>>: कैसे तैयार होगी खेल प्रतिभाएं, मैदान में नहीं पहुंच रहे कोच

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इंदिरा गांधी स्टेडियम अलवर जिले का सबसे बड़ा खेल का केन्द्र है। यहां से हजारों की संख्या में खिलाड़ियों ने देश-विदेश में अपना परचम लहराया है। लेकिन अब स्टेडियम में अभ्यास कर रहे कुछ ही खिलाड़ी आगे बढ़ पा रहे हैं। प्रशिक्षण पर सवाल उठ रहे हैं। इसका कारण बताया जा रहा है कि खेल मैदान तक प्रशिक्षक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कुछ खेल के प्रशिक्षक आते हैं तो कुछ के नहीं। इससे खिलाड़ी खेलों की बारीकियां पूरी तरह नहीं सीख पा रहे हैं।

खेल विभाग की ओर से खिलाड़ियों को तैयारी कराने के लिए 14 प्रशिक्षकों (कोचों) को लगाया गया है। इनमें से आधा दर्जन ही कोच ऐसे हैं जो नियमित खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। बाकी कोच कभी कभार ही आते हैं। खिलाड़ियों ने ही ये बात सामने रखी। खिलाड़ी कहते हैं कि यदि उन्हें नियमित प्रशिक्षण मिले तो वह बेहतर प्रदर्शन कर मेडल ला सकते हैं। कुछ कोच का तो कोई अता पता ही नहीं है।

इन खेलों के प्रशिक्षक पहुंच रहे हैं मैदान में: स्टेडियम से हजारों खिलाड़ियों ने अपना भविष्य तय किया है। स्टेडियम में अलग-अलग खेलों के प्रशिक्षकों की ओर से तैयारी करवाई जाती है। स्टेडियम में बॉक्सिंग, खेलो इंडिया एथलेटिक्स, बैडमिंटन, जूडो, धनुषबाण, बास्केटबॉल के प्रशिक्षक मैदान में पहुंच रहे हैं। वहीं शूटिंग बॉल, फुटबॉल, कुश्ती, कबड्डी, स्वीमिंग, हैंडबॉल आदि खेलों के खिलाड़ी मैदान में कोचों का इंतजार कर रहे हैं। खिलाड़ियों का ये भी कहना है कि कुछ प्रशिक्षक तो खेलों के बारे में जानकारी तक नहीं रखते। ऐसे में वह कैसे खिलाड़ियों को पारंगत करेंगे।

इस तरह होता है कोच का चयन: खिलाड़ियों को तैयारी कराने के लिए राजस्थान क्रीड़ा परिषद से खेल अधिकारी कोच आदि की मांग करते हैं। उसके बाद क्रीडा परिषद प्रशिक्षकों का आवंटन करती है। इनको दो साल के लिए लगाया जाता है। प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों को खेल विभाग की ओर से 15 से 20 हजार रुपए पगार के रूप में मिलते हैं। नियम यह कहता है कि प्रशिक्षकों को चार घंटे सुबह और चार घंटे शाम को मैदान में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना जरूरी है लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।

करेंगे कार्रवाईजो कोच इंदिरा गांधी स्टेडियम में अपनी उपिस्थति नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना जरूरी है।

अंजना शर्मा, जिला खेल अधिकारी

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