>>: दिल के आकार का स्ट्रॉबेरी कर रहा आकर्षित

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हिमाचल से मंगाए पौधे
किसान को इसकी प्रेरणा डॉ. महेश कुमार से मिली। इन्हीं के सुझाव पर उसने हिमाचल प्रदेश से दो हजार से अधिक पौध मंगाई। उसने स्ट्रॉबेरी की तीन किस्में लगाई हैं। ये हैं- कैमरोजा, चैंडलर, विस्टर डॉन। इसे लगाने का सही समय सर्दियों की शुरुआत में अक्टूबर माह में होता है। स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाने के दो माह बाद फ ल आना शुरू हो जाता है। एक पौधा चार से पांच साल तक फल देता है। शीघ्र फल देने व अधिक पैदावार के लिए जैविक खाद का प्रयोग किया जाता है। यह फल बहुत ही नाजुक व क्षयशील होता है। गुणवत्तायुक्त व अधिक उत्पादन के लिए इस फसल मेें बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से पानी देना चाहिए।

प्लास्टिक के डिब्बे में करते पैक
अत्यधिक नाजुक होने की वजह से स्ट्रॉबेरी के फ लों को छोटे एवं पारदर्शी प्लास्टिक के डिब्बे में पैक करते हैं। एक पैकेट में 200 ग्राम फ ल भरा जाता है। इन भरे हुए डिब्बों को गत्ते के दो टुकड़ों के बीच रखकर टेप से चिपका देते हैं। पैक डिब्बों को दूरस्थ स्थानों तक पहुंचाते हैं। तुडाई के बाद यथाशीघ्र फ लों की बिक्री करनी होती है। फलों को शीत गृह में नहीं रखा जाए तो वे दो दिनों में ही खराब हो जाते हैं। किसान अगले वर्ष पांच एकड़ में इसकी खेती करेगा।

स्वास्थ्य के लिए लाभदायक
स्ट्रॉबेरी स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। इसमें मौजूद विटामिन-सी एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है। इसमें कई ऐसे कार्बनिक यौगिक होते हैं जो कैंसर से भी बचाते हैं।

मोहन जोशी — भुसावर

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