>>: राजस्थान का अनूठा गांव जहां होता है पेड़ों का विवाह, ग्रामीण बांट रहे विवाह का निमंत्रण पत्र

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जोधपुर/ बेलवा. पर्यावरण सरंक्षण व जागरूकता को लेकर पुरातन काल से ही पेड़ों की पूजा अर्चना के साथ विशेष धार्मिक मान्यता रही है। उसी परंपरा को जीवित रखते हुए आज भी लोग पेड़ों को महत्व दे रहे है। पर्यावरण जागरूकता को लेकर ऐसा ही एक आयोजन क्षेत्र के केतु गांव में होने जा रहा है। जहां गांव के दो पेड़ों को हल्दी लगेगी, डोली सजेगी, बैंड बजेगा और ठाकुरजी की बारात भी आएगी।

दरअसल दोनों की शादी होने जा रही है। शादी समारोह को लेकर परिवार के लोग निमंत्रण पत्र कुकुंपत्री छपवाकर ग्रामीणों व मेहमानों को न्यौता दे रहे है। विवाह स्थल क्षेत्र के केतु मदा सालासर नगर में लालाराम व कुलरिया परिवार के घर का आंगन होगा।

जहां पर आगामी शुक्रवार 5 मई को विवाह की सभी रस्में निभाई जायेगी। पीपल की शादी के लिए टेंट बुक हो चुका है तो प्रीति भोज का मेन्यु भी बन गया है। अब मेहमानों व आसपास के गांवों के लोगों को बुलाने के लिए अब शादी कार्ड बांटे जा रहे है। उल्लेखनीय है कि लालाराम सुथार के घर आंगन में दो पीपल के पेड़ है जिन्हें रोज पानी और सुरक्षा दी। पिछले वर्षों से वे उन्हें परिवार के सदस्य की भांति मानने लगे।

पौधे अब बढ़कर वृक्ष बन गये हैं। कुलरिया परिवार ने पर्यावरण सरंक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए पीपल के पेड़ों के विवाह का आयोजन का निर्णय लिया। पेड़ों की सुरक्षा व धार्मिक महत्व का संदेश पहुंचाने के लिए इस शादी समारोह को कराने के लिए तैयार हो गए। शादी कार्ड पर ब्राह्मण द्वारा शुभ मुहूर्त व तिथि का भी अंकन किया गया है। पीपल का विवाह गोधूलि वेला में आयोजित होगा। शादी को लेकर घर आंगन को पूरी तरह से रंग रोगन से सजाकर तैयार कर लिया गया है। परिवार के लोग शादी के कार्ड बांट रहे है।

विवाह के बाद पूजा योग्य पीपल:

हिंदू रीति-रिवाजों में सभी धार्मिक कार्य पीपल के पेड़ में किए जा सकते हैं। विवाह करने के बाद ही यह वृक्ष पवित्र माना जाता है। शादी के बाद पीपल का पेड़ जल चढ़ाने, मनोकामना के लिए बंधन बांधने, पूजा करने के लिए पवित्र माना जाता है। वही दुनिया का एक मात्र पीपल ही ऐसा वृक्ष है, जो दिन-रात चौबीसों घण्टे ऑक्सीजन का उत्सर्जन करता है तथा कार्बनडाई ऑक्साइड को ग्रहण करता है।

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