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Wednesday 10 January 2024 03:29 AM UTC+00 पाली शहर में सीवरेज की लाइन बिछाने के बाद से ही सीवरेज लाइन के चॉक होने से सड़कों पर गंदा पानी बहने की समस्या है। सीवरेज के मैनहॉल की सफाई करना भी परेशानी का सबब है। इससे अब राहत मिलने वाली है। यह होगा सीवरेज की सफाई करने वाले रोबोट से। पाली नगर परिषद को स्वायत्त शासन विभाग की ओर से दो रोबोट आवंटित किए गए है। यह रोबोट उच्चतम न्यायालय के आदेशों के तहत स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत किया गया है। इन रोबोट का संचालन व संधारण सम्बिन्धत फर्म की ओर से किया जाएगा। इस एक रोबोट की लागत करीब 40 लाख रुपए बताई जा रही है। सफाई करते हो चुके हैं हादसे सीवरेज के मैनहॉल की सफाई करने के लिए कार्मिकों को उनमें उतारना मना है। इसके बावजूद सफाई के लिए कई बार कार्मिक उतर जाते हैं। पाली में कुछ समय पहले एक सीवरेज हॉल की सफाई करते समय कार्मिकों मौत भी हो चुकी है। ऐसे में सीवरेज मैन हॉल की सफाई अब रोबोट से होने पर हृदय विदारक घटना होने की आशंका नहीं रहेगी। राजसमंद व भादरा ने नहीं लिए रोबोट स्वायत्त शासन विभाग की ओर से राजसमंद नगर परिषद और नगर पालिका भादरा को रोबोट आवंटित किए गए थे। इन दोनों नगर निकायों की ओर से एक-एक रोबोट की आवश्यकता नहीं होना बताया गया। इस पर स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक हृदेश कुमार शर्मा की ओर से ये दोनों रोबोट पाली नगर परिषद को आवंटित कर दिए गए हैं। इस तरह करेगा रोबोट करेगा सफाई - मैनहॉल के ऊपर रोबोट को खड़ा किया जाएगा। - ऑपरेटिंग के दौरान इसकी कार्बन फाइबर पाइप मैन सीवरेज के अंदर जाएगी। - पाइप के आगे बाल्टीनुमा हाथ मैनहॉल से कचरा उठाएगा व बाहर लाएगा। सीवरेज लाइन की सफाई में मिलेगी सहायता सीवरेज लाइनों के मैन हॉल की सफाई करने में रोबोट से सहायता मिलेगी। सफाई भी बेहतर तरीके से हो सकेगी। स्वच्छता भी बेहतर होगी। अशोक कुमार विश्नोई, एसडीएम, पाली पाली में इतनी लम्बी सीवर लाइन 448 किमी लम्बी है सीवरेज लाइन 15000 चैम्बर लगे है पाली शहर में सीवरेज लाइन पर |
Wednesday 10 January 2024 03:56 AM UTC+00 खेती करने के लिए मिट्टी सबसे महत्वपूर्ण है। मिट्टी उपजाऊ होने पर फसल अच्छी होती है। मिट्टी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों की किसानों को पहले ही जानकारी होने पर वे उसी के अनुसार फसल का चयन कर बुवाई करते हैं। इसके लिए अभी तक किसानों को जिला मुख्यालय पर मिट्टी के सैम्पल भेजने पड़ते रहे हैं। अब जिले की छह पंचायत समिति मुख्यालय पर किसान मिट्टी का परीक्षण करवा सकेंगे। वहां पर लगने वाले मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं का संचालन युवा या संस्था की ओर से किया जाएगा। इनको कृषि विभाग की ओर से एक लाख पचास हजार रुपए की सहायता मिलेगी। यहां लगाई जानी है प्रयोगशाला वर्तमान में जिले की 10 पंचायत समितियों में से 4 पंचायत समितियों पर मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं। जबकि रोहट, मारवाड़ जंक्शन, रानी, सुमेरपुर, रायपुर व देसूरी पर वर्ष 2023-24 में केन्द्रीय प्रवर्तित योजना आरकेवीवाई-सॉयल हेल्थ एण्ड फर्टिलिटी तहत 1-1 वीएलएसटीएल प्रयोगशाला स्थापित करना तय किया गया है। परीक्षण की क्षमता 3000 मिट्टी के नमूने वीएलएसटीएल की क्षमता करीब 3000 नमूने प्रतिवर्ष होगी। नमूना विश्लेषण की कीमत 300 रुपए प्रति नमूना योजना के तहत वहन की जाएगी। यदि 3000 नमूनों के अलावा 500 नमूने अतिरिक्त जांच के लिए देने पर ग्राम स्तरीय उद्यमी को 500 नमूनों के लिए 20 रुपए प्रति नमूना प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके बाद अतिरिक्त नमूनों की जांच पर राज्य सरकार की ओर से तय शुल्क 5 रुपए प्रति नमूना करनी होगी। इस तरह कर सकते हैं आवेदन इस योजना के तहत प्रयोगशाला के लिए आवेदन 15 जनवरी तक किया जा सकता है। आवेदन पत्र संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) जिला