>>: अब ईआरसीपी के बाद डब्ल्यूआरसीपी को पंख लगाने की तैयारी, पढ़े खबर...

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अभिषेक सिंघल/जोधपुर। ईआरसीपी की तर्ज पर अब सरकार पश्चिमी राजस्थान को भी पानी की सौगात देने के लिए डल्यूआरसीपी के काम में तेजी ला रही है। पश्चिमी राजस्थान के इस सबसे बड़े प्रोजेक्ट को पटरी पर लाने के लिए जल संसाधन विभाग ने तैयारी करनी शुरू कर दी है। इसके लिए माही बेसिन से लूणी बेसिन जालोर जिले तक माही का सरप्लस पानी लाने की योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा। इसके लिए वेपकोस को प्रि-फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने के काम को जल्द पूरा करने के लिए कहा गया है।

क्या है डब्ल्यूआरसीपी
पूर्वी राजस्थान के लिए जिस प्रकार से केनाल के जरिये पानी लाया जा रहा है। उसी प्रकार से पश्चिमी राजस्थान के लिए यह प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण है। करीब 35 साल पहले इसकी अवधारण बनी थी। लेकिन हर बार विवादों में रहने के कारण यह फाइलों से बाहर नहीं आ पाई। इसमें माही बेसिन के सरप्लस पानी को पश्चिमी राजस्थान तक लाना है। इससे जालोर व बाड़मेर जिले के गांवों में पेयजल के साथ ही सवा दो लाख हैक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा। इस प्रोजेक्ट को अगले चरण में पाली व जोधपुर जिले के साथ ही पश्चिमी राजस्थान के अन्य जरूरत वाले क्षेत्रों तक विस्तार भी किया जा सकता है। सरप्लस पानी को राजस्थान लाने के लिए वेपकोस की रिपोर्ट आने के बाद विस्तार से योजना तैयार की जाएगी। करीब 350 किमी लम्बी इस परियोजना में आधे से ज्यादा दूरी तक पानी टनल के जरिये लाया जाएगा।

हाईकोर्ट ने भी दिए थे निर्देश
राजस्थान किसान संघर्ष समिति बनाम राज्य सरकार व अन्य पीआईएल में उच्च न्यायालय ने 18 नवम्बर 2022 को प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने को कहा था।

पिछले साल के बजट में की थी डीपीआर की घोषणा
पिछली कांग्रेस सरकार ने इसे 2023-24 के बजट में डब्ल्यूआरसीपी की डीपीआर तैयार कराने की घोषणा की थी। जल संसाधन विभाग जोधपुर की ओर से वेपकोस को इसके कार्यादेश जारी किए गए। वेपकोस को फिजीबिलिटी रिपोर्ट का काम 16 अक्टूबर तक पूरा करना था। कई महीनों तक इस पर कोई काम नहीं हुआ। अब राजस्थान, गुजरात व केन्द्र तीनों ही जगह भाजपा की सरकार है। जल संसाधन विभाग ने हाल ही में वेपकोस को पत्र लिख कर जल्द से जल्द कार्य को पूरा करने के लिए कहा है। वेपकोप को 45 दिन में यह काम करना है। लेकिन इसको करने में 90 दिन का समय भी लग सकता है।

गुजरात को लेना होगा साथ
1966 में गुजरात व राजस्थान के बीच माही जल बंटवारे का समझौता हुआ था। इसके तहत माही बेसिन के सरप्लस पानी को जालोर-बाड़मेर लाया जाना है। फिजिबिलिटी रिपोर्ट आने के बाद राजस्थान को इसके लिए गुजरात से समन्वयक भी करना होगा। हालही में मध्यप्रदेश व हरियाणा के साथ हुए अलग-अलग एमओयू से उम्मीद बंधी है कि अब राज्य सरकार गुजरात सरकार के साथ मिलकर जल्द ही ठोस काम करेगी।

फैक्ट फाइल
- 2 राज्यों के बीच पानी का समझौता होने के बाद पूरा होगा डब्ल्यूआरसीपी प्रोजेक्ट
- 350 किमी लम्बी केनाल के जरिये पानी गुजरात से जालोर तक लाया जाएगा।
- 35 साल से चल रही कवायद।
- 26 लाख का खर्च रखा गया है प्रि-फिजिबिलिटी रिपोर्ट के लिए

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