>>: इस शहर में मनाया जाता है अनोखा पर्व, भैंसों के करतब करते हैं रोमाचिंत

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गिलूण्ड कस्बे के माणक चौक में खेंखरे पर मंगलवार को भैंसों को रिझाने की प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया गया। कार्यक्रम के तहत अपरान्ह तीन बजे ढोल-नगाड़ों के साथ कस्बे सहित दूरदराज के गांवों से ग्रामीणों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। शाम करीब साढे चार बजे तक चौक दर्शकों की भीड़ से अट गया और चौक सहित इर्दगिर्द की छतों पर तिल धरने तक को जगह नहीं बची। इसी बीच भैंसों की पहली जोड़ी को मैदान में लाया गया, जिनका परपंरानुसार पूजन कर पशु प्रेम की मिसाल दी गई। ग्राम पंचायत की ओर से पशुपालकों को भी उपरना एवं मालाएं पहनाकर सम्मानित किया गया। मैदान में पहुंची भैंसों की पहली जोड़ी ने ढोल-नगाड़ों की धुन के साथ दर्शकों को खूब रोमांचित किया और करीब 10 मिनट तक चौक में डटे रहे। इस दौरान जोड़ी के दोनों भैंसों ने चौक में चक्कर लगाते हुए पशु प्रेम का संदेश भी दिया। इस जोड़ी के जाने के पांच मिनट बाद ही दूसरी जोड़ी के भैंसे चौक में आ पहुंचे और एक दूसरे के गले मिलकर चलते बने। पशुओं के मालिकों ने दोनों भैंसों को एक बार फिर से चौक में लाकर करतब दिखाने का प्रयास किया, लेकिन दोनों भैंसे कुछ खास करतब नहीं दिखा पाए।

भैंसों ने गले मिलकर दी प्रेम की सीख
इसके बाद तीसरी जोड़ी के भैंसों ने चौक में पहुंचकर पहले तो एक दूसरे के गले मिलकर प्रेम की सीख दी, लेकिन बाद में कुछ देर तक दर्शकों को करतब दिखाते हुए रोमांचित किया। चौथी जोड़ी के एक भैंसे को चौक में लाया गया, लेकिन इस भैंसे के अत्यंत हष्ट पुष्ट होने से इसके मुकाबले कोई अन्य भैंसा नहीं होने से इसे पुन: ले जाया गया। इसके बदले अन्य भैंसों को चौक में लाकर करतब दिखाने का प्रयास किया, लेकिन कोई बात नहीं बनी और कई प्रयासों के बावजूद करतब नही दिखा पाने से दर्शकों को निराश ही होना पड़ा। पांचवीं जोड़ी के भैंसे भी चौक में पहुंचकर कुछ देर तक ही करतब दिखाते हुए लौट गए। शाम करीब 6 बजे सातवीं और अंतिम जोड़ी को मैदान में लाया गया। इस जोड़ी के भैंसों ने चौक में कुछ देर तक करतब तो दिखाए, लेकिन लंबे समय तक नहीं टिक पाए। करीब सात जोड़ी के रूप में भैंसों को चौक में लाकर करतब दिखाने एवं रिझाने का प्रयास किया गया। लेकिन कोई भी जोड़ी के भैंसे कुछ खास रोमांचित नही कर पाए जिसके चलते परपंरानुसार आगामी मानसून के भी मध्यम ही रहने का अनुमान लगाया गया। कस्बे में भैंसों को रिझाने की इस परंपरा के बाद लक्ष्मीनारायण मंदिर, लाल मंदिर, चारभुजा नाथ एवं माली मोहल्ला स्थित मंदिरों में अन्नकूट की परंपरा का निर्वहन किया गया।

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