परिषद से आवेदन प्राप्त कर सकते हैं। उन आवेदनों से जिला स्तरीय कार्यकारिणी समिति की ओर से स्क्रीनिंग करते हुए प्रत्येक पंचायत समिति के लिए 1-1 प्रस्ताव राज्य स्तरीय क्रियान्वयन समिति की ओर से कृषि आयुक्तालय को भेजे जाएंगे। यह होनी चाहिए योग्यता 1. ग्राम स्तरीय उद्यमी के लिए पात्र व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष से कम एवं 27 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। वह 10वीं विज्ञान उत्तीर्ण एवं कम्प्यूटर का ज्ञान रखने वाला होना चाहिए। प्रयोगशाला के लिए स्वयं सहायता समूह, कृषक उत्पादक समूह, प्राथमिक कृषि साख समिति का भी नामांकन किया जा सकता है। 2. अभ्यर्थी/ उद्यमी समूह का स्वयं का भवन अथवा किराए का भवन (कम से कम 4 वर्ष की लीज एग्रीमेंट) होना चाहिए। इतनी दी जाएगी सहायता 1. वीएलएसटीएल की स्थापना के लिए योजना के तहत 1.50 लाख रुपए की एक-बारगी सहायता आवेदन के अनुमोदन होने के बाद भारत सरकार से बजट उपलब्ध होने के बाद दी जाएगी। 2.उद्यमी को राशि प्राप्ति के 15 दिवस के अंदर प्रयोगशाला उपकरणों, उपभोग्य सामग्री आदि के क्रय किए जाने की रसीद जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति को उपलब्ध करानी होगी। इनका कहना है मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला पंचायत समिति मुख्यालयों पर लगने से किसानों को लाभ होगा। युवाओं को रोजगार का अवसर भी मिलेगा। ओमप्रकाश शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विस्तार, पाली |
Wednesday 10 January 2024 04:12 AM UTC+00 अयोध्या में करीब 500 साल के बाद दशरथ नंदन भगवान राम मंदिर में विराजमान होने वाले हैं। इससे अयोध्या का रूप तो बदला ही है, उसके साथ ही देश-विदेश में रहने वाले हर राम भक्त और शहरों गांवों का रूप भी बदल रहा है। देश के हर कोने में रहने वालों को ऐसा लगा रहा है, मानो त्रेता युग की तरह फिर रामराज लौट रहा है। प्रतिष्ठा महोत्सव के कारण लोगों के सम्बोधन करने का तरीका भी बदल गया है। आपस में मिलने पर लोगों के मुंह से पहला शब्द जयश्री राम या राम-राम सा हो गया है। घरों में भी सुबह व शाम को मोबाइल व स्पीकर पर बजने वाले भजनों में भगवान राम की भक्ति के भजन अधिक पसंद किए जाने लगे हैं। सोशल मीडिया पर प्रभु राम सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर अभी रील में भी भगवान राम के भजन, अयोध्या से जुड़ी जानकारी, राम मंदिर निर्माण ही ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया को खोलते ही युग राम राज का आ गया..., जय हनुमंत संत हितकारी..., मिथला का कण-कण खिला..., मेरे राम आएंगे मां सीता संग आएंगे..., जय श्री राम जय श्री राम..., जिनका घर हो अयोध्या जैसा... जैसे गीत ही ट्रेंड कर रहे हैं। संतों के प्रवचन में भी राम अयोध्या में राम मंदिर प्रतिष्ठा को लेकर सोशल मीडिया पर आने वाले संतों के प्रवचनों का भी मुख्य विषय प्रभु राम हो गया है। संत चाहे सनातन धर्म के हो या जैन धर्म के, उनसे लोग सवाल भगवान राम और अयोध्या को लेकर ही पूछ रहे है। यहां तक कि अन्य धर्म के लोगों से बातचीत में भी सोशल प्लेटफार्म आदि पर भगवान राम के मंदिर से जुड़ी सामग्री को ही महत्व मिल रहा है। सजावट को लेकर भी उत्साह भगवान राम मंदिर प्रतिष्ठा के दिन को मनाने और प्रभु के आगमन की खुशी में घर सजाने को लेकर भी हर कोई लालायित है। इसके लिए लोगों ने दिवाली की तरह रोशनी करने का मन बना रखा है। कई लोगों ने दिवाली की तरह सजावट के लिए रंग-बिरंगी लाइटों की खरीद की है और कर रहे हैं तो कई लोगों ने दिवाली पर लाइटों की सार-संभाल कर तैयार कर लिया है। दीप तो हर घर में लेंगे। |
