>>: पनियल दाल-रोटी खाओ, प्रभु के गुण गाओ!

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ज्ञान प्रकाश शर्मा
भरतपुर. खाने की थाली में अगर दाल न परोसी जाए तो खाना अधूरा सा लगता है, लेकिन जिस तरह से दाल पर महंगाई की मार पड़ रही है उसके बाद अब आम लोगों की थाली से दाल गायब सी होती नजर आ रही है। कभी गरीबों की प्रोटीन मानी जाने वाली दालों के लगातार बढ़ते दाम को लेकर आम आदमी परेशान है। थोक में भले ही दालों के भाव 100 रुपए किलो से कम हैं, लेकिन यहीं दाल बाजार में दुकानों तक पहुंचते-पहुंचते 130 रुपए किलो तक पहुंच जाती है। ऐसे में गरीब एवं आम ही नहीं, अपितु सामान्य लोगों की पहुंच से भी बाहर होती जा रही हैं दालें।
व्यापारियों का कहना है कि दालों की खेती कम होने से एवं मौसम की मार के कारण दालों का उत्पादन कम होने के कारण भाव बढ़ रहे हैं। साथ ही फिलहाल शादियों का सीजन होने का असर भी दालों पर हैं। गत वर्ष की तुलना में भावों में प्रति किलो पर 10 रुपए से लेकर 30 रुपए तक की वृद्धि हुई है।
प्राचीन कहावत है कि 'दाल रोटी खाओ प्रभु के गुण गाओ' लेकिन ये कहावत अब आम आदमी के लिए बेमानी साबित हो रही है। क्योंकि दालों के भाव हर साल कम होने की बजाय बढ़ते ही जा रहे हैं। अभी तो हालात यह है कि चना की दाल को छोड़ दें तो बाकी कोई भी दाल 100 रुपए किलो से कम नहीं है। दाल के थोक व्यापारी संजीव गुप्ता के अनुसार थोक में मूंग दाल 85 से 102 रुपए किलो तक पड़ती है। इसी प्रकार अरहर 104, चना 59 से 62, उड़द 94 से 104 और मसूर 62 से 70 रुपए किलो बिक रही है, लेकिन यहीं दाल बाजार में पहुंचे-पहुंचे 100 रुपए किलो से ऊपर हो जाती है। इसके पीछे थोक की दुकान से खुदरा की दुकान तक का भाड़ा, दुकान किराया, नौकर, लाइट खर्चा आदि जोडक़र इतना बढ़ जाता है।
दालों के प्रति किलो खुदरा भाव
दाल 2022 2023
धोबा मूंग 100 रुपए 120
मूंग छिलका 90 110
अरहर 100 130
उड़द 110 120
मसूर 80 90
चना 60 70

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