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Table of Contents

- जिला परिषद ने पिछले वर्षों फर्जी शिक्षक, लिपिक आदि पकड़े गए, जयपुर एसओजी की जांच के बाद कराई गई थी चार लोगों पर रिपोर्ट
- इस फर्जी नियुक्ति में जिला परिषद के पूर्व अफसरों व लिपिकों का हाथ बताया जा रहा, जांच ठीक हुई तो कई जा सकते हैं जेल

प्रदेश में निजात बदलते ही सरकारी मशीनरी की कार्यशैली भी बदल गई। अब 5 माह बाद फर्जी नियुक्तियों को लेकर पुलिस अफसर जागे हैं। उन्होंने जिला परिषद से रेकॉर्ड तलब किया है। इसके बाद परिषद में हड़कंप मच गया। बताते हैं कि कुछ पूर्व अफसर व कई लिपिक इसकी चपेट में आ सकते हैं। भर्ती शाखा पूरी तरह कटघरे में है। वह अपने बचाव के रास्ते ढूंढ रहे हैं।

सरकार एक्शन में, पर पुलिस जांच को आगे नहीं बढ़ा रही

जिला परिषद की ओर से पिछले वर्षों में शिक्षकों व लिपिकों की भर्ती की गई थी। इन्हीं भर्तियों में खेल हुआ। इस मामले की शिकायत एसओजी जयपुर से हुई। इस प्रकरण को राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो एसओजी जयपुर की जिला परिषद में एंट्री हुई और जांच रिपोर्ट के आधार पर चार लोगों पर अलवर में पुलिस ने अगस्त 2023 में रिपोर्ट दर्ज की। अरावली विहार थाने में शिक्षक रुकमणी नंदन शर्मा, लिपिक कमल सिंह व दो अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। उम्मीद थी कि पुलिस इस केस में तत्परता दिखाएगी लेकिन 5 माह बाद पुलिस जागी है। प्रदेश सरकार वर्ष 2013 में पेपर लीक करने वाले व फर्जी भर्तियों को अंजाम देने वालों को गिरफ्तार कर रही है लेकिन यहां पुलिस की जांच में तेजी नहीं दिख रही। यहां परिषद के ही कुछ लोगों को पुलिस बचाने क तैयारी में है।


ये थी एसओजी की जांच रिपोर्ट
एसओजी जयपुर के जांच निरीक्षक सुरेश कुमार का कहना था कि जिला परिषद की इन नियुक्तियों में पूरा जांच दल कटघरे में है। इसमें शाखा लिपिक, नियुक्ति देने वाले अफसर, दस्तावेज सत्यापन दल, विधि से जुड़े लोगों की जांच विस्तृत होनी चाहिए। स्थानीय पुलिस विस्तृत रूप से इसकी जांच करेगी।

अधिकारी बदलें तो दौड़ सकती है जांच

इस प्रकरण की जांच खुद थाना प्रभारी अरावली विहार कर रहे हैं। कुछ लोगों का तर्क है कि थाना प्रभारी के पास कई काम होते हैं। ऐसे में जांच आदि समय पर नहीं हो पाती। समय का अभाव होता है। ऐसे में इस जांच को किसी अन्य अधिकारी से कराया जाए तो जल्द हो सकती है। क्योंकि जिस तरह सरकार फर्जी मामलों में गिरफ्तारियां करवा रही है। उसी तरह इस मामले में भी जांच अधिकारी बदलने से तेजी आ सकती है।


ये थे मामले
- शिक्षक भर्ती की पात्र अभ्यर्थी योगेंद्री यादव को नौकरी नहीं देकर अपात्र व्यक्ति और कम नंबर वाले अभ्यर्थी को नौकरी दिया जाना।

- कनिष्ठ लिपिक भर्ती में अपात्र अभ्यर्थी रुकमणी नंदन शर्मा की ओर से खुद की उम्र की सही सूचना दिए जाने के बाद ओवरऐज होने पर भी एलडीसी पद पर नियुक्ति दिया जाना।
- अपात्र अभ्यर्थी प्रमिला देवी को हाईकोर्ट में जिला परिषद की ओर से अपात्र होने की सूचना देने के बाद एलडीसी पद पर नौकरी दिया जाना।

