-सर्द मौसम में 18 से 20 किलोमीटर की रफ्तार से चल रही हवाओं के झोंकों से कांपा शहर
-ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों पर काश्तकारेां को नहीं जाने दे रही बढ़ती ठंड
-शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ठंडी हवाओं से कांपते रहे लोग, बाजारों में भी घटी चहल-पहल
-कृषि विभाग की ओर से ध्यान नहीं दिए जाने के चलते काश्तकारों की बढ़ी परेशानी
नागौर. कोहरे व शीतलहर के चलते कड़ाके की ठंड जनजीवन प्रभावित कर दिया है। हालत यह है कि दिन और रात एक जैसे लगने लगे हैं। नागौर शहर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों ेंमें सर्द चल रही हवाओं की वजह से अब सुबह या दोपहर में भी लोग परेशान नजर आने लगे हैं। बताते हैं कि अभी शीतलहर का प्रकोप एक-दो दिन तक और रहेगा, लेकिन मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सात जनवरी से सक्रियहोगा। इसके प्रभाव से उत्तर से बर्फीली हवाओं का आना रुक जाएगा। तापमान दो से चार डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। देश में पहाड़ी जगहों पर हो रही बर्फबारी का असर की वजह से यह मौसम पर हावी है। यही वजह है कि लगातार पारा जमाव बिंदु के नीचे जा रहा है। कई जगहों पर शीतलहर जारी है। मौसम के बदलते रूख के चलते 18 से 20 किलोमीटर की रफ्तार से चल रही बर्फीली हवाओं के झोंकों से शहर एवं ग्रामीण थरथराते रहे। विशेषकर सुबह सर्द हवाओं के साथ ही कोहरे के प्रभाव की वजह से विजिलिबिटी भी औसत रही। वाहन चलाने वाले अपनी गाडिय़ों की हेडलाइट जलाने के बाद भी बमुश्किल सफर करते नजर आए। शाम को अधिकतम पारा 16 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम पारा छह डिग्री के आसपास रहा। इसका तापमान पर पूरा असर रहा। दोपहर में धूप निकलने के बाद भी लोग ठंड से परेशान अलाव से राहत लेने में लगे रहे।
बाजारों में दुकानें दुकानें देर से खुली
शहर क्षेत्र में बढ़ी सर्दी की वजह से बाजारों में दुकानें निर्धारित समय से देर से खोली जा सकी। रेलवे स्टेशन रोड, नया दरवाजा, काठडिय़ा का चौक, बाठडिय़ा का चौक, सदर बाजार, तिगरी बाजार, पंसारी बाजार, गांधी चौक, किले की ढाल, मानासर चौराहा, मूण्डवा चौराहा, दिल्ली दरवाजा, विजयबल्लभ चौराहा आदि क्षेत्रों में कई दुकानें सुबह नौ बजे के बाद खुली। सुबह करीब सात बजे यह हालात रहे कि रेलवे स्टेशन से लेकर नकासगेट तक एक भी वाहन चलता नजर नहीं आया। इसी तरह से मानासर चौराहा के पास सुबह आठ बजे के बाद एक-दो दुकानें जरूर खुली मिली, लेकिन ज्यादातर बंद ही रही। जबकि सामान्य दिनों में यहां पर सुबह सात बजे ही दुकानें खुल जाती हैं। यही हालात अन्य क्षेत्रों में भी रहे। दोपहर में करीब दो से तीन बजे धूप होने के बाद भी बाजारों में ज्यादा चहल-पहल नजर नहीं आई। शाम को चार बजे के बाद तो दुकानें खुली होने के बाद भी खरीदारों की संख्या नगण्य रही।
कृषि विभाग नहीं दे रहा ध्यान, किसानों की हालत खराब
पारा जमाव बिंदु के पास चले जाने के कारण जिले के विभिन्न स्थानों पर खेतों फसलों की रखवाली के लिए काश्तकार जा नहीं पा रहे। सुबह सर्दी इतनी तेज होने के कारण खेतों में भी सन्नाटा की स्थिति बनी रही। सुबह दस बजे के पहले तक लोगों को ठंड से बिलकुल राहत नहीं मिली। इसके बाद भी लोग निकले तो सर्द हवाओं से परेशान रहे। निकली धूप के कारण लोगों को ठंड से कुछ हद तक राहत मिली। जिले में गत एक जनवरी से बढ़ी ठंड की वजह से पाला के कारण रबी फसलों को नुकसान होने की आशंका से काश्तकार भी परेशान है। काश्तकार फसलों को बचाने के लिए जुटे है। मूण्डवा के धनराज, रामराज, मूलाराम आदि किसान परेशान है। इनका कहना है कि सर्दी और बढ़ी तो फिर मुश्किल हो जाएगी। इसके बाद भी कृषि विभाग की ओर से बिलकुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है। काश्तकारों का कहना है कि वह संंबंधित विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन तो करते हैं, लेकिन फोन तक नहीं उठाता है। हालांकि काश्तकारों ने अपनी ओर से इसके लिए पहले से ही इन लोगों ने खेतों में धुआं आदि देने का काम शुरू कर दिया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि शीतलहर, पाळे से फसलों को बचाने धुआं करके तापमान बढ़ाने की जरूरत है। इससे फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है।
विशेषज्ञ बोले: फसलों पर पड़ेगा असर
पांच डिग्री के करीब तापमान जाने पर फसलों में चिलिंग व प्रोस्ट इंजरी आ जाती है। इसकी वजह से पेड़ व पौधे जलने लगते हैं। इससे यह फिर पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते हैं, लेकिन इस दौरान गिरती ओस से फसलों को जरूर राहत मिलती है। इस तरह की सर्दी में फसलों के दानों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसी सर्दी में पाला की आशंका ज्यादा बढ़ जाती है।
विकस पावडिय़ा, कृषि अर्थशास्त्री, कृषि महाविद्यालय नागौर