>>: प्रदेश की सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 1.24 लाख पद खाली

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तबादला नीति, डीपीसी, सेटअप परिवर्तन की कमी से चरमराई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी कोढ़ में खाज बनती जा रही है। अंदाजा यूं लगा सकते हैं कि प्रदेश की 19..स्कूलों में वर्तमान में शिक्षकों के 1.24 लाख पद खाली चल रहे हैं। जिनमें 14 हजार 195 पद उन व्याख्याताओं के शामिल है, जिन पर बोर्ड कक्षाओं का जिम्मा होता है। इनमें भी यदि पिछले पांच सालों में क्रमोन्नत हुई स्कूलों के करीब 17 हजार पद और जोड़ दें तो स्कूलों में आवश्यक व्याख्याताओं की संख्या 31 हजार से ज्यादा है। इसी तरह थर्ड ग्रेड शिक्षकों के 34 हजार 232 व सैकंड ग्रेड शिक्षकों के भी 33961 पद प्रदेशभर की स्कूलों में खाली चल रहे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी स्कूलों की हालत किस कदर खस्ता है।

बोर्ड कक्षाएं हुई प्रभावित

शिक्षकों की कमी का खामियाजा सबसे ज्यादा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि प्रदेश में व्याख्याताओं व सैकंड ग्रेड शिक्षकों के 66 हजार से ज्यादा पद खाली होने से कक्षा 10 व 12 दोनों के विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। हालात ये हैं कि एक दशक में क्रमोन्नत स्कूलों में अनिवार्य हिंदी और अंग्रेज़ी के तो व्याख्याता के पद ही अब तक सृजित नहीं किए गए हैं। ऐसे में कोर्स पूरा करवाने के लिए कई स्कूलों को मजबूरन बीएड इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थियों तक का सहारा लेना पड़ रहा है।

यूं बिगड़ी सरकारी स्कूलों की सेहत

शिक्षकों के खाली पदों के अलावा सरकारी स्कूलों की सेहत समय पर तबादला, पदोन्नति , सेटअप परिवर्तन व स्टाफिंग पैटर्न लागू नहीं होने से भी बिगड़ गई है। प्रदेश में पिछले तीन साल से वरिष्ठ शिक्षकों व व्याख्याताओं की पदोन्नति नहीं हो पाई है। तबादला नीति का ड्राफ्ट भी एक दशक से ज्यादा से अटका हुआ है। सेटअप परिवर्तन 2019 तो स्टाफिंग पैटर्न 2016 के बाद से नहीं हुआ है।

ये पद है खाली

प्रधानाचार्य: 6331

उपप्रधानाचार्य: 11939

व्याख्याता: 14195 (वित्तीय स्वीकृति का इंतजार: 17 हजार)

सैकंड ग्रेड शिक्षक: 33961

एल-2 शिक्षक: 16529

एल-1 शिक्षक: 17723

शारीरिक शिक्षक: 3822

लैब तकनीशियन: 1164

पुस्तकालय अध्यक्ष: 1809

इनका कहना है:-

पिछले एक दशक में क्रमोन्नत स्कूलों में अनिवार्य हिंदी और अंग्रेज़ी के व्याख्याता के पद ही सृजित नहीं किए गए हैं। पिछले तीन वर्ष में क्रमोन्नत 6 हज़ार स्कूलों में व्याख्याताओं के पद सृजित कर दिए , लेकिन वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं की गई। शैक्षिक गुणवत्ता की बात तो की जाती है लेकिन धरातल पर कार्य नहीं होने पर बच्चों का अध्ययन बाधित हो रहा है। सरकार को सभी मुद्दों पर बच्चों के हित में अविलम्ब फ़ैसले लेने चाहिए।

उपेन्द्र शर्मा प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ ( शेखावत)

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