- अपात्र शिक्षक अभ्यर्थी कमल सिंह को आवेदन के एक साल बाद की डिग्री लगाए जाने पर भी शिक्षक पद पर नौकरी दिया जाना।

एसओजी की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित लोगों पर केस दर्ज कर लिया गया था। अब जिला परिषद से रेकॉर्ड मांगा गया है। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे। तेजी से जांच होगी।
- पवन चौबे, थाना प्रभारी, अरावली विहार

भारत सरकार द्वारा संचालित 'विकसित भारत संकल्प यात्रा अभियान' के तहत आज और कल जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न स्थानों पर कैम्पों का आयोजन होगा। जिला कलेक्टर आशीष गुप्ता ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 11 जनवरी को पंचायत समिति कठूमर की ग्राम पंचायत समूंची व कुट्टीनसाहबदास एवं 12 जनवरी को ग्राम पंचायत डोरोली व बहरामपुर में कैम्प आयोजित होंगे।

इसी प्रकार 11 जनवरी को पंचायत समिति गोविन्दगढ की ग्राम पंचायत रामबास व तालडा एवं 12 जनवरी को ग्राम पंचायत भैसडावत व सैमला खुर्द में, 11 जनवरी को पंचायत समिति रामगढ की ग्राम पंचायत बगडमेव व बगडराजपूत एवं 12 जनवरी को ग्राम पंचायत जातपुर व बाम्बोली में, 11 जनवरी को पंचायत समिति उमरैण की ग्राम पंचायत सावडी व उमरैण एवं 12 जनवरी को ग्राम पंचायत माचडी व पलखडी तथा

ग्राम पंचायत जटियाना व ठेकडा में, 11 जनवरी को पंचायत समिति राजगढ की ग्राम पंचायत तिलवाड व खोहदरीबा एवं 11 जनवरी को ही ग्राम पंचायत बीघोता व नाथलवाडा तथा 12 जनवरी को ग्राम पंचायत टोडाजयसिंहपुर व बलदेवगढ तथा 12 जनवरी को ही ग्राम पंचायत सकट व कुण्डला में कैम्प आयोजित होंगे।

उन्होंने बताया कि एक दिन में दो कैम्प आयोजित होंगे तथा वैन मध्यान्ह पूर्व के कैम्प में पहुंचकर योजनाओं का प्रचार प्रसार करेगी। इसके पश्चात वैन मध्यान्ह पश्चात में आयोजित कैम्प में जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी कैम्प प्रातः 9 बजे से सांय 6 बजे तक आयोजित होंगे।

मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत विभिन्न स्थानों पर आयोजित होंगे कलस्टर कैंप। निर्वाचन राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत 6 से 22 जनवरी के दौरान दावे एवं आपत्तियां प्राप्त करने के साथ-साथ विभिन्न स्थानों पर कलस्टर कैम्प आयोजित किए जाएंगे।

रजिस्ट्रीकरण पदाधिकारी एवं एसीईएम अलवर शहर नवज्योति कंवरिया ने बताया कि 12 जनवरी को ट्रांसजेंडर कलस्टर कैंप अखैपुरा मोहल्ला व जसवंत नगर में तथा 12 जनवरी को ही पीवीटीजी कैम्प फतेहगंज गुम्बद एवं अग्रसेन सर्किल के पास, दशहरा मैदान एवं टेल्को चौराहे के पास एवं मिनी सचिवालय के सामने भूगोर पर लगाए जाएंगे।

इसी प्रकार ईएलसी कलस्टर कैम्प विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर 16 जनवरी एवं 18 जनवरी को विधानसभा क्षेत्र अलवर शहर के क्षेत्राधिकार में स्थित समस्त माध्यमिक, उच्च माध्यमिक एवं महाविद्यालय में लगाए जाएंगे। 19 जनवरी को पीडब्ल्यूडी कलस्टर कैम्प माध्यमिक, उच्च माध्यमिक एवं महाविद्यालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग अलवर एवं पीडब्ल्यूडी से संबंधित एनजीओ पर लगाए जाएंगे।

