>>: जानें... राणकपुर-कुंभलगढ़ मेें क्यों दहाड़ेंगे बाघ

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-राजेन्द्रसिंह देणोक/मुकेश जैसानी
मारवाड़-मेवाड़ की सरहद में अब बाघों की दहाड़ सुनाई देनी चाहिए। केन्द्र व राज्य में एक ही पार्टी की सरकार बनने से कुंभलगढ़ बाघ पुनर्वास (टाइगर रिजर्व) की उम्मीदें बलवती हो गई है। इसके लिए एनटीसीए चार माह पहले ही अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे चुकी है। यहां बाघों का पुनर्वास किया गया तो कुंभलगढ़, राणकपुर और जवाई पर्यटन का बड़ा हब होगा। खासतौर से इस परियोजना के लिए एनटीसीए सदस्य दियाकुमारी ने काफी रुचि दिखाई थी। अब उनके उपमुख्यमंत्री बनने से परियोजना के जल्द सिरे चढ़ने की उम्मीदें जगी है।

चार जिलों में होगा दायरा
एनटीसीए के तीन अलग-अलग दलों ने सर्वे किया था। इसकी रिपोर्ट के बाद सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। यह 4 जिलों उदयपुर, पाली, राजसमंद, सिरोही में फैला होगा। वन विभाग के अनुसार 2766 स्क्वायर किमी में बाघ पुनर्वास क्षेत्र बनेगा। इसमें 800 स्क्वायर किमी का एरिया कोर होगा, जिसमें कुंभलगढ़, अरावली, टाडगढ़ क्षेत्र का जंगल शामिल होगा। कुंभलगढ़ अभयारण्य में पाली जिले की सादडी रेंज में मोडिया वनखण्ड की 212 हैक्टेयर वनक्षेत्र में बाघ पुनर्वास एनक्लोजर का निर्माण किया गया है। कुछ प्रीबेस तैयारियां भी की गई हैं। शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या भी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

कुंभलगढ़-राणकपुर-जवाई बनेगा पर्यटन सर्किट
कुंभलगढ़, राणकपुर और जवाई पैंथर अभयारण्य क्षेत्र पर्यटकों की पसंद बना हुआ है। यहां सालाना लाखों देशी-विदेशी सैलानी सैर करने पहुंच रहे हैं। बाघ पुनर्वास परियोजना के मूर्त रूप लेने से कुंभलगढ़, राणकपुर और जवाई क्षेत्र पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित होगा। इससे यहां सैलानी तो खिंचे आएंगे, रोजगार और निवेश बढ़ना भी तय है। देशी विदेशी सैलानियों के ठहराव से पर्यटन व्यवसाय और ग्रामीणों के लिए आय के स्रोत बढ़ जाएंगे। वन्य जीव प्रेमियों को भी बाघ पुनर्वास योजना के मूर्तरूप लेने का इंतजार है।

प्रदेश में ये टाइगर रिजर्व
-रणथंभोर टाइगर रिजर्व, सवाईमाधोपुर
-सरिस्का टाइगर रिजर्व, अलवर
-मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व, कोटा
-रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व, कोटा

एक्सपर्ट व्यू:
राणकपुर क्षेत्र में 70 के दशक तक बाघ थे। बाघ एक निश्चित दायरे में रहता है। इस कारण यह क्षेत्र बाघों के अनुकूल है। जंगल भी बड़ा है। यहां बाघों का पुनर्वास किया जाता है तो बाघों का संरक्षण भी होगा और सैलानी बड़ी तादाद में आएंगे। इससे पर्यटन विकसित होगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी यह अत्यंत सुखद होगा।
-दिलीप अरोड़ा, वन्यजी प्रेमी

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