Wednesday 10 January 2024 04:12 AM UTC+00 अयोध्या में करीब 500 साल के बाद दशरथ नंदन भगवान राम मंदिर में विराजमान होने वाले हैं। इससे अयोध्या का रूप तो बदला ही है, उसके साथ ही देश-विदेश में रहने वाले हर राम भक्त और शहरों गांवों का रूप भी बदल रहा है। देश के हर कोने में रहने वालों को ऐसा लगा रहा है, मानो त्रेता युग की तरह फिर रामराज लौट रहा है। प्रतिष्ठा महोत्सव के कारण लोगों के सम्बोधन करने का तरीका भी बदल गया है। आपस में मिलने पर लोगों के मुंह से पहला शब्द जयश्री राम या राम-राम सा हो गया है। घरों में भी सुबह व शाम को मोबाइल व स्पीकर पर बजने वाले भजनों में भगवान राम की भक्ति के भजन अधिक पसंद किए जाने लगे हैं। सोशल मीडिया पर प्रभु राम सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर अभी रील में भी भगवान राम के भजन, अयोध्या से जुड़ी जानकारी, राम मंदिर निर्माण ही ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया को खोलते ही युग राम राज का आ गया..., जय हनुमंत संत हितकारी..., मिथला का कण-कण खिला..., मेरे राम आएंगे मां सीता संग आएंगे..., जय श्री राम जय श्री राम..., जिनका घर हो अयोध्या जैसा... जैसे गीत ही ट्रेंड कर रहे हैं। संतों के प्रवचन में भी राम अयोध्या में राम मंदिर प्रतिष्ठा को लेकर सोशल मीडिया पर आने वाले संतों के प्रवचनों का भी मुख्य विषय प्रभु राम हो गया है। संत चाहे सनातन धर्म के हो या जैन धर्म के, उनसे लोग सवाल भगवान राम और अयोध्या को लेकर ही पूछ रहे है। यहां तक कि अन्य धर्म के लोगों से बातचीत में भी सोशल प्लेटफार्म आदि पर भगवान राम के मंदिर से जुड़ी सामग्री को ही महत्व मिल रहा है। सजावट को लेकर भी उत्साह भगवान राम मंदिर प्रतिष्ठा के दिन को मनाने और प्रभु के आगमन की खुशी में घर सजाने को लेकर भी हर कोई लालायित है। इसके लिए लोगों ने दिवाली की तरह रोशनी करने का मन बना रखा है। कई लोगों ने दिवाली की तरह सजावट के लिए रंग-बिरंगी लाइटों की खरीद की है और कर रहे हैं तो कई लोगों ने दिवाली पर लाइटों की सार-संभाल कर तैयार कर लिया है। दीप तो हर घर में लेंगे। |
Wednesday 10 January 2024 11:38 AM UTC+00 Pali News : पाली शहर में सीवरेज की लाइन बिछाने के बाद से ही सीवरेज लाइन के चॉक होने से सड़कों पर गंदा पानी बहने की समस्या है। सीवरेज के मैनहॉल की सफाई करना भी परेशानी का सबब है। इससे अब राहत मिलने वाली है। पाली नगर परिषद को स्वायत्त शासन विभाग की ओर से दो रोबोट आवंटित किए गए है। यह रोबोट उच्चतम न्यायालय के आदेशों के तहत स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत किया गया है। इन रोबोट का संचालन व संधारण सम्बिन्धत फर्म की ओर से किया जाएगा। इस एक रोबोट की लागत करीब 40 लाख रुपए बताई जा रही है। इस तरह करेगा रोबोट करेगा सफाई ● मैनहॉल के ऊपर रोबोट को खड़ा किया जाएगा। ● ऑपरेटिंग के दौरान इसकी कार्बन फाइबर पाइप मैन सीवरेज के अंदर जाएगी। ● पाइप के आगे बाल्टीनुमा हाथ मैनहॉल से कचरा उठाएगा व बाहर लाएगा। पाली में इतनी लम्बी सीवर लाइन ● 448 किमी लम्बी है सीवरेज लाइन ● 15000 चैम्बर लगे है पाली शहर में सीवरेज लाइन पर यह भी पढ़ें : स्वास्थ्य कल्याण केन्द्र : तय समय में नाम बदल पाए ना रंग, जिम्मेदार नहीं है गंभीर सफाई करते हो चुके हैं हादसे सीवरेज के मैनहॉल की सफाई करने के लिए कार्मिकों को उनमें उतारना मना है। इसके बावजूद सफाई के लिए कई बार कार्मिक उतर जाते हैं। पाली में कुछ समय पहले एक सीवरेज हॉल की सफाई करते समय कार्मिकों मौत भी हो चुकी है। ऐसे में सीवरेज मैन हॉल की सफाई अब रोबोट से होने पर हृदय विदारक घटना होने की आशंका नहीं रहेगी। राजसमंद व भादरा ने नहीं लिए रोबोट स्वायत्त शासन विभाग की ओर से राजसमंद नगर परिषद और नगर पालिका भादरा को रोबोट आवंटित किए गए थे। इन दोनों नगर निकायों की ओर से एक-एक रोबोट की आवश्यकता नहीं होना बताया गया। इस पर स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक हृदेश कुमार शर्मा की ओर से ये दोनों रोबोट पाली नगर परिषद को आवंटित कर दिए गए हैं। सफाई में सहायता सीवरेज लाइनों के मैन हॉल की सफाई करने में रोबोट से सहायता मिलेगी। सफाई भी बेहतर तरीके से हो सकेगी। स्वच्छता भी बेहतर होगी। अशोक कुमार विश्नोई, एसडीएम व आयुक्त नगर परिषद, पाली |
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