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सरिस्का टाइगर रिजर्व बाघों को लंबे समय तक जीवित रहने में मदद कर रहा है। जबकि बाघ आमतौर पर औसतन 15-16 साल तक जीवित रहते हैं, सरिस्का में कई बाघ 18-19 साल तक जीवित रहे हैं। सरिस्का में प्राकृतिक मौत वाले बाघों की उम्र करीब 18 साल रही, हालांकि कुछ बाघों की असमय भी मौत हुई, लेकिन उसके पीछे बीमारी या अन्य कारण नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के शिकार की प्रवृति रही।

सबसे लंबा जीवन जीया बाघिन एसटी-2 ने

सरिस्का में सबसे लंबे समय तक बाघिन एसटी-2 जीवित रही। यह बाघिन करीब साढ़े 19 साल जीवित रही। अंतिम समय में इस बाघिन की पूंछ पर घाव हो गया था, जिसका कई बार इलाज कराया गया, हालांकि लंबी आयु के चलते बाघिन एसटी-2 ने मंगलवार को सरिस्का में आखिरी सांस ली। इसके अलावा बाघिन एसटी-3, बाघ एसटी- 6 की करीब 18 साल की उम्र में मौत हुई।

इसलिए मिलता है लंबा जीवन

सरिस्का में बाघों को लंबा जीवन मिल पाने का कारण यहां की भौगोलिक परिस्थिति एवं प्राकृतिक संसाधन हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यहां का जंगल बाघों के अनुकूल है। खास बात यह कि यहां बाघों के लिए भोजन की समस्या नहीं है। यहां पानी की सुविधा भी बेहतर है, साथ ही हरियाली एवं विचरण के लिए खुला जंगल है। इस कारण सरिस्का बाघों को लंबी आयु देने वाला जंगल रहा है।

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7 बाघों की मौत, दो हुए लापता

वर्ष 2005 के बाद सरिस्का में अब तक 7 बाघों की मौत हुई है, वहीं दो अभी लापता हैं। मृत बाघों में बाघ एसटी-1 की जहर देने, बाघिन एसटी-2 व 3 की प्राकृतिक मौत, बाघ एसटी- 4 व 6 की बीमारी में मौत, बाघिन एसटी-5 व बाघ एसटी-13 लापता तथा बाघ एसटी-11 की खेत में लगे फंदे में फसने तथा बाघ एसटी- 16 की हीट स्ट्रोक से मौत हुई। सरिस्का में यदि वनकर्मियों की नफरी पूरी रहती तो बाघ एसटी-1, बाघिन एसटी- 5, बाघ एसटी-11 एवं 13 को बचाया जा सकता था।

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सरिस्का टाइगर रिजर्व बाघों को लंबी आयु दे रहा है। वैसे बाघों की औसत आयु 15- 16 साल मानी जाती है, लेकिन यहां कई बाघों ने 18- 19 साल जीवन जीया। सरिस्का में प्राकृतिक मौत वाले बाघों की उम्र करीब 18 साल रही, हालांकि कुछ बाघों की असमय भी मौत हुई, लेकिन उसके पीछे बीमारी या अन्य कारण नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के शिकार की प्रवृति रही।
वर्ष 2005 में बाघ विहिन होने के बाद सरिस्का टाइगर रिजर्व एक बार फिर बाघों से आबाद हुआ और इनकी संख्या 30 तक पहुंच गई है। इस दौरान सरिस्का में मरे बाघों में करीब आधे की प्राकृतिक मौत हुई, इनमें से ज्यादातर 18 से 19 साल तक जीवित रहे। इस लिहाज से सरिस्का बाघों को लंबा जीवन देने के लिए बेहतर साबित हुआ है।

बाघों को इसलिए मिलता है लंबा जीवन

सरिस्का में बाघों को लंबा जीवन मिल पाने का कारण यहां की भौगोलिक परििस्थति एवं प्राकृतिक संसाधन हैं। वन्यजीव विशेषज्ञाें के अनुसार यहां का जंगल बाघों के अनुकूल है। खास बात यह कि यहां बाघों के लिए भोजन की समस्या नहीं है। यहां पानी की सुविधा भी बेहतर है, साथ ही हरियाली एवं विचरण के लिए खुला जंगल है। इस कारण सरिस्का बाघों को लंबी आयु देने वाला जंगल रहा है।

