>>: Digest for June 01, 2023

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राजसमंद. राजसमंद की लाइफ लाइन कही जाने वाली राजसमंद झील को भरने वाला खारी फीडर (Khari Feeder ) दुगना चौड़ा किया जाएगा। इससे झील में पानी की आवक दुगनी गति से होगी। हालांकि काम शुरू होने में अभी भी तीन माह का समय लगने की उम्मीद है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 137 करोड़ खर्च होंगे।
राजसमंद झील से शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति की जाती है। लेकिन पिछले दो साल से अच्छी बारिश के अभाव में इस बार जलस्तर -2 डिग्री पहुंच गया था। नंदसमंद के ओवरफ्लो होने पर खारी फीडर (Khari Feeder ) के माध्यम से राजसमंद झील में पानी पहुंचता है। राज्य सरकार ने बजट में खारी फीडर को चौड़ा करने के लिए 80 करोड़ की घोषणा की है। इसके तहत सिंचाई विभाग ने डीपीआर तैयार करवाई गई। उक्त डीपीआर को मुख्यालय में सब्मिट किया गया है। मुख्यालय से इसकी जांच के बाद प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति जारी की जाएगी। इसके बाद टेण्डर प्रक्रिया प्रारंभ होगी और फिर काम शुरू होगा। इसमें तीन माह का समय लगने की उम्मीद है। काम शुरू होने के बाद उक्त कार्य को पूरा करने में डेढ़ से दो साल का समय लगने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि नंदसमंद (Nandsamand) के ओवरफ्लो होने पर 14 अगस्त 2022 को खारी फीडर (Khari Feeder ) खोला गया था। करीब 50 दिन तक लगातार पानी की आवक होने से झील का जलस्तर 12.60 फीट पहुंच गया था। वर्तमान में झील का जलस्तर करीब 6 फीट है।

इस प्रकार होगा काम
खारी फीडर (Khari Feeder ) के एक ओर सर्विस रोड बनी हुई है। ऐसे में उस जगह को छेड़ा नहीं जाएगा। इसके अलावा दूसरी ओर की तरफ से खुदाई कर उसे चौड़ा किया जाएगा। क्रास डैनेज सिस्टम को भी दुरुस्त किए जाएंगे। ऐसे में जल्द ही बारिश का दौर शुरू हो जाएगा। ऐसे में इस दौरान जिस स्थान से फीडर को चौड़ा किया जाएगा उस स्थान की सफाई और खुदाई आदि का कार्य करवाया जाएगा। विभाग के जानकारों के अनुसार फीडर को चौड़ा किया जाएगा उसमें से 95 प्रतिशत जमीन सरकारी है।
फैक्ट फाइल
- 400 क्यूसेक पानी की वर्तमान में आवक
- 800 क्यूसेक पानी की होगी आवक
- 32.40 किमी खारी फीडर की लम्बाई
- 4.60 मीटर वर्तमान में फीडर की चौड़ाई
- 8.50 मीटर हो जाएगी फीडर की चौड़ाई
- 137 करोड़ खर्च होंगे पूरे प्रोजेक्ट पर खर्च
- 79.94 करोड़ पहले चरण में होंगे खर्च
- 57.08 करोड़ दूसरे चरण में होंगे खर्च
यहां होती है सिंचाई
- 45 राजसमंद के गांव में 10,144 हेक्टेयर में होती सिंचाई
- 07 नाथद्वारा के गाांव की 467 हेक्टेयर में होती है सिंचाई
- 700 एमसीएफटी पीएचईडी के लिए रखा जाता है रिजर्व
डीपीआर मुख्यालय में की सब्मिट
डीपीआर को जयपुर मुख्यालय सब्मिट कर दिया गया है। डीपीआर की प्रशासनिक और तकनीकि स्वीकृति जारी होने के बाद टेण्डर प्रक्रिया होगी शुरू। ऐसे में जुलाई के अंत तक काम शुरू होने की उम्मीद है।
- अरूण शर्मा, एक्सईएन, सिंचाई विभाग राजसमंद

