैठक, पाठ्य पुस्तक, किचन गार्डन, पुस्तकालय, वृक्षारोपण, खेलकूद, स्टॉक, वॉलिन्टियर, ऑनलाइन व डाक सरीखे काम के अलावा निष्ठा प्रशिक्षण, आत्मरक्षा प्रशिक्षण, हाउस होल्ड सर्वे संबंधी गैर शैक्षिक कार्य पहले से करने पड़ रहे हैं। आरटीई एक्ट के खिलाफ आरटीई एक्ट 2009 की धारा 27 के अनुसार किसी भी शिक्षक को 10 वर्षीय जनगणना, आपदा राहत कार्यों, पंचायतीराज संस्थाओं, स्थानीय निकायों, विधान मण्डलों, विधान सभा और संसदीय चुनाव के अलावा कोई कार्य नहीं करवाया जा सकता। निर्वाचन आयोग भी 2010 में केवल संविदा शिक्षकों को ही बीएलओ लगाने के आदेश जारी कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट व मुख्य सचिव भी शिक्षकों को गैर शैक्षिक कार्य में नहीं लगाने के कई आदेश जारी कर चुके हैं। पर इसके बावजूद प्रदेश के शिक्षक गैर शैक्षिक कार्यों के लिए मजबूर है। 41 दिन से धरना जारी, बड़े आंदोलन की तैयारी इधर, शिक्षक गैर शैक्षिक कार्य करवाने के विरोध में 41 वें दिन भी कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे रहे। राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत के जिलाध्यक्ष विनोद पूनियां ने बताया कि शासन व प्रशासन की हठधर्मिता की वजह से शिक्षक स्कूल में शिक्षण का अपना मूल काम नहीं कर पा रहे हैं। जिसका असर नामांकन से लेकर शिक्षण व्यवस्था तक पर पड़ रहा है। पर 41 दिन से धरने के बाद भी किसी भी स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। मामले में बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। |
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