>>: विनाश की ओर ले जाएगा सोशल मीडिया कंटेंट: बल्देव भाई

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लेखक, वरिष्ठ पत्रकार व कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रो. बल्देव भाई शर्मा ने सोशल मीडिया के बढ़ते खतरों से आगाह किया है और शिक्षा के इंसानियत से परे हटकर टेक्निकल होने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जिस तरह की भाषा और विचार होते हैं, उससे लोग प्रताड़ित होते हैं और यह विनाश की ओर ले जाने का माध्यम बन सकता है। तकनीक का हम पर हावी होना भी विनाश का रास्ता बन सकता है। प्रो. शर्मा ने गुरुवार को यहां राजस्थान पत्रिका समूह के वार्षिक सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार समारोह एवं 33वें पं. झाबरमल्ल शर्मा स्मृति व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता यह विचार रखे। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साथ पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी और पं. झाबरमल्ल शर्मा के परिजन भी मौजूद रहे।

समारोह में कविता व कहानी के विजेता साहित्यकारों का सम्मान किया गया। उन्होंने पत्रकारिता को लेकर कहा कि पत्रकार की पॉलिटिकल लाइन बुराई नहीं है, लेकिन पत्रकार की पार्टी लाइन नहीं हो। जब हम इसे भूल जाते हैं तो पत्रकार विश्वास खो देते हैं। पत्रिका समूह सृजनात्मक साहित्य एवं पत्रकारिता पुरस्कार समारोह में कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रो. बल्देव भाई शर्मा ने कहानी वर्ग में मकान कहानी के लिए चेतन स्वामी को प्रथम पुरस्कार और पापा की टोपी कहानी के लिए जोधपुर की व्याख्याता और कॅरियर काउंसलर अर्चना त्यागी को द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया, वहीं कविता वर्ग में 'एक आंसू' कविता के लिए स्कूल में उपप्रधानाचार्य सोमनाथ शर्मा को प्रथम पुरस्कार और 'मन्दिर तुम्हारे भीतर भी' कविता के लिए कॉलेज में सहायक प्रोफेसर नेहा सिन्हा द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

ऋग्वेद में बताई राष्ट्र की संकल्पना : प्रो. शर्मा ने अफसोस जताया कि आज भी लोग भारत को एक देश के रूप में रहने के लिए अंग्रेजों को श्रेय देते हैं जबकि वास्तविकता यह है कि हमारे ऋग्वेद में ही राष्ट्र की संकल्पना बता दी थी। उस समय तो अंग्रेज पैदा भी नहीं हुए थे।

साहित्यकारों का सम्मान बड़ी बात : शर्मा ने कहा कि सात्विकता बिना पत्रकारिता निष्प्राण है। समाचार पत्रों में साहित्य लुप्त हो गया है, ऐसे में पत्रिका समूह द्वारा साहित्यकारों का सम्मान बड़ी बात है। उन्होंने पत्रकारों को सलाह दी कि उन्हें लिखते-पढ़ते रहना चाहिए, जब भी समय मिले सीरियल और टीवी पर आने वाले विज्ञापन भी देखने चाहिए। इनसे भी सीखने को मिलता है।

अब पढ़ाई टेक्निकल हो गई: शर्मा ने कहा कि पहले पढ़ाई सार्थक थी, अब टेक्निकल होने के साथ ही इंसानियत से दूर हो गई। तकनीक हम पर हावी हो गई तो वह विनाश का रास्ता है। मीडिया को इस तरह की चीजों से बचाए रखने की जरूरत है। आज सैकेंड्स में सब कुछ बदल रहा है। वस्तुओं पर प्राइस टैग बदल जाते हैं, पर इंसान के जीवन मूल्य नहीं बदलते। इन बदलाव के बीच जरूरी है कि पत्रकारिता के मूल्य नहीं बदलें।

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पत्रिका करता है जनसरोकार के काम: समारोह में राजस्थान पत्रिका समूह के डिप्टी एडिटर भुवनैश जैन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पत्रकारिता में आज व्यावसायिकता का दौर है, लेकिन राजस्थान पत्रिका ने हमेशा ही जन सरोकार के लिए कार्य किया। उन्होंने सोशल मीडिया की चुनौतियों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि सोशल मीडिया से संवाद को बढ़ावा मिला है, लेकिन इससे फेक न्यूज को बढ़ावा भी मिला है। उन्होंने पत्रिका की ओर से देशभर में किए जा रहे जन सरोकार के कार्यों की जानकारी भी दी। कार्यक्रम का संचालन डिप्टी एडिटर हरीश पाराशर ने किया।

दुनिया को भारत ही बचा सकता है

जो आंख का आंसू पोंछ सके, वही पत्रकार

प्रो. शर्मा पत्रकारिता को नैतिक उद्यम बताते हुए कहा कि खबर पहुंचाना तो पत्रकारिता का हिस्सा मात्र है। सही पत्रकार वही है, जो रोती हुई आंख का आंसू पोंछ सके। पत्रकारिता को लोक कल्याण व लोक जागरूकता का माध्यम बताते हुए कहा कि इनके बिना पत्रकारिता कुछ भी नहीं है। इनके बिना तो पत्रकारिता बुद्धि का खेल है, जो 90 के दशक में 10वीं पास हर्षद मेहता ने किया था।

प्रो. शर्मा ने कहा कि भारत गुलामी नहीं झेल सकता, यहां सतत संघर्ष का दौर रहा। उन्होंने पत्रकारिता को सत्य के उदघोष का माध्यम बताया, वहीं सवाल किया कि कौन सा सत्य। हर किसी के लिए सत्य अलग-अलग है। सत्य वही उचित है जो सर्वाधिक लोकहित में है। उन्होंने पत्रकारिता की निष्पक्षता को लेकर कहा कि पत्रकारिता कभी निष्पक्ष नहीं होती, उसका पक्ष भारत का निर्माण करना और उसे दुनिया में प्रतिष्ठित करना होना चाहिए। उन्होंने अनॉल्ड टॉयनबी को उद्धरित करत हुए कहा कि परमाणु युग में कोई दुनिया को बचा सकता है तो वह भारत है। ऐसे में भारतीय मीडिया की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

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