राजसमंद. फलों के राजा आम (mango) पर भी मौसम और महंगाई की मार पढ़ गई है। इसके कारण वह आमजन की पहुंच से दूर हो गया है। स्थिति यह है कि पिछले साल जो आम (mango) 30 से 40 रुपए प्रतिकिलो के भाव से बिक रहा था। वह इस बार 60 से 70 रुपए प्रति किलो के बीच बिक रहा है। वर्तमान में आम का पीक सीजन चल रहा है।
फलों के राजा आम (mango) को गर्मी के दौरान प्रत्येक घर में चाव से खाया जाता है। इसके कारण इसकी मांग एकाएक बढ़ जाती है, लेकिन इस बार इसके भावों में अभी तक तेजी के चलते आमजन की पहुंच में नहीं आ पाया है, जबकि प्रत्येक वर्ष मई माह में इसकी रेट 30 से 40 रुपए प्रतिकिलो हो जाती है, लेकिन इस बार इसके भाव 60 से 70 रुपए किलो पर अटके हुए हैं। आगामी दिनों में इसमें कमी आने की संभावना कम ही दिखाई दे रही है। प्रदेश में 15 जून के आस-पास प्री-मानसून बारिश शुरू हो जाती है। इसके साथ ही आम की आवक कम हो जाती है।

यहां से आता है आम
जिले में अधिकांश आम (mango) की आवक महाराष्ट्र के किशनापुरी और मध्यप्रदेश के जूनागढ़ से होती है। यहां पर आम (mango) की पैदावार बहुतायात में होती है। फल के होलसेल विक्रेताओं की मानें तो वहां पर खेतों से आम 10 से 15 रुपए किलो के भाव से उठते हैं और लोगों तक पहुंचते हुए इसका भाव 80 से 100 रुपए किलो तक पहुंच जाता है।

10 टन से अधिक की आवक
जिला मुख्यालय पर 8 से 10 बड़े थोक व्यापारी है। जानकारों के अनुसार जिला मुख्यालय पर प्रतिदिन 10 टन (100 क्विंटल) से अधिक आम की आवक हो रही है। यहां से पूरे जिले में आम की सप्लाई होती है। इसमें कुछ स्थानों पर मंडियों में तो कुछ सीधे व्यापारियों के यहां आम की पेटियां भेजी जाती है। वर्तमान में आम का पीक सीजन चल रहा है।

आम की किस्म वर्तमान भाव (रुपए) पिछले साल (किलो)
किस्म वर्तमान पिछला
केसर 100-120 80-100
सिंदूरी 70-75 40-50
बदाम 60-70 40-45
तोता 60-65 35-40
भावों के आसमान छूने के यह कारण
- इस वर्ष आम की पैदावार कम होना
- बेमौसम बारिश एवं मौसम परिवर्तन
- ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बढऩे के कारण
- व्यापारियों का एकाधिकार होना
- महंगाई से भावों में तेजी आना

पेड़ खूब, बनता है अचार
मेवाड़ के उदयपुर, राजसमंद, प्रतापगढ़ जिले में आम के पेड़ बहुत है, लेकिन इसमें से अधिकांश पेड़ में कैरी (कच्चा आम) होती है। उक्त कैरी से घरों में आचार आदि गलाया जाता है, जिसे पूरे वर्ष उपयोग लिया जाता है। सर्वाधिक पेड़ इसके कुंभलगढ़ क्षेत्र में है। इसमें से कुछ कैरियों के आम भी बनाए जाते है, लेकिन उसकी मात्रा बहुत कम होती है।

goram ghat देवगढ़. उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर मंडल के कामलीघाट-फुलाद सेक्शन को हेरिटेज सेक्शन के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां टूरिस्ट ट्रेन सर्विस का संचालन किया जाएगा।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अजमेर मंडल विवेक रावत ने बताया कि अजमेर मंडल के कामलीघाट-फुलाद सेक्शन, जिसे घाट सेक्शन भी कहा जाता है, इस मार्ग पर एक पर्यटक ट्रेन सेवा चलाने की योजना है। यह टूरिस्ट ट्रेन या रेल बस होगी, जो उत्तर पश्चिम रेलवे के विरासत मीटरगेज के घाट खंड पर विभिन्न दर्शनीय स्थलों को कवर करेगी। हेरिटेज घाट खंड में कई खड़ी ढलानें, तीखे मोड़, सुरंगें, पुल आदि शामिल हैं, जो इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और इंजीनियरिंग चमत्कारों की बेजोड़ प्रस्तुति देते हैं। यह खंड सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित रेलवे संरचनाओं में से एक है। इस ट्रेन को घाट एक्सप्रेस नाम दिए जाने की संभवना है।

