>>: जिला परिषद : छह निर्माण कार्य मानकों में फेल...भुगतान की संस्तुति करने वालों को इनाम में दी नौकरी

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अलवर. जिला परिषद के खेल निराले हैं। आए दिन किसी न किसी मामले को लेकर चर्चा में है। नवंबर 2022 में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री रमेश मीणा ने मानकों में फेल मिले छह निर्माण कार्यों के वसूली करने के निर्देश दिए थे लेकिन अधिकांश केसों में सबको माफ कर दिया। यही नहीं तकनीकी सहायक पर कड़ी कार्रवाई करने की बजाय उसे संविदा पर फिर से चार माह बाद नौकरी दे दी गई।

वित्तीय स्वीकृति के बिना शुरू हो गया काम

22 नवंबर 2022 को कैबिनेट मंत्री रमेश मीणा की जिला परिषद में बैठक हुई। इससे तीन से चार दिन पहले राज्य स्तरीय अधिकारियों की टीम जिले में पहुंची। उन्होंने पंचायत समिति किशनगढ़बास क्षेत्र का निरीक्षण किया। जांच में पाया कि ग्राम पंचायत किथूर को सीसी इंटर लॉकिंग सड़क निर्माण श्मशाम घाट से डामर रोड की ओर की वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली थी जबकि मौके पर काम करवाया गया था। करवाया गया काम भी मानकों में फेल मिला। मंत्री ने इस कार्य के भुगतान न करने के निर्देश दिए।


काम शुरू करने से पहले के फोटो फाइलों में नहीं मिले
ग्राम पंचायत लंगड़बास के अंतर्गत ग्राम तीतरका में श्मशान घाट की चारदीवारी, गेट, मिट्टी भरत व विश्राम स्थल निर्माण कार्य तीतरका एसएफसी योजना में कराया गया। टीम ने पाया कि काम शुरू करने से पहले की फोटो फाइल में नहीं मिली। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि तत्कालीन सरपंच की ओर से जमीन लेवल से दो फीट ऊंचाई तक दीवार का निर्माण करवाया गया था जबकि वर्तमान में कार्य नींव खुदाई लेते हुए नए सिरे से दिखाया गया। भुगतान भी उठाया गया। पूरे काम की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए।

तीन जगहों पर बनी सड़क, सब में हुआ खेल

इसी ग्राम पंचायत के गांव तीतरका में इंटर लॉकिंग सड़क निर्माण कार्य हजरू के घर के पास से नोगांवा ढांढा की ओर तीतरका एफएफसी योजना के तहत किया गया है। जांच में यह काम फेल हो गया। मंत्री ने पूरी राशि वसूली के निर्देश दिए। इसी तरह लंगड़बास के नंगली पठान, तीतरका बोलनी में हुए काम भी मानकों में फेल हुए। उसमें भी वसूली के निर्देश दिए गए।


कार्रवाई की बजाय इस तरह दे दी गई नौकरी
कैबिनेट मंत्री के पास बैठक में इस राज्य स्तरीय टीम की रिपोर्ट पहुंची तो उसके बाद मंत्री ने कनिष्ठ तकनीकी सहायक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर तीन दिन में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया लेकिन उसी अधिकारी को फिर से पांच माह बाद उसी जगह पर संविदा पर बैठा दिया गया। यानी नौकरी पर रख लिया गया। इसकी चारों ओर चर्चा है। यह पूरा प्रकरण अब फिर से मंत्री के पास भेजा गया है।

मैंने हाल ही में कार्यभार ग्रहण किया है। इस प्रकरण की जानकारी नहीं है। संबंधित अधिकारियों से पता करके आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- कनिष्क कटारिया, मुख्य कार्यकारी अधिकारी

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