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जिला परिषद : सब गोलमाल है Wednesday 30 August 2023 05:58 AM UTC+00
- परिषद ने आरजीएसए प्रशिक्षण के लिए पहले सात लाख का टेंडर लगाया, फिर लागत आठ दिन में ही आठ लाख कर दी गई अलवर. राष्ट्रीय ग्राम स्वरोजगार अभियान (आरजीएसए) के तहत होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम में आवास, भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराने के लिए जिला परिषद की ओर से किए गए 8 लाख के टेंडर में खेल हो गया। जिला परिषद की ओर से जिस फर्म को यह 8 लाख का ठेका दिया गया दरअसल वह फर्म ठेके की शर्तों के अनुसार ठेका लेने की पात्रता ही नहीं रखती थी। इतना ही नहीं ऑनलाइन पोर्टल पर दर्शाई गई सूचना के अनुसार यह टेंडर 11 अगस्त 2023 को जिला परिषद की ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ के लेखाधिकारी (एओ) हंसराम मीणा की आईडी से किया गया है जबकि हंसराम मीणा 31 जुलाई को ही सेवानिवृत हो चुके हैं। ये मामला सार्वजनिक हुआ तो चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह टेंडर पहले 3 अगस्त को जिला परिषद की ओर से जारी किया गया था। उस समय इस टेंडर की लागत 7 लाख रुपए थी। इसके 8 दिन बाद यही टेंडर दोबारा जारी किया गया और इसकी लागत को बढ़ाकर 8 लाख कर दिया गया। टेंडर में यह शर्त डाली गई थी की बोलीदाता फर्म को बोली फॉर्म के साथ 2 फीसदी प्रतिभूति राशि जमा करनी होगी। यानी 16000 रुपए की राशि जमा करने की बाध्यता जिला परिषद की ओर से रखी गई थी। इंद्रप्रस्थ होटल की ओर से बोली फॉर्म के साथ केवल 4000 रुपए ही जमा कराए गए। इस प्रकार तकनीकी बोली में ही ये फर्म अपात्र पाई गई थी और लोक उपापन नियमों के अनुसार फर्म की वित्तीय बोली को खोलने का कोई प्रावधान नहीं था लेकिन जिला परिषद ने तकनीकी और वित्तीय दोनों बोली खोलते हुए इस फर्म को 8 लाख का भोजन, आवास और नाश्ते का टेंडर जारी कर दिया। इतना ही नहीं फर्म को जारी किए गए आदेश में लिखा कि बाकी 36000 रुपए की राशि अब जमा करा दी जाए। यानी जिला परिषद को यह पता था कि जो राशि टेंडर फॉर्म के साथ फर्म से नहीं ली गई है, उसका इंद्राज वर्क आर्डर में जिला परिषद ने कर दिया। 3 अगस्त को जो टेंडर पोर्टल पर अपलोड किया गया वह टेंडर लेखाधिकारी मनमोहन गुप्ता की आईडी से अपलोड किया गया है। इसके आठ दिन बाद 11 अगस्त को जो टेंडर पोर्टल पर अपलोड किया गया वह लेखाधिकारी हंसराम मीणा की आईडी से अपलोड किया गया है। हंसराम मीणा टेंडर अपलोड करने की तिथि से 11 दिन पहले 31 जुलाई को ही रिटायर हो चुके थे। इस प्रकरण में जिला परिषद के एक सहायक लेखाधिकारी समेत कई लोगों की मिलीभगत सामने आ रही है।
जिला परिषद की ओर से करीब 3 महीने पहले प्रशिक्षु ग्राम विकास अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए करीब 30 लाख रुपए का टेंडर जारी किया गया था। यह टेंडर एक निजी कॉलेज को सौंपा गया था। शिकायतकर्ताओं ने उस समय भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत देकर यह बताया था कि उस टेंडर में कंप्यूटर लैब, परिवहन के लिए बस, आवास तथा भोजन के लिए अलग-अलग टेंडर करना था लेकिन ऐसा नहीं कर जिला परिषद ने एक निजी कॉलेज को एक ही टेंडर में यह सभी चीज उपलब्ध कराने के आदेश जारी कर दिए थे जो कि लोक उपापन नियमों के विरुद्ध था।
- मनमोहन गुप्ता, लेखाधिकारी, जिला परिषद |
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