ट्रेन में एक डाइनिंग कार भी उपलब्ध होगी
रावत ने बताया कि हेरिटेज घाट एक्सप्रेस ट्रेन में 5 कोच तक होंगे, जिसमें एक विशेष कोच भी शामिल है। इसमें बाहर का मनोरम दृश्य देखने के लिए बड़ी खिड़कियां हैं। ट्रेन में एक डाइनिंग कार भी उपलब्ध होगी। घाट एक्सप्रेस, 30 यात्रियों की क्षमता वाली रेलबस है।

राजस्व और ब्रांड जागरूकता बढ़ाना ही उद्देश्य
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को सेवाएं देने के लिए संभावित फर्मों और संगठनों की रेलवे तलाश कर रहा है। इस गतिविधि का उद्देश्य ट्रेन सेवा राजस्व और ब्रांड जागरूकता को बढ़ाना और अधिकाधिक पर्यटकों को हेरिटेज घाट सेक्शन के लिए आकर्षित करना है।

चारभुजा. इलाके में प्रात: 6:30 बजे अचानक बादल घिर आए। 5 मिनट के अंतराल में तेज अंधड़ चला, जिससे सड़क पर वाहन रुक गए, राहगीरों ने भी छतें ढूंढी। सुबह 7 से 7:30 बजे तक तेज वर्षा हुई। सड़कों पर पानी बह निकला। दोपहर 11 बजे फिर तेज हवाओं के साथ वर्षा हुई। दिनभर मौसम बदलता रहा। धूप-छांव का खेल चला। मौसम ठंडा हो गया। चारभुजा में शादी समारोह के लिए लगाए टेंट तेज हवाओं के साथ उड़ गए तथा व्यवस्थाएं चरमरा गई।
राजसमंद. जिले में मंगलवार को दूसरे दिन भी अंधड़ और बारिश का दौर जारी रहा। इससे मौसम ठंडा हो गया। अधिकतम तापमान में तीन डिग्री कम हुआ, जबकि न्यूनतम तापमान ३.५ डिग्री बढ़ गया। इस दौरान करीब ४.६ एमएम बारिश दर्ज की गई।
जिले में मंगलवार को सुबह ७ से ८ बजे तक तेज अंधड़ और बारिश का दौर शुरू हुआ। इससे कई जगह टीनशेड उड़ गए और पेड़ धराशाही हो गए। धीरे तो कभी तेज बारिश का दौर जारी रहा। करीब एक घंटे अंधड़ और बारिश का दौर चलता रहा। इसके बाद चटक धूप खिली, लेकिन दोपहर १२ बजे बाद फिर से अंधड़ और बारिश का दौर शुरू हुआ। इसके बाद शाम ४ बजे तक धूप खिली रही। इसके बाद फिर से काले बादल छा गए और बूंदाबांदी का दौर चलता रहा। तापमान में गिरावट आने से घरों में चल रहे कूलर आदि बंद हो गए। मौसम विभाग के जानकारों के अनुसार मंगलवार को अधिकतम ३० और न्यूनतम तापमान २२.५ डिग्री रहा, जबकि बारिश ४.६ एमएम हुई। सोमवार को अधिकतम ३३ और १९ डिग्री रहा था। आगामी दिनों में बादल और तेज हवा का दौर जारी रहने की संभावना है।

अंधड़ के साथ हुई झमाझम बारिश
देवगढ़. नगर में मंगलवार प्रात: से ही काले बादल छाए रहे और तेज हवाएं चलने के साथ रिमझिम बारिश शुरू हो गई, जो धीरे-धीरे झमाझम में बदल गई। बारिश का दौर रुक-रुक कर काफी देर तक जारी रहा, जिससे सड़कों पर पानी बहने लगा। इसके बाद गर्मी का असर खत्म हो गया और मौसम एकाएक ठंडा हो गया। इससे लोगों को गर्मी से काफी राहत मिली। इसके बाद पूरे दिन बादलों के डेरे के चलते धूप-छांव का मौसम बना रहा।
रिछेड़. कस्बे में पिछले तीन दिनों से जारी बारिश का दौर मंगलवार को भी जारी रहा। आज प्रात: के समय काले घने बादल छा गए और करीब 15 मिनट तक बारिश हुई। लगातार बारिश के दौर से गर्मी का असर काफी कम हो गया और मौसम ठंडा हो गया। बारिश के दौर के चलते किसानों ने भी अब अपने खेतों को बुवाई के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है। इसके तहत खेतों की चारदिवारी की मरम्मत करने के साथ ही खेतों में खाद डालने का काम किया जा रहा है।

