>>: Guru Pushya Nakshatra: शादियों के मुहूर्त शुरू होने से पहले खरीदारी की शुभ घड़ी

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कोटा. इस समय गुरु अस्त होने के कारण विवाह के मुहूर्तों पर विराम लगा हुआ है। गर्मियों के सीजन के विवाह मुहूर्तों की शुरुआत मई माह से हो जाएगी। इस दौरान मई और जून दोनों ही माह में जमकर शादियां होंगी। विवाह मुहूर्त शुरू होने से पहले 27 अप्रेल को गुरु पुष्य योग का विशेष संयोग रहेगा। यह योग खरीदारी के लिए विशेष शुभ माना जाता है। ऐसे में इस योग में बाजारों में जमकर खरीदारी की उम्मीद है।

पुष्य के साथ अन्य संयोग भी

पंडितों के अनुसार गुरु पुष्य योग सभी प्रकार की खरीदारी के लिए विशेष शुभ माना जाता है। पं. लक्ष्मीकांत शुक्ला ने बताया कि पुष्य नक्षत्र 27 अप्रेल को सुबह सात बजे से प्रारंभ हो जाएगा और अगले दिन 9.50 मिनट तक रहेगा। 27 को गुरु पुष्य योग रहेगा। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग भी विद्यमान रहेंगे। इस लिहाज से सभी प्रकार की खरीदारी करना इस दिन अत्यंत फलदायी होगा। इस योग में भूमि, भवन, वाहन, आभूषण, बर्तन, नवीन वस्त्र सहित सभी खरीदारी करना विशेष शुभ माना गया है।

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मई-जून में हर दूसरे दिन विवाह का मुहूर्त

गर्मियों के सीजन में सबसे अधिक शादियां होती हैं, क्योंकि इस समय स्कूलों की छुट्टियां भी रहती हैं। गुरु का उदय होने के साथ ही विवाह मुहूर्तों की शुरुआत हो जाएगी। इस बार मई और जून माह में सबसे ज्यादा शादियां रहेंगी। मई माह में 16 दिन और जून में भी 16 दिन विवाह के मुहूर्त रहेंगे। इसमें खासकर 2, 3, 5,10,11,16,21, 22, 26,28, 29, 30 मई को शादियां रहेगी। जून में 3,5,6,7, 11,12,13, 23, 25 जून को शादियां रहेगी। इसके बाद जुलाई माह से पांच माह के लिए विवाह कार्यों पर फिर से विराम लग जाएगा।

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लगभग डेढ़ माह बाद शुरू होगी विवाह की बेला

लगभग डेढ़ माह के बाद विवाह के मुहूर्तों की शुरुआत होगी। 15 मार्च से विवाह मुहूर्त बंद है। पहले खरमास के कारण और उसके बाद गुरु अस्त होने के कारण विवाह कार्यों पर विराम लगा हुआ था। अक्षय तृतीया अबूझ मुहूर्त पर भी इस बार विवाह के योग नहीं थे। अबूझ मुहूर्त के कारण कुछ शादियां हुई थी। पंडितों का कहना है कि विवाह के लिए गुरु और शुक्र का उदित होना आवश्यक होता है। दोनों में से एक भी ग्रह अगर अस्त होता है तो विवाह के योग नहीं बनते हैं।

खरीदारी के लिए उत्तम योग

पं. लक्ष्मीकांत शुक्ला ने बताया कि पुष्य नक्षत्र सभी प्रकार के नक्षत्रों में श्रेष्ठ माना जाता है। खासकर जब भी यह नक्षत्र रविवार और गुरुवार के दिन आता है तो ऐसे में रवि पुष्य और गुरु पुष्य योग बनता है। यह योग खरीदारी के लिए उत्तम माना गया है। इसमें की गई खरीदारी स्थायित्व प्रदान करती है।

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