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IIT Research: देश में 1 फीसदी से भी कम मानसिक रोगी खुद चलकर आते हैं अस्पताल Tuesday 30 January 2024 03:45 PM UTC+00 जोधपुर. देश में मानसिक बीमारियों के जूझ रहे कई लोग ऐसे हैं जो अपनी बीमारी के बारे में बताने से कतराते हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान IIT Jodhpur के एक ताज़ा अध्ययन से यह बात सामने आई कि ऐसे मानसिक रोगियों की संख्या एक प्रतिशत से भी कम है जो खुद अपनी परेशानी बताते हैं और अपने इलाज के लिए आगे आते हैं। अध्ययन को करने के लिए नेशनल सैंपल सर्वे 2017-2018 के 75वें राउंड से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया था। ये सर्वे पूरी तरह से लोगों की सेल्फ रिपोर्टिंग पर आधारित था। सर्वे के लिए कुल 5 लाख 55 हजार 115 व्यक्तियों के आंकड़े इकट्ठा किए गए, जिनमें से 3 लाख 25 हजार 232 लोग ग्रामीण क्षेत्र से और 2 लाख 29 हजार 232 लोग शहरी क्षेत्र से थे। सर्वे के लिए प्रतिभागियों का चयन रैंडम तरीके से 8,077 गांवों और 6,181 शहरी क्षेत्रों से किया गया था, जहां मानसिक बीमारियों से जुड़े 283 मरीज़ ओपीडी में थे और 374 मरीज़ अस्पताल में भर्ती थे। यह अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मेंटल हेल्थ सिस्टम्स में प्रकाशित हुआ है। इसे आईआईटी जोधपुर के स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स में सहायक प्रोफेसर डॉ. आलोक रंजन और स्कूल ऑफ हेल्थ एंड रिहैबिलिटेशन साइंसेज, ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी, कोलंबस, संयुक्त राज्य अमेरिका के डॉ. ज्वेल क्रैस्टा ने मिलकर किया है। यह रहा निष्कर्ष |
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