20 मिनट तक मूसलाधार बरसात
केलवा. क्षेत्र में सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे। 8 बजे तेज हवाएं चली। आसपास के क्षेत्रों में टिन-टप्पर उड़ गए, वहीं दुकानों के बाहर लगे बोर्ड उड़ गए। 11.30 बजे बादलों की तेज गर्जना के बीच शुरू हुई बारिश से सड़कों पर पानी बहने लगा, खेत लबालब भर गए। भीषण गर्मी से ग्रामीणों को राहत मिली। नन्हे-मुन्ने बालक बारिश में अठखेलियां करते नजर आए, वहीं बिजली गुल रहने से बिजली आधारित कामकाज ठप रहे।
कुंवारिया. तहसील क्षेत्र में विगत तीन दिनों से तूफानी हवाओं का दौर अनवरत रूप से जारी रहा, जिसके कारण क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर पेड़ धराशायी हो गए। वहीं, कुछ घरों की छतों व नोहरंों में लगाए हुए लोहे के टीनशेड व सीमेंट के चादर उड़ गए। क्षेत्र में मंगलवार की सुबह से ही बादल छाए रहे और तेज हवाएं चलने लगी। वहीं, दिन में रुक-रुक कर वर्षा का दौर भी जारी रहा। गर्मी के मौसम में वर्षा होने को लेकर किसानों ने आगामी मानसून कमजोर होने की चर्चा काफी जोरों से चल रही है। लेकिन, इसके साथ ही किसानों के द्वारा आगामी खरीफ फसलों की बुवाई को लेकर खेतों में तैयारियां भी शुरू कर दी गई है।


राजसमंद जिले के झौर के चावड मंगरी क्षेत्र में किसान मुंकुदमाधव चौहान ने खेत के समीप फार्म पौंड बनवाया। यहां से पानी को बूंद- बूंद सिंचाई के माध्यम से खेतों तक पहुंचाया। उन्होंने 20 बीघा में खरबूजा, 16 बीघा में तरकाकडी तथा 7 बीघा में टमाटर की फसल की बुवाई की । इससे वे बंपर पैदावार ले रहे हैं।

मिठास के कारण भरपूर मांग
यहां की तरकाकडी, खरबूजा व टमाटरों की जिले में ही भरपूर मांग है। व्यापारी भी इन खरबूजों की मिठास से प्रभावित होकर इन्हें भीलवाड़ा व उदयपुर मंडी तक ले जा रहे हैं।

वर्षाजल का किया उपयोग
किसान ने बागवानी विभाग के माध्यम से खेतों के समीप सौ गुणा सौ मीटर लम्बा व चौड़ा तथा दस फीट गहरा फार्म पौण्ड खुदवाया। इसमें बारिश के पानी का भण्डारण होता है

ट्रैक्टरों में लाते हैं खरबूजा
खेतों में एकत्रित खरबूजों को मजदूरों से तुड़वाया जाता है। ट्रैक्टरों की सहायता से इन्हें खेतों से बाहर लाया जाता है ताकि कम श्रम लगे व इनकी गुणवत्ता बनी रहे।

मिश्रित खेती लाभ का सौदा
किसान ने मिश्रित खेती को अपनाया है। खरबूजों के पौधों के कुछ दूरी के अंतराल में अमेरिकन भुट्टो के पौधों का भी बीजारोपण किया है। इससे दोहरा लाभ मिलता है।

उपचारित बीजों से अच्छा उत्पादन
किसान मुकेश यादव ने बताया कि उन्नत उपचारित बीजों के प्रयोग से बंपर पैदावार होती है। यह गुणात्मक रूप से भी श्रेष्ठ होती है।

योगेश श्रीमाली — कुंवारिया

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