>>: चमत्कारी तनोट मंदिर परिसर का होगा नवनिर्माण

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जैसलमेर. देश भर में अपनी चमत्कारिक गाथाओं और भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में अवस्थित होने की वजह से रोमांचकारी तनोटराय माता के मंदिर परिसर का नवनिर्माण करवाया जाएगा। इसके लिए शनिवार को विधि विधान से पूजन कार्य किया गया। सीमा सुरक्षा बल के उत्तर क्षेत्रीय उपमहानिरीक्षक असीम ब्यास ने मुख्य यजमान के तौर पर पूजन कार्य करवाया। सीमा सुरक्षा बल की 166वीं वाहिनी रामगढ़ के तत्वावधान में आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम के मौके पर डुडेश्वरनाथ मंदिर, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के महंत नारायण गिरी और रानी भटियाणी मंदिर, जसोल के महंत कंवर हरीश चंद्र सिंह सहित अन्य पंडितों के सानिध्य में क्षेत्रीय मुख्यालय जैसलमेर (उ.) के कमांडेंट लोकेश कुमार, कमांडेंड संजय चौहान, कमांडेंट सीताराम बैरवा, कमांडेंट रनबीर सिंह, कमांडेंट विरेन्दर पाल सिंह, उपकमांडेंट अनिल कुमार शर्मा (सामान्य) और अन्य अधिकारी व उनके परिवारजन उपस्थित रहे।
भूमि की खुदाई शुरू
शनिवार प्रात: आयोजित कार्यक्रम के तहत उपमहानिरीक्षक असीम ब्यास ने विधि विधान से तनोट माता मंदिर कानवनिर्माण शुरू करवाने के लिए मंदिर के परिसर के पीछे भूमि पूजन किया। इसके बाद भूमि की खुदाई का कार्य शुरू कर दिया गया। बाद में सभी ने तनोट राय माता मंदिर के परिसर में पूजा अर्चना की और बाद में दर्शनार्थियों को प्रसाद वितरण किया व भोज का भी प्रबंध किया गया। जानकारी के अनुसार तनोटराय माता मंदिर परिसर के विकास के लिए जगदीश सुथार ने 25 लाख, तेजसिंह भाटी ने 1 लाख, राणी भटियाणी मंदिर संस्थान ने 50 हजार तथा महंत नारायण गिरी ने 11 हजार रुपए का अर्थ सहयोग दिया है।
केंद्र व राज्य सरकारें कर रही विकास
गौरतलब है कि तनोटराय मंदिर स्थल के धार्मिक और पर्यटन महत्व के मद्देनजर केंद्र व राज्य सरकारों की तरफ से विगत समय के दौरान कई विकास कार्यों का आगाज करवाया गया है। ऐसे ही तनोट के समीपस्थ बबलियानवाला सीमा चौकी को आम पर्यटकों के लिए खोले जाने के साथ वहां लाखों रुपए की कीमत के कार्य करवाए जा चुके हैं। गत अर्से के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह व राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तनोट क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं। तनोट मंदिर के विकास और संचालन सहित अन्य व्यवस्थाओं की देखभाल का जिम्मा केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आने वाला सीमा सुरक्षा बल विगत दशकों से संभाले हुए है। सीमा की रखवाली करने वाले बल के तमाम जवानों व अधिकारियों की अगाध आस्था इस मंदिर के साथ जुड़ी है।

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