>>: चीन-बांग्लादेश के मार्केट को मात देगा भीलवाड़ा

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टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा की रेडीमेड गारमेंट्स इंडस्ट्रीज को पंख लगने की उम्मीद परवान पर है। केन्द्र व राज्य सरकार भीलवाड़ा में रेडीमेड गारमेंट्स कलस्टर बनाने की पहल करे तो यहां के उद्यमी चीन और बांग्लादेश के मार्केट को मात दे सकते हैं। यहां कच्चे माल का हब है। सूटिंग व डेनिम का कपड़ा आसानी से उपलब्ध है।

 

कच्चे माल को रेडीमेड गारमेंट्स में तैयार करने के लिए भीलवाड़ा शहर में 100 से अधिक छोटी-बड़ी इकाइयां संचालित है। इनमें प्रति माह लगभग 17 से 18 लाख पीस तैयार हो रहे हैं। बाहर की बड़ी कम्पनियों के ऑर्डर मिलने से उद्यमियों का रूझान तेजी से इस ओर बढ़ रहा है। भीलवाड़ा से प्रतिमाह करीब 50 करोड़ रुपए का टर्न ओवर है। भीलवाड़ा रेडीमेड गारमेंट्स का कलस्टर बनता है तो यह कारोबार 200 करोड़ प्रति माह के पार जा सकता। इसके लिए उद्यमी भी तैयार हैं। चीन व बांग्लादेश से सस्ता रेडीमेड गारमेंट्स अभी भीलवाड़ा में उपलब्ध हो रहा है।

यहां से मिल रहे ऑर्डर
उद्यमियों का कहना है कि रेडीमेड गारमेंट्स के लिए भीलवाड़ा को राजस्थान के अलावा मुम्बई, अहमदाबाद, पुणे तथा दक्षिण भारतीय शहरों से रिलाइंस, डी मार्ट, वी मार्ट, विशाल मेगा मार्ट, जिंदल, रैमंड, सियाराम, ऑनलाइन तथा प्यूमा कम्पनी के ऑर्डर मिल रहे हैं। संगम ग्रुप भी सीमलेस मशीनों से प्रति माह 7 से 8 लाख पीस तैयार कर रहा है। यह माल विदेशों के साथ स्थानीय बाजार में भी जा रहा है।

यूनिफॉर्म, काटॅन व फॉर्मल ड्रेस हो रही तैयार
इस समय भीलवाड़ा में रेडीमेड गारमेंट्स से सभी तरह के कपड़े तैयार हो रहे हैं। इसमें यूनिफॉर्म, कॉटन पेन्ट, फॉर्मल ड्रेस, टाउजर, मेडिकल यूनिफॉर्म, सर्जिकल मास्क, डेनिम (जींस) शामिल है। इसमें 5500 श्रमिक लगे हैं, जिनमें 1600 से 1700 महिलाएं हैं। ये उद्योग रीको ग्रोथ सेंटर, चित्तौड़गढ़ मार्ग, रीको फॉर्थ फेज, ईरास आदि जगह पर लगे हैं। रेडिमेड गारमेंट्स में काम आने वाली स्टेचिंग मशीनें ताइवान व चीन की है। इनकी कीमत 40 हजार से 5 लाख तक है। इन मशीनों से कांच व बटन लगाने का काम होता है।

कुशल कारीगर चाहिए
वर्तमान में रेडिमेड गारमेंट्स के लिए कुशल कारीगरों की कमी है। हालांकि पहले हरणी महादेव में एक सेन्टर के माध्यम से युवक-युवतियों को प्रशिक्षण दिया जाता था। अब यह सेन्टर बंद हो गया। सुवाणा में सेन्टर चल रहा है, लेकिन कुशल कारीगर नहीं मिल पा रहे। भीलवाड़ा के गांधीनगर में लघु उद्योग महिला शाखा की ओर से सेन्टर शुरू किया, लेकिन वहां संख्या कम है। यहां कुशल कारीगर बढ़ने चाहिए।

पीछे छोड़ सकते हैं हम
केन्द्र व राज्य सरकार से जमीन, सस्ती बिजली, कुशल कारीगर के लिए ट्रेनिंग सेन्टर खोले तो आने वाले कुछ साल में ही भीलवाड़ा का रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग चीन व बांग्लादेश को भी मात दे सकता है। केवल भीलवाड़ा को रेडीमेड गारमेंट्स का कलस्टर बना दें। कई बड़े उद्योग भी रेडीमेड गारमेंट्स की ओर आना चाहते हैं क्योंकि कच्चा माल सबके पास उपलब्ध है।
गणेश मालू, सचिव, गारमेंट्स मैन्युफैक्चर्स सोसायटी भीलवाड़ा

फैक्ट फाइल
5000 स्टेचिंग मशीन
5500 कुश कारीगर
1600 महिला श्रमिक
17-18 लाख पीस प्रति माह उत्पादन
50 करोड़ का मासिक टर्नओवर

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