यूं तो वह हर दिन वह किसी न किसी को जिंदगी देती थी लेकिन अब वह राजस्थान की ऐसी एएनएम बन गई हैं तो मौत के बाद भी तीन तीन लोगों को जिंदगी दे गई। कविता-जिस तरह का नाम था उससे कहीं बड़ा वह जिंदगी की गीत लिख गई। वह अभी इस दुनिया में थी नहीं, वह अभी भी जिंदा है। तीन लोगों की जिंदगी बनकर। बात कर रहे हैं सीकर में कार्यरत एएनम कविता की।
पूरी जिंदगी मरीजों की तीमारदारी में लगा दी और जब दुनिया को अलविदा कहने का वक्त आया तो तीन जनों को जीवनदान दे गई। सैंतालीस साल की छोटी सी उम्र में एएनएम कविता यादव अपने पीछे लंबी यादें छोड़ गईं। सीकर के सवाईपुरा की कविता गुरुवार को एसएमएस अस्पताल में जिंदगी की जंग हार गई लेकिन जाते-जाते तीन व्यक्तियों के लिए देवदूत बन गईं।
उसकी दोनों किडनी एसएमएस अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में दो मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं जब कि दिल को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से दिल्ली भेजा गया है। वहां उसे भारतीय सेना के आर्मी अस्पताल में प्रत्यारोपित किया जाएगा। कविता का दिल धड़कता रहेगा। जिंदा रहने पर सबका दिल धड़कता है लेकिन यह दिल मौत के बाद भी धड़केगा।
ब्रेनडेड के बाद तीन जीवनदान
यूरोलोजी के विभागाध्यक्ष डॉ.शिवम प्रियदर्शी ने बताया कि कविता यादव को तबीयत बिगड़ने पर 21 मई को सीकर से जयपुर लाया गया था। बाद में सीकर रोड स्थित निजी अस्पताल से एसएमएस में रैफर किया गया लेकिन उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद कविता के पति छोटे लाल से अंगदान के लिए सोटो की टीम, डॉ देवेंद्र पुरोहित, डॉ.चित्रा सिंह व ट्रांसप्लांट कोर्डिनेटर्स ने समझाइश की तब वे माने। एक किडनी बेंगलूरु निवासी उर्मिला शारदा व दूसरी किडनी जयपुर निवासी पराग गौतम को प्रत्यारोपित की गई।
टीम में ये रहे शामिल
किडनी प्रत्यारोपित करने के लिए यूरोलोजी विभाग की दो टीम ने एक साथ काम किया। उसमें डॉ. शिवम प्रियदर्शी, डॉ. नचिकेत व्यास, डॉ. नीरज अग्रवाल, डॉ. संजीव जयसवाल, डॉ. गोविंद शर्मा, डॉ. सोमेंद्र बंसल, डॉ. रामदयाल साहू, डॉ. धर्मेंद्र जांगिड़ व एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. वर्षा कोठारी, डॉ. अनुपमा गुप्ता, डॉ. सिद्धार्थ शर्मा और नर्सिंगकर्मी योगेंद्र, संतोष, अनीता व पिंकी का सहयोग रहा।