>>: Ashok Gehlot सरकार का काम संभालने में अफसर हुए फेल अब करेंगे मंत्री होमवर्क चैक

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Ashok Gehlot: जयपुर. चारदीवारी (परकोटा) के हैरिटेज संरक्षण और सुनियोजित विकास में देरी को स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने गंभीरता से लिया है। यहां 6.8 वर्ग किलोमीटर एरिया के लिए अलग से विकास प्राधिकरण बनाने का प्लान तैयार है, लेकिन गठन को लेकर अफसर सक्रिय नहीं रहे, न ही हैरिटेज नगर निगम हैरिटेज का संरक्षण कर पा रहा है। इसका साइड इफेक्ट यह है कि लगातार चारदीवारी में हैरिटेज हवेलियों की जगह कॉम्प्लेक्स खड़े होते जा रहे हैं। एकरूपता भी खत्म हो रही है। कोर्ट भी इस मामले में नाराजगी जता चुका है। अब मंत्री धारीवाल इसकी पूरी प्लानिंग का होमवर्क चैक करेंगे। जब तक विकास प्राधिकरण का गठन नहीं हो जाता, तब तक नगर निगम की ओर से किए जा रहे काम की नियमित मॉनिटरिंग होगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में पहली बार होगा जब एक ही शहर में दो विकास प्राधिकरण होंगे। अभी जयपुर विकास प्राधिकरण काम कर रहा है।

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प्राधिकरण गठन का यह है आधार

परकोटा क्षेत्र को वर्ल्ड हैरिटेज साइट्स में बनाए रखने के उद्देश्य से जो सात महत्वपूर्ण कार्य किए जाने हैं। उनमें सबसे पहला काम यहां का स्पेशल एरिया हैरिटेज प्लान बनाना और उसे लागू करना है।

जयपुर. परकोटे की 19 अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के 1000 से अधिक व्यापारियों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा है। सरकार से राहत न मिलने के बाद अब व्यापारियों ने कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला लिया है। इसके अलावा 80 से अधिक व्यापारियों ने निगम के नोटिस का भी जवाब दे दिया है।

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गुरुवार को व्यापारियों की बैठक में तीन समितियों का गठन किया गया। निगरानी समिति के सदस्य निगम के कामकाज को देखेगी। संघर्ष समिति सभी व्यापारियों को जोड़ेगी और विधि सलाहकार समिति वकीलों के साथ मामले को कोर्ट में ले जाएगी। हर टीम में पांच-पांच लोगों को रखा गया है। कोर्ट में पक्ष रखने के लिए अब तक पांच वकीलों को तैयार किया गया है।
क्यों है जरूरत
ध्वस्त हो रहीं हवेलियां: नगर निगम हैरिटेज के परिधि क्षेत्र में सम्पूर्ण चारदीवारी है। निगम का फोकस केवल सफाई, सीवरेज, अवैध निर्माण, पट्टा देने व अन्य कुछ कार्यों पर हैं। हवेलियों को ध्वस्त कर खड़े हो रहे कॉम्प्लेक्स को रोका नहीं जा रहा।

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विश्व विरासत का तमगा छिनने का खतरा: विश्व विरासत में शामिल चारदीवारी की बिगड़ती स्थिति पर यूनेस्को ने नाराजगी जताई थी, जिसके बाद अथॉरिटी बनाने का निर्णय किया गया। उस समय परकोटे के विश्व विरासत का खिताब बचाने की जद्दोजहद चल रही थी।

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नगर निगम का सीमित हो जाएगा काम
चारदीवारी के चिन्हित क्षेत्र का संरक्षण, डेवलपमेंट, बिल्डिंग निर्माण व पुनर्निर्माण स्वीकृति सहित अन्य प्रमुख काम अथॉरिटी के ही जिम्मे होंगे। जबकि, सफाई, ड्रेनेज, सीवरेज, रोड लाइट, लीज राशि जमा करने, नगरीय विकास कर सहित अन्य काम नगर निगम ही करेगा।

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एक्सपर्ट बोले... विरासत बचाना जरूरी

जो व्यापारी इन अवैध इमारतों में व्यापार कर रहे हैं, उनके सामने चुनौती है। कोर्ट के आदेश की पालना में निगम कार्रवाई को तैयार है। जिन लोगों ने इमारतें बनाईं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। विरासत बचाना जरूरी है। -एच.एस. संचेती, पूर्व मुख्य नगर नियोजक

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परकोटे में नया निर्माण रोकना जरूरी हो गया है। इसी रफ्तार से नए निर्माण होते रहे तो आने वाले दस वर्ष में पूरे परकोटे में ही नए निर्माण हो जाएंगे और उस पर रंगरोगन ही करते रह जाएंगे। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। -सी.एस. पाराशर, पूर्व अतिरिक्त नगर नियोजक

चारदीवारी जयपुर शहर का अभिमान है। इसके वैभव को बचाने के लिए सभी की जिम्मेदारी है। इसीलिए अलग से विकास प्राधिकरण गठन प्रक्रिया जल्द पूरी होगी। किस कारण से देरी हो रही है, इसे चैक कर रहा हूं।

-शांति धारीवाल, स्वायत्त शासन मंत्री

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