>>: विशेष शिक्षा में नई ​शिक्षा नीति के तहत बदलेगा खाका, नए कॉलेजों को नहीं मिलेगा डिप्लोमा पाठ्यक्रम

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नई शिक्षा नीति के तहत देश में अब विशेष शिक्षा का खाका बदलेगा। भारतीय पुनर्वास परिषद ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। भारतीय पुनर्वास की ओर से अब नई शिक्षा नीति के तहत देशभर में नए डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को मान्यता नहीं दी जाएगी। हालांकि पहले से संचालित डिप्लोमा पाठ्यक्रम पहले की तरह संचालित रहेंगे। लेकिन इनकी मान्यता की अवधि समाप्त होने पर दुबारा परिषद की ओर से सम्बद्धता नहीं दी जाएगी। वहीं अब तक विशेष शिक्षा में भी बीएड पाठ्यक्रम की अवधि दो साल की है। नए सत्र से बीएड पाठ्यक्रम को भी चार साल का करने का प्रस्ताव तैयार हुआ है। परिषद ने भविष्य में नए कॉलेजों को चार साल के पाठ्यक्रम के हिसाब से ही मान्यता देने की बात कही है। पिछले दिनों हुई परिषद की बैठक में इन प्रस्तावों पर मुहर लगी है। इसमें बताया गया कि कई राज्य सरकारों ने नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षक के लिए भी योग्यता बीएड करने की तैयारी कर ली है। ऐसे में डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के नए कॉलेज संचालित नहीं करने का फैसला लिया है।

राजस्थान, उत्तरप्रदेश और हरियाणा में सबसे ज्यादा कॉलेज
राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश व गुजरात सहित अन्य राज्यों में विशेष शिक्षकों की लगातार भर्ती होने की वजह से यहां डिप्लोमा पाठ्यक्रमों का सबसे ज्यादा क्रेज रहा। इसलिए इन राज्यों में सबसे ज्यादा डिप्लोमा पाठ्यक्रम के काॅलेज खुले। पिछले साल इन राज्यों में लगातार एनओसी जारी करने की वजह से परिषद ने भविष्य में एनओसी नहीं जारी करने की हिदायत भी दी थी।

नवाचार भी: प्रदेश में दस हजार सामान्य शिक्षकों को भी प्रशिक्षण
देशभर में दिव्यांग विद्यार्थियों के मुकाबले शिक्षकों की कमी है। ऐसे में नई शिक्षा नीति में सामान्य शिक्षकों को भी प्रशिक्षण देने की तैयारी है। इस नवाचार की शुरूआत भी राजस्थान इस साल से करेगा। प्रदेश में इस साल दस हजार सामान्य शिक्षकों को दिव्यांग विद्यार्थियों को पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन सामान्य शिक्षकों को जल्द विशेष शिक्षकों की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा।

फायदा:
1. विशेष शिक्षा में डिप्लोमा करने वाले विद्यार्थियों को अब अलग से स्नातक करने की आवश्यक नहीं रहेगी। ऐसे में अब विद्यार्थियों को दक्ष विशेष शिक्षक मिल सकेंगे।
2. चार साल तक विशेष शिक्षा की पढ़ाई करने से युवाओं की विषय पर मजबूत पकड़ होगी। अब तक उच्च शिक्षा में दिव्यांगों का आंकड़ा 50 फीसदी से कम है। माध्यमिक तक पढ़ाई बेहतर होने से उच्च शिक्षा का आंकड़ा भी सुधर सकेगा।

नुकसान:
1. सामान्य शिक्षा के कई युवा अब तक डिप्लोमा के जरिए विशेष शिक्षा में भी कॅरियर की राहें तलाश रहे थे। लेकिन कोर्स की
अवधि बढ़ने से ऐसे युवाओं को नुकसान होगा।
2. समावेशी शिक्षा के जरिए विशेष शिक्षकों के पदों में भविष्य में कटौती होने की संभावना।

एक्सपर्ट व्यू...
नई शिक्षा नीति के तहत सभी पाठ्यक्रमों के माॅड्यूल में बदलाव आएगा। इसी के तहत अब आरसीआई ने भविष्य में नए डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को मान्यता नहीं देने का फैसला किया है। वहीं बीएड भी अब चार साल की होगी। ऐसे में जो युवा विशेष शिक्षा के कॅरियर बनाना चाहेंगे उनको अब फैसला कक्षा दसवीं के बाद ही लेना पड़ेगा।
सुदीप गोयल, सामाजिक कार्यकर्ता, सीकर

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