>>: Air Pollution ने बढ़ाया खतरा, बढ़ने लगे COPD मरीज

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जोधपुर. बढ़ता Air Pollution लोगों को COPD (क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज) बीमारी की महामारी के स्तर की ओर ले जा रहा है। सर्दियों के कारण धुंध छाने, पराली व कचरा जलाने से पैदा हुआ कण और धूम्रपान COPD के मुख्य कारण है। देश में करीब 5.50 करोड़ से अधिक लोग सीओपीडी से पीड़ित है।
डॉ एसएन मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध कमला नेहरु टीबी एण्ड चेस्ट हॉस्पीटल में हर साल करीब 13 हजार रोगी सीओपीडी, अस्थमा व ओएडी बीमारी के आ रहे हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यह सभी उम्र के व्यक्तियों को प्रभावित कर सकता है लेकिन बुजुर्गों में अधिक देखा जाता है। देश में सीओपीडी के 40 प्रतिशत मामले की वजह धूम्रपान है, जबकि पूरे विश्व में एक तिहाई रोगी बगैर धूम्रपान के होते हैं।

क्या है सीओपीडी
सीओपीडी फेफड़ों की गंभीर बीमारी है। अस्थमा से मिलते जुलते यह रोग अस्थमा से भी ज्यादा घातक है। इसमें सांस लेने में कठिनाई, खांसी, बलगम (थूक) का अधिक आना, घरघराहट जैसी दिक्कतें शामिल है। सीओपीडी मरीजों में हृदय रोग, फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

सांस ही जीवन है
सीओपीडी दिवस हर साल 15 नवम्बर को मनाया जाता है। इस साल की थीम "सांस लेना ही जीवन है- पहले कार्य करें" रखी गई है। यह थीम फेफड़ों के स्वास्थ्य के महत्व और उन तरीकों पर जोर देती है जिनसे सीओपीडी की रोकथाम और उपचार के दायरे को व्यापक बनाया जा सकता है।

सीओपीडी के चेतावनी संकेत
1सांस लेने में कठिनाई
2.बढ़े हुए बलगम (पीला/हरा रंग) स्राव के साथ खांसी
3.ठंड लगने के साथ बुखार आना
4.थकान या कमजोरी
5.गला खराब होना
6.असामान्य सिरदर्द और नाक बंद होना
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केएन टीबी व चेस्ट हॉस्पीटल के 5 साल के डाटा
वर्ष -------- मरीज
2019 -------- 12345
2020 -------- 13663
2021 -------- 9543
2022 -------- 13422
2023 -------- 12089
(यह डाटा सीओपीडी, अस्थमा और ओएडी के है। वर्ष 2023 के डाटा अक्टूबर तक के हैं।)

ऐसे करें बचाव
- सीओपीडी का कोई इलाज नहीं है लेकिन लक्षणों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
- धूम्रपान बंद करना। अधिकांश मामले सीधे सिगरेट पीने से संबंधित है।
- प्रदूषित हवा में जाने से बचना चाहिए।
- इन्फ्लूएंजा का टीकाकरण श्वसन संक्रमण को रोकने में मदद करता है।
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सीओपीडी का मुख्य कारण धूम्रपान है। अब बढ़ता वायु प्रदूषण भी सीओपीडी के मरीजों की संख्या में इजाफा कर रहा है।
डॉ सीआर चौधरी, अधीक्षक, कमला नेहरु टीबी एण्ड चेस्ट हॉस्पीटल जोधपुर

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