सबसे लंबा जीवन जीया बाघिन एसटी-2 ने

सरिस्का में सबसे लंबे समय तक बाघिन एसटी-2 जीवित रही। यह बाघिन करीब साढ़े 19 साल जीवित रही। अंतिम समय में इस बाघिन की पूंछ पर घाव हो गया था, जिसका कई बार इलाज कराया गया, हालांकि लंबी आयु के चलते बाघिन एसटी-2 ने मंगलवार को सरिस्का में आखिरी सांस ली। इसके अलावा बाघिन एसटी-3, बाघ एसटी- 6 की करीब 18 साल की उम्र में मौत हुई।

सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो तो बढ़े बाघों का जीवन

सरिस्का का जंगल बाघों के लिए बेहतर है, लेकिन यहां सुरक्षा व्यवस्था के लिए वनकर्मियों एवं अन्य अधिकारियों के रिक्त पदों को भरने की जरूरत है। सरिस्का में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के करीब 289 पद स्वीकृत हैं, इनमें वर्तमान में 174 पदों पर अधिकारी एवं कर्मचारी तैनात है। इनमें सरिस्का के 241 पदों में मात्र 126 पदों पर अधिकारी व कर्मचारी तैनात हैं। केवल वर्कचार्ज स्टाफ के 48 स्वीकृत पदों की एवज में पूरे कर्मचारी है। खास बात यह कि सरिस्का में वन गार्ड के स्वीकृत 133 पदों में मात्र 62 पद ही भरे हैं। वहीं रेंजर के स्वीकृत पदों पर भी आधे ही कर्मचारी नियक्त हैं। वहीं एसीएफ के 10 पदों की तुलना में एक ही पद भरा है। डीएफओ के भी आधे पद खाली चल रहे हैं।

सरिस्का में 7 बाघों की मौत, दो लापता

वर्ष 2005 के बाद सरिस्का में अब तक 7 बाघों की मौत हुई है, वहीं दो अभी लापता हैं। मृत बाघों में बाघ एसटी-1 की जहर देने, बाघिन एसटी-2 व 3 की प्राकृतिक मौत, बाघ एसटी- 4 व 6 की बीमारी में मौत, बाघिन एसटी-5 व बाघ एसटी-13 लापता तथा बाघ एसटी-11 की खेत में लगे फंदे में फसने तथा बाघ एसटी- 16 की हीट स्ट्रोक से मौत हुई। सरिस्का में यदि वनकर्मियों की नफरी पूरी रहती तो बाघ एसटी-1, बाघिन एसटी- 5, बाघ एसटी-11 एवं 13 को बचाया जा सकता था।

कस्बे के राजकीय कन्या महाविद्यालय में खेल सप्ताह के चौथे दिवस बृहस्पतिवार को गोला फेंक एवं जैवलिन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। प्राचार्य डॉ. के. एल. मीना ने बताया कि खेल प्रतियोगिताओं में छात्राओं की उत्साहजनक सहभागिता रही।

जैवलिन थ्रो में प्रथम स्थान पर खुशबू, द्वितीय स्थान पर पायल बैरवा एवं तृतीय स्थान पर कोमल रही। गोला फेंक में प्रथम वर्षा बाई, द्वितीय खुशबू, तृतीय पायल बैरवा रही। प्रतियोगिता में रेफरी एवं स्कोरर की भूमिका प्रो. संदीप कुमार, डॉ. राजेन्द्र कुमार, हरिओम एवं मनोहर लाल ने निभाई। खेल अधिकारी प्रो. संदीप कुमार ने बताया कि शुक्रवार को कबड्डी का आयोजन किया जायेगा।

इससे पूर्व में लंबी कूद प्रतियोगिता रखी गई, जिसमें महाविद्यालय की छात्राओं ने भाग लिया। जिसमें प्रथम स्थान पर खुशबू व द्वितीय स्थान पर पायल बैरवा रही। द्वितीय पारी में खो-खो प्रतियोगिता आयोजित की गयी।

