>>: जा​निए क्या वजह है कि संग्रहालय की ऐतिहासिक वस्तुओं को नहीं देख पा रहे हैं पर्यटक

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संग्रहालय में पूर्व राजा- महाराजाओं के समय की वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है। इसकी स्थापना 1940 में की गई थी। यहां पर तीन कमरों में अलग-अलग सामग्री\B को शोकेस में रखा गया है।

इसमें प्रथम कक्ष में राजा-महाराजाओं के वस्त्र, हाथी दांत, लकडी, हाथीदांत, चंदन व मिटटी के बर्तन, राजा के शिकार किए गए जीव, वाद्य यंत्र, खुदाई में निकली प्रतिमाएं, चांदी की मेज, साइकिल, वाद्य यंत्र आदि को दर्शाया है। दूसरे कक्ष में राग-रागिनी पर आधारित चित्र दिखाए गए हैं। इसमें किशनगढ़ शैली, बूंदी, अलवर, राजपूत व मुगलकालीन शैली के चित्र हैं। इसके साथ ही हस्तलिखित दुर्लभ ग्रंथ रखे गए हैं, जिसमें अकबरनामा, बाबरनामा, शाहनामा आदि शामिल हैं। तीसरे कक्ष में अस्त्र-शस्त्र का संग्रह है, जिसमें एक म्यान में दो तलवार, मोहम्मद गौरी का जिरह बख्तर आदि शामिल है।

मालूम हो कि अलवर संग्रहालय में प्रतिवर्ष पांच हजार से ज्यादा पर्यटक आते हैं। इस साल मार्च में 8053 व अप्रेल 6753 पर्यटक संग्रहालय की सैर कर चुके हैं।

पिछले साल इतने आए पर्यटक

अप्रेल - 5114 मई - 4843 जून - 6482 जुलाई - 6836 अगस्त - 5880 सितंबर- 5288 अक्टूबर- 7790 नवंबर - 5716 दिसंबर 5943

अलवर संग्रहालय में प्रदर्शित सामग्री
अस्त्र शस्त्र - 800 पेंटिंग 250 प्रतिमाएं 15 हस्तलिखित ग्रंथ व पुस्तक -30 मिटटी, हाथी दांत की सामग्री सहित विविध वस्तुएं - 500

1 करोड की लागत से करवाया काम कुछ साल पहले ही अलवर संग्रहालय को आधुनिक रूप से तैयार किया गया। इसके लिए विभाग ने करीब एक करोड रुपए की लागत से काम करवाया। जिसमें यहां पर नए शो केस, नए डिस्प्ले, नया फर्श आदि करवाए गए हैं।

अलवर का संग्रहालय राजस्थान में बहुत खास है। दुर्लभ सामग्री के मामले में राजस्थान में दूसरे स्थान पर है। यहां पर जगह की कमी है, इसलिए सभी ऐतिहासिक सामग्री को प्रदर्शित नहीं किया जा सकता। समय-समय पर ही निकाला जाता है।
प्रतिभा यादव, संग्रहालय अध्यक्ष , अलवर

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