>>: दफ्तर के आगे लगाया फ्लेक्स व लिखे स्लोगन और हो गया खान सुरक्षा अभियान पूरा

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भीलवाड़ा।
खदानों में श्रमिक सुरक्षा व जागरूकता को लेकर खान विभाग की संजीदगी की इससे बेहतर बानगी नहीं हो सकती। विभाग ने सरकार के निर्देश पर एक माह खान सुरक्षा अभियान चलाया और इसकी भनक तक किसी लीजधारक को नहीं लगने दी। भनक लगती भी कैसे, विभाग ने कोई कार्यक्रम थोड़े ही कराए थे। विभाग ने सुरक्षा अभियान का एक फ्लेक्स अपने दफ्तर के आगे लगाया और हो गई इतिश्री। मजेदार बात यह है कि इसी अभियान के दौरान लाछुड़ा में अवैध खदान ढहने से सात श्रमिक काल के ग्रास बने। अवैध खनन पर कार्रवाई करने गए दल पर बजरी माफिया ने हमला भी किया। विभाग का दावा है कि सुरक्षा अभियान १५ जुलाई से १४ अगस्त तक चला।
ये हैं हालात
कई खदानें एेसी है, जहां श्रमिकों के लिए पेयजल तक का बंदोबस्त नहीं है। मजदूरों की सुरक्षा के उपकरण मसलन हेलमेट आदि सिर के बजाय एक जगह पड़े मिले।
फ्लेक्स पर लिखे संदेश के मायने और असलियत
विभाग के दफ्तर के आगे लगे फ्लेक्स में लिखा था-सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग कीजिए, अपने आपको दुर्घटना से बचाइए। असलियत में इसी अभियान के दौरान जिले में दो बडे़ खदान हादसे हुए। फ्लेक्स के दूसरे स्लोगन में प्रकृति का न करे हरण, आओ बचाए पर्यावरण लिखा जबकि बजरी माफिया बनास व कोठारी नदी को इतना छील चुके हैं कि पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया।
अभियान का यह था मकसद
खनिज विभाग के एक माह के अभियान का उद्देश्य खदान मालिक व श्रमिकों को जागरूक करना था। विभाग के अधीक्षण व खनिज अभियन्ता को खदानों का निरीक्षण करना था लेकिन कुछ खदानों का ही जायजा लिया। खननपट्टों में व्यवस्थित, सुरक्षित एवं वैज्ञानिक विधि से खनन, पट्टों में पर्यावरण संरक्षण से सुरक्षित खनन, खनन पट्टों में खनिकों के स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित खनन, मजदूरों के लिए पेयजल व शौचालय तथा चिकित्सकीय उपकरण का बंदोबस्त करना था। खनन क्षेत्र में पौधारोपण, खनन के समय मास्क, हेलमेट व सेफ्टी शूज का उपयोग, ड्रिलिंग के समय सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने पर जोर देना था। असल में इनमें किसी नियम की पालना नहीं कराई गई। हां, कुछ अधिकारी कुछ क्षेत्रों में मजदूरों को पेम्फलेट जरूर बांट आए। नियम नहीं मानने वाले लीजधारकों पर कोइ कार्रवाई नहीं की गई।
मजदूरों को समझाया
एक माह के खान सुरक्षा अभियान के दौरान कई खनिज पट्टों व लीज का निरीक्षण किया। पेम्फलेट के जरिये खान सुरक्षा की जानकारी दी लेकिन स्टाफ कम होने से अन्य कार्य व अभियान का प्रचार-प्रसार नहीं कर सके।
अरविन्द नन्दवाना, अधीक्षण खनि अभियन्ता भीलवाड़ा

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