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अलवर. अपराध ने अलवर, भिवाड़ी, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों को चारों तरफ से घेरा हुआ है। दिल्ली, हरियाणा और उत्तरप्रदेश के हार्डकोर बदमाश यहां गोली पे गोली दाग कर दहशत फैला रहे हैं। पुलिस इन बदमाशों से मुकाबले में कमजोर पड़ रही है। इसके पीछे बड़ा कारण पुलिस के पास खुद की फायरिंग रेंज न होना है।

अलवर जिला अपराध दृष्टि से सुपर क्रिटिकल बन चुका है। अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने अगस्त-2019 में भिवाड़ी को पुलिस जिला बना दिया था। वहीं, अगस्त-2023 में राज्य सरकार ने अलवर के टुकड़े कर खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ नए जिले बना दिए। कहने को तो पुराने अलवर जिले में अब चार एसपी बैठा दिए हैं और चारों पुलिस जिलों की कमान अलग-अलग कर दी हैं, लेकिन इनमें से किसी जिले में पुलिस के पास खुद की फायरिंग रेंज नहीं है। जिसके चलते पुलिस फायरिंग का पूरा अभ्यास नहीं कर पा रही। सरकारी खानापूर्ति के लिए इन चारों जिलों की पुलिस इधर-उधर उधारी की व्यवस्था में चांदमारी (फायरिंग) का अभ्यास कर रही है।

अलवर में पहले थी फायरिंग रेंज

कुछ साल पहले तक अलवर जिला पुलिस के पास खुद की फायरिंग रेंज हुआ करती थी, जो कि प्रतापबांध क्षेत्र के जंगल में थी, लेकिन कुछ साल पहले यह इलाका सरिस्का के बफर जोन में शामिल कर दिया गया था। यहां वन्यजीवों का विचरण बढ़ने के कारण पुलिस फायरिंग रेंज को यहां से खत्म कर दिया गया।

अब सभी उधारी की व्यवस्था से चला रहे काम

अलवर, भिवाड़ी, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिलाें में करीब साढ़े तीन हजार की पुलिस नफरी है, लेकिन इन जिलों में पुलिस के पास खुद की फायरिंग रेंज नहीं है। अलवर जिला पुलिस रामगढ़ के बेराबास िस्थत आईटीबीपी ट्रेनिंग सेंटर में फायरिंग अभ्यास के लिए जाती है। वहीं, भिवाड़ी और खैरथल-तिजारा जिला पुलिस ने फायरिंग अभ्यास के लिए तिजारा के शेखपुर थाना इलाके अभनपुरा गांव िस्थत दिल्ली पुलिस की फायरिंग रेंज में जाती है। वहीं, कोटपूतली-बहरोड़ जिला पुलिस ने फायरिंग अभ्यास के लिए बहरोड़ के अनंतपुरा िस्थत सीआईएसएफ ट्रेनिंग सेंटर में व्यवस्था की हुई है।

साल में एक बार फायरिंग अभ्यास जरूरी

राजस्थान पुलिस के नियमानुसार प्रत्येक जिले में साल में एक बार सभी पुलिसकर्मियों को फायरिंग का अभ्यास करना अनिवार्य है। इसके लिए सभी जिलों में पुलिस अपनी-अपनी फायरिंग रेंज में वार्षिक चांदमारी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है, लेकिन अलवर, भिवाड़ी और नए जिले खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ में फायरिंग रेंज के अभाव में सभी पुलिसकर्मी सालाना फायरिंग का प्रशिक्षण नहीं ले पा रहे हैं।

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अब कराएंगे चांदमारी

जिला पुलिस की ओर से चांदमारी अभ्यास रामगढ़ के बेराबास िस्थत आईटीबीपी ट्रेनिंग सेंटर में किया जाता है। अब जनवरी माह में पूरी पुलिस नफरी को चांदमारी कराई जाएगी।
- तेजपाल सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) , अलवर

