>>: बारह वर्ष पहले टैंकर चालक ने जोधपुर को जलने से बचाया, मुख्यमंत्री ने दिया था तोहफा, लेकिन यह वादा आज भी अधूरा

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बाड़मेर पत्रिका. बारह वर्ष पहले बाड़मेर के भुरटिया निवासी टैंकर चालक लक्ष्मणराम चौधरी ने जोधपुर को जलने से बचा लिया। लक्ष्मण की बहादुरी के लिए मुख्यमंत्री ने उसे पांच लाख रुपए का चैक देकर सम्मानित किया। जोधपुर गौरव अलंकरण पुरस्कार से भी नवाजा गया। राजस्थान के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक हरीशचंद्र मीणा ने भी प्रशस्ति देकर सम्मानित किया। तत्समय हर कोई लक्ष्मण की बहादुरी का मुरीद हो गया। नेताओं ने लक्ष्मण के साहस को सलाम करने में जमकर जुबानी जमा खर्च किया, लेकिन सरकारी के नौकरी के वादे को सरकारी फाइलों में ही दफन कर दिया। बीते बारह वर्ष से यह बहादुर चालक सरकारी नौकरी के लिए चक्कर लगा रहा है, लेकिन सिवाय आश्वासनों के कुछ भी हाथ नहीं आया है।


जलता टैंकर लेकर डेढ़ किलोमीटर दौड़ाया
29 अक्टूबर 2011 को सायं चार बजे जोधपुर के रातानाडा पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल से भरे टैंकर में अचानक आग लग गई। मौके पर कोहराम मच गया। पूरा पेट्रोल पम्प आग की चपेट में आने वाला ही था कि एक युवक जलते हुए टैंकर में चालक की सीट पर बैठ गया और टैंकर स्टार्ट कर मौके से डेढ़ किलोमीटर दूर ले जाकर निर्जन क्षेत्र में सुरक्षित स्थान पर टैंकर छोड़ दिया। इस चालक का नाम लक्ष्मण था, जिसकी जान जा सकती थी, लेकिन उसने अपनी जान की परवाह नहीं की और हजारों जानें बचा दी।

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मुख्यमंत्री से हुई थी नौकरी की बात
लक्ष्मण की बहादुरी पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उसे फोन कर बधाई दी। चालीस वर्षीय लक्ष्मण ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि अग्निशमन विभाग में चालक की सरकारी नौकरी मिल जाए तो उसके लिए बड़ा तोहफा होगा। मुख्यमंत्री ने कागजात के साथ बाड़मेर के तत्कालीन सांसद हरीश चौधरी से मिलने को कहा। पांचवीं पास लक्ष्मण सांसद के माध्यम से जयपुर जाकर मुख्यमंत्री से मिला तो बताया गया कि जैसलमेर के नसीरखां की फाइल भी साथ लाओ। नसीरखां ने भी ऐसे ही बहादुर दिखाई थी। इस तरह नौकरी अटक गई। उसके बाद लक्ष्मण चार बार मुख्यमंत्री से मिला, लेकिन नौकरी नहीं मिली। बाद में भाजपा की सरकार आई और चली गई। 2018 में गहलोत फिर मुख्यमंत्री बने, लक्ष्मण फिर मिला, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब वह बावन वर्ष का हो गया, पर नौकरी की आस अभी भी लगाए हुए हैं।

भगवान ने मेरे हाथ से जो काम करवाया, उसका संतोष ताउम्र रहेगा। परंतु इस बात का दुख है कि सरकार ने मुझे नौकरी नहीं दी। चार बार मुख्यमंत्री से मिला, कई नेताओं से मिला, सभी ने आश्वासन दिए, लेकिन किसी ने मेरा काम नहीं किया। मुझे अभी भी उम्मीद है कि नौकरी मिलेगी।
लक्ष्मणराम चौधरी

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