>>: जिले की मिट़टी हो रही है बीमार, नाइट्रोजन से लेकर जिंक तक की कमी

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अलवर. शरीर या फिर मिट्टी। दोनों के लिए मुख्य पोषक तत्वों का होना अतिआवश्यक है। मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए किसान अंधाधुंध रासायनिक खाद का प्रयोग कर रहे हैं। जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति क्षीण होती जा रही है। इसका असर पैदावार पर पड़ रहा है। विभिन्न ब्लॉक से आए मिट्टी के जांच नमूनों से पता चल रहा है कि कहीं पर नाइट्रोजन की कमी है तो कहीं पर जिंक, सल्फेट आदि तत्वों की। इनकी पूर्ति के लिए किसान वैज्ञानिकों से मिलें। कृषि अनुसंधान अधिकारी सुरेन्द्र पाल यादव ने बताया कि किसानों की ओर से अपने खेतों की मिट्टी जांच किए बिना ही बीज की बुवाई की जा रही है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। साथ ही जिले का बंटवारा होने के कारण \Bब्लॉक भी बट गए हैं। इससे अलग-अलग जिलों में मिट्टी जांच हो रही है

मिट्टी जांच की पर्याप्त प्रयोगशाला नहीं, हर ब्लॉक में हो तो मिलेगा लाभ

जिले में वर्तमान में अलवर, खैरथल, बहरोड़, राजगढ़, बड़ौदामेव में मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं, लेकिन इसमें से चार प्रयोगशालाएं ही संचालित हैं। बड़ौदामेव वाली प्रयोगशाला वर्तमान में बंद है। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं इतने बड़े जिले में ये \Bमिट्टी जांच प्रयोगशालाएं पर्याप्त नहीं हैं। जिला मुख्यालय पर \Bमिट्टी और पानी की जांच कराने आए अंकित पोसवाल ने बताया कि हर ब्लॉक पर मिट्टी जांच प्रयोगशाला होंगी तो किसान सरलता से \Bमिट्टी की जांच करवा सकते हैं। जिससे बुवाई के समय मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खेतों में बीज की बुवाई करें।

इस प्रकार से रहा मिट्टी के नमूने

जिले में कृषि विभाग की ओर से इस साल एक अप्रेल से 3 अक्टूबर तक 6966 नमूनों की जांच हुई है तथा पिछले साल 16 हजार 611 जांचें की गईं। विभाग की ओर से किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी वितरित कर दिए हैं, लेकिन मिट्टी जांच के लिए वो ही किसान पहुंच रहे हैं जो कृषि विभाग की ओर से चल रही योजनाओं का फायदा लेने के लिए कार्ड की आवश्यकता है। अन्य किसान बहुत कम हैं।

भूमि होती जा रही है बंजर

किसानों की ओर से अधिक रासायनिक खादों के उपयोग से मिट्टी में मौजूद उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाले जीवाणु नष्ट होते जा रहे हैं। इससे जिले की \Bभूमि धीरे-धीरे बंजर\B हो रही है। जिले की \Bमिट्टी में नाइट्रोजन, जिंक, आयरन और ऑर्गेनिक कार्बन तत्वों की कमी है। यह कमी 35 से 50 फीसदी तक है। इससे जिले की \Bमिट्टी में लवणता और क्षारता बढ़ रही है। ऐसे में किसानों के लिए जरूरी है कि वह समय-समय पर \Bमिट्टी की जांच करवाएं। कृषि अधिकारियों का कहना है कि किसान कम रासायनिक खादों का कम प्रयोग करें। अधिक से अधिक जैविक खाद का उपयोग करें।

ये पाए जाते हैं मिट्टी में तत्व

कृषि अनुसंधान केंद्र के अधिकारियों ने बताया कि \Bमिट्टी में कुल 16 पोषक तत्व होते हैं। इसमें नाइट्रोजन , फस्फोरस एवं पोटेशियम प्रमुख तत्व हैं। इनकी पौधों को काफी मात्रा में जरूरत रहती है। इन्हें प्रमुख पोषक तत्व कहते हैं। वहीं लोहा, जस्ता, मैगनीज, तांबा, बोरोन, मोलिब्डेनम और क्लोरीन तत्वों को सूक्ष्म पोषक तत्व कहते हैं, जो कम मात्रा में हैं। इनकी मौजूदगी रहेगी तो \Bमिट्टी बीमार होने से बच सकती है।

इस तरह से रहीं जांचें

ब्लॉक संख्या

रामगढ़ 1631

गोविन्दगढ़ 1143

लक्ष्मणगढ़ 1382

कठूमर 2700

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