जमीन अलॉट हुई

फिलहाल अभनपुरा िस्थत दिल्ली पुलिस की फायरिंग रेंज में चांदमारी की जा रही है। भिवाड़ी पुलिस को फायरिंग रेंज के लिए खिदरपुर में जमीन अलॉट हो चुकी है। खुद की फायरिंग रेंज बनने के बाद और बेहतर तरीके से फायरिंग अभ्यास किया जा सकेगा।

- दिलीप सैनी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, भिवाड़ी।


प्रदेश में नई सरकार ने किसानों को दिन में दो ब्लॉक में बिजली सप्लाई के आदेश तो जारी कर दिए, लेकिन विद्युत निगम के पास पूरे जिले में दिन में सप्लाई के लिए पूरी मात्रा में बिजली है और न ही आधारभूत ढांचा इतना मजबूत है कि वह दिन में एक साथ दो ब्लॉक में किसानों को बिजली सप्लाई कर सके। इस आदेश ने विद्युत निगम अधिकारियों की परेशानी को बढ़ा दिया है।

जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ने 14 दिसम्बर 2023 को आदेश जारी कर प्रदेश भर में तीनों डिस्कॉम के अधिकारियों को कृषि उपभोक्ताओं को छह- छह घंटे के दो ब्लॉक में बिजली सप्लाई के निर्देश दिए। इस आदेश के तहत जयपुर डिस्कॉम में पहला ब्लॉक सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक तथा दूसरा ब्लॉक सुबह 11.30 से शाम 5.30 बजे तक निर्धारित किया गया है। यानी कृषि उपभोक्ताओं को दोनों ब्लॉक में दिन में ही बिजली देनी होगी। इसमें भी सुबह 11.30 से दोपहर 3 बजे तक पूरे जिले में कृषि उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई देने की अनिवार्यता रहेगी।

सरकार ने यह तय किए ब्लॉक

प्रथम ब्लॉक
जयपुर डिस्कॉम- सुबह 9 से दोपहर 3 बजे

अजमेर डिस्कॉम- सुबह 9.15 से दोपहर 3.15 बजे
जोधपुर डिस्कॉम- सुबह 9.30 से दोपहर 3.30 बजे

द्वितीय ब्लॉक
जयपुर डिस्कॉम- सुबह 11.30 से शाम 5.30 बजे

अजमेर डिस्कॉम- सुबह 11.45 से शाम 5.45 बजे
जोधपुर डिस्कॉम- दोपहर 12.00 से शाम 6.00 बजे

तीनों जिलों में 1.32 लाख कृषि कनेक्शन

अलवर, खैरथल-तिजारा एवं कोटपूतली- बहरोड़ जिलों में कुल एक लाख 32 हजार कृषि कनेक्शन हैं। यानी इन सभी कृषि उपभोक्ताओं को दिन में दो ब्लॉक में बिजली सप्लाई करनी होगी।

कैसे हो आदेश की पालना

सरकार ने गत 13 दिसम्बर को बिजली सप्लाई प्रबंधन के लिए बैठक कर आदेश जारी किए। विद्युत वितरण निगम अधिकारियों का कहना है कि सरकार के आदेशों ने उलझन पैदा कर दी है। कारण है कि दिन में एक साथ कृषि उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई के लिए न तो पूरी मात्रा में बिजली है और न ही जिले में बिजली तंत्र इसके लिए तैयार है। दिन में छह- छह घंटे दो ब्लॉकों में बिजली सप्लाई के बाद भी एक ब्लॉक में रात के समय बिजली देने की मजबूरी है। हालांकि कृषि उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई रोटेशन से दी जाती है, जिससे कृषि उपभोक्ताओं को कभी दिन व कभी रात में बिजली मिल पाती है।

सरकार ने इसलिए किए आदेश जारी

इन दिनों अलवर एवं प्रदेश के अन्य जिलों में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। वहीं यह समय फसल में सिंचाई का भी है। कृषि उपभोक्ताओं को सर्दी में परेशानी नहीं हो, इसके लिए सरकार ने दिन में दो ब्लॉक में बिजली सप्लाई के आदेश जारी किए।

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