>>: गेहूं को संपूर्ण आहार बनाने की दिशा में कृषि वैज्ञानिक प्रयासरत: कर्नाटक

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उदयपुर. महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकीविश्वविद्यालय उदयपुर के कुलपति डा. अजीत कर्नाटक ने कहा कि खाद्यान्न् क्षेत्र में अनवरत शोध और अनुसंधान का ही सुपरिणाम है कि आज हमारा देश आत्मनिर्भर है। वरना एक समय था जब देशवासी बाहर से आयातित लाल गेहूं का बेसब्री इंतजार करते थे। कर्नाटक रविवार को अनुसंधान निदेशालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में ये जानकारी दे रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों ने दिन-रात मेहनत की और इस वर्ष भारत में गेहूं का रिकोर्ड 112 मिलीयन टन उत्पादन हुआ है। उन्होंने कहा कि अब चुनौती इस बात की है कि बदलते मौसम चक्र में गेहूं के उत्पादन को बरकरार रखना, क्योंकि गेहूं में दाना बनते समय अचानक तापमान वृदि्ध से न केवल दाना सिकुड़ जाता है बल्कि उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही देश-दुनिया के वैज्ञानिक अब इस दिशा में जुटे हैं कि अब कम अवधि मेें पकने वाली गेहूं और जौ की किस्में तैयार हो। गेहूं में मौजूद ग्लूटेन के साथ-साथ आयरन व जिंक जैसे प्रोटीन की उपलब्धता भरपूर हो। साथ ही गेहूं एक संपूर्ण आहार के रूप में प्रचलित हो सके। बदलते मौसम चक्र में गेहूं की किस्में डी. बी. डबल्यू. 327, 303 व 187 काफी कारगर है। साथ ही राजस्थान के लिए राज- 4037, राज- 4079 और राज- 4238 किस्में काफी उपयुक्त है। इसके अलावा जौ उत्पादन में भी कृषि वैज्ञानिकों ने सार्थक परिणाम दिए हैं। क्योंकि एल्कोहाल इण्डस्ट्री में इसकी काफी मांग रहती है और किसानोंको अच्छा मुनाफा भी मिल जाता है।

कार्यशाला के आयोजन सचिव डाॅ. रतनतिवारी गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल (हरियाणा) ने बताया कि कार्यशाला में आगामी तीन दिन तक मुख्यतः नई किस्मों के अनुमोदन, प्रचलित किस्मों के उत्पादन बढ़ाने, बीज प्रजनन एवं आने वाली चुनौतियों के समाधान पर चर्चा एवं रणनीति तैयार की जाएगी। डाॅ. एसके शर्मा सहायक महानिदेशक आईसीएआर ने बताया कि यह परियोजना देश के कृषि क्षेत्र में सबसे बड़ी परियोजना है। आज वैज्ञानिकों को बाॅयोफोर्टीफाइड गेहूं उत्पादन, ग्लोबल वार्मिंग की दिशा में कम पानी और अधिक तापमान सहन करने योग्य किस्मों के विकास की जरूरत है। एमपीयूएटीके अनुसंधान निदेशक डाॅ. अरविन्द वर्मा ने कार्यशाला के दौरान विभिन्न सत्रो मेें होने वाली गतिविधियों की जानकारी दी।

राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन 28 से

महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल (हरियाणा) के संयुक्त तत्वावधान में 62 वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यशाला 28 से 30 अगस्त को विश्वविद्यालय के संघटक राजस्थान कृषि महाविद्यालय उदयपुर में होगी। उद्घाटन प्रातः 9 बजे आरसीए सभागार में होगा। मुख्य अतिथि डाॅ. हिमांशु पाठक महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् व सचिव कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग नई दिल्ली होंगे। अध्यक्षता डाॅ. अजीत कुमार कर्नाटक कुलपति महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर करेंगे। विशिष्ट अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली में उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डाॅ. टीआर शर्मा, सहायक महानिदेशक (खाद्य व चारा फसलें) डाॅ. एसके प्रधान मौजूद रहेंगे। कार्यशाला में इस परियोजना से जुडे़ राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर के 400 से अधिक कृषि वैज्ञानिक भाग लेंगे व अनुसंधान क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करेंगे।

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