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Rajasthan Election 2023: जैसलमेर एक रंग अनेक, ग्रीन एनर्जी और टूरिज्म हब से लेकर रेडिएशन तक Saturday 06 May 2023 02:09 AM UTC+00 राजेन्द्रसिंह देणोक/जैसलमेर. Rajasthan Assembly Election 2023: मई का महीना हो और जैसलमेर की यात्रा का कार्यक्रम बन जाए तो एकबारगी माथे पर शिकन आना तय है। मई-जून में यहां का तापमान आमतौर पर 40 डिग्री से ज्यादा ही रहता है। लेकिन, जैसा आप समझ रहे हैं वैसा इस बार नहीं है। मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच बारिश ने फिजां बदल दी है। पाली से तीन सौ किलोमीटर की यात्रा कर मैं भरी दोपहरी में खेतोलाई गांव पहुंचा। यह वही गांव है जो 11-13 मई 1998 के परमाणु परीक्षणों का गवाह बना। सड़क से कुछ अंदर की तरफ बसे गांव खेतोलाई की तरफ गाड़ी घुमाई तो खेळी पर बड़ी संख्या में मवेशी नजर आए। मेरी आंखें ग्रामीणों को तलाश रही थी, लेकिन कोई दिखा ही नहीं। ठेठ अंदर गलियों में पहुंचा तो एक दुकान के बाहर सेवानिवृत्त शिक्षक मानाराम विश्ननोई से मुलाकात हुई।
विश्नोई ने चाय-पानी की मनुहार की और फिर सामने दिख रही पानी की टंकी (जीएलआर) की तरफ इशारा करते हुए बोले-यहां पानी का भारी संकट है। कई दिन पानी नहीं आता। गांव में सात से आठ हजार मवेशी है। दुकान पर बैठे अनिल ने कहा, देश ताकतवर हुआ, लेकिन हमें क्या मिला। उन्होंने परमाणु रेडिएशन से होने वाली बीमारियों की नियमित जांच की मांग उठाई। यहां से मैंने फिर जैसलमेर की राह पकड़ी। जैसलमेर की मुख्य सड़कें कई किलोमीटर तक सीधी सपाट हैं। पेट का पानी भी नहीं हिलता। रंग-रोगन और स्वच्छता के नारे देखकर बासनपीर ग्राम पंचायत भवन के आगे रुका तो यहां कृषि पर्यवेक्षक मनीषकुमार से मिलना हुआ। उन्होंने कहा, यहां एक भी किसान नहीं है, क्योंकि किसी भी ग्रामीण के पास जमीन नहीं है। पंचायत भवन के बाहर बने एक शौचालय पर ताला लगा हुआ था। थईयात गांव का हकीमाराम ड्राइविंग करता है। गांव में प्रवेश करते ही पहली मुलाकात उसी से हुई। बात छेड़ी तो हकीमाराम ने थईयात में पानी की समस्या पर सरकार को जमकर कोसा। सामुदायिक भवन में बैठे बुजुर्ग सांगाराम बाहर आ गए। बोले-जैसलमेर से गांव की दूरी ज्यादा नहीं है, लेकिन पानी, बिजली और सड़कों के हालत देखकर ऐसा लगता नहीं। सीमांत क्षेत्र जैसलमेर पर्यटन और ग्रीन एनर्जी का हब जरूर बना है, लेकिन यहां के बाशिदों को अभी भी पानी-बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
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