>>: विश्व मधुमेह दिवस पर विशेष : अनियंत्रित शुगर लेवल लील रहा जिंदगी

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भागदौड़ भरी जिदंगी में अनियंत्रित शुगर लेवल असमय मौत का कारण बन रहा है। मधुमेह (डायबिटीज) को लेकर अनदेखी के कारण किड़नी और लीवर पर दवाब पड़ रहा है जिसका नतीजा किड़नी और लीवर फैल्योर के रूप में सामने आ रहा है। चिंताजनक बात है कि यह रोग नौनिहालों के साथ हर आयु वर्ग में तेजी से बढ़ रहा है। हाल में हुई स्क्रीनिंग के अनुसार ओपीडी में 30 साल से कम उम्र के करीब 8 प्रतिशत, 40 से 55 साल तक की आयु वाले 54 प्रतिशत और 55 से ज्यादा आयु वाले 78 प्रतिशत में डायबिटीज के लक्षण मिल रहे हैं। मेडिसिन विभाग के आंकड़ों के अनुसार दो दशक में डायलिसिस करवाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ने का कारण डायबिटीज से होने वाली किड़नी संबंधी बीमारियां है।

ये बरतें सावधानी

डायटिशियन के अनुसार मिलेट्स (मोटे अनाज) में सामान्य अनाजों की तुलना में अधिक फाइबर होता है, जिससे पाचन, हृदय स्वास्थ्य, और रक्त शुगर नियंत्रण में मदद मिलती है। गेहूं की तुलना में मोटे अनाज में कम ग्लूटेन और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने के कारण सिलिएक रोग और मधुमेह वाले लोगों के लिए फायदेमंद हैं। मिलेट्स में फाइटोस्टेरोल, पॉलीफेनॉल, और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे प्राकृतिक तत्त्व होते हैं जो प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ावा देते हैं जिससे आयु बढ़ने पर हृदय समस्याएं, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों का कम ख़तरा होता है।

आयुर्वेद भी सहारा

आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. प्रदीप पांडे के अनुसार डायबिटीज के रोगी को आयुर्वेदिक और कॉलस्ट्रोल कम करने के लिए दारुहरिद्रा, गिलोय, विजयसार, गुड़मार, मेथी व मजिष्ठा जैसे तत्व दवा के रूप में देकर ब्लड शूगर का स्तर कम किया जा सकता है। चिकित्सकों के अनुसार संतुलित आहार व सुबह-शाम सैर के जरिए आजीवन भर रहने वाले मधुमेह पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इस वर्ष डायबिटीज दिवस एक्सेस टू डायबिटीज केयर की थीम पर मनाया जा रहा है।

लीवर के लिए खतरनाक

डायबिटीज किडनी, आंख और हड्डियों के साथ ही लीवर के लिए भी खतरनाक है। डायबिटीज के कारण लीवर में भी रजिस्टेंस होने लगता है। मोटापा बढ़ने के कारण लीवर में फैट जमा होने लगता है। किडनी और आंखों के साथ अपने लिवर का भी ख्याल रखें क्योंकि अनदेखी से लीवर फेल हो सकता है।

यह है डायबिटीज

चिकित्सकों के अनुसार डायबिटीज मुख्यत टाइप वन और टाइप टू तरह की होती है। टाइप वन में बचपन से इंसुलिन पैदा करने की कमी होती है, ऐसे मरीजों को रोजाना इंसुलिन लेनी होती है। टाइप 2 डायबिटीज के रोगी के शरीर में शुगर या कहें ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने की क्षमता बेहद कमजोर हो जाती है। जिससे रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। जिससे किड़नी व लीवर पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा जीवनशैली के बदलाव के कारण जिन मरीजों में डायबिटीज के लक्षण है या जिनका एचबीएवनसी जांच का लेवल बार्डर लाइन के पास है उन्हें में डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

इन्हें ज्यादा खतरा

डब्ल्यूएचओ के अनुसार बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 से अधिक होने पर डायबिटीज की आशंका बढ़ती है। बहुत ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, नजर में धुंधलापन होना, थकान महसूस होना, अकारण वजन कम होना जैसे लक्षणों की अनदेखी करने से मरीज को उपचार शुरू करने में ज्यादा समय लग जाता है। जरूरत है कि समय पर जांच करवाएं और तय मात्रा में दवाएं लें। नियमित व्यायाम व संतुलित भोजन को जीवन का अहम हिस्सा बनाएं।

अंदरूनी अंगों को नुकसान

चिकित्सकों के अनुसार टाइप टू डायबिटीज की जांच जितना जल्द होगी, रोग का शरीर पर दुष्प्रभाव उतनी ही जल्दी कम किया जा सकेगा। खून में शुगर बढ़ने से हमारे अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचता है। हृदय की धमनियां क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। आंखों व किडनी को भी नुकसान। जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेल होने और आंखों को गंवाने का ज्यादा जोखिम होता है।

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