>>: Digest for March 12, 2024

>>

Patrika - A Hindi news portal brings latest news, headlines in hindi from India, world, business, politics, sports and entertainment!

You are receiving a digest because your subscriptions have exceeded your account's daily email quota. Your quota has automatically reset itself.

Table of Contents

मधुसूदन शर्मा

Forest Guard Recruitment: वनरक्षक सीधी भर्ती परीक्षा 2020 का विवाद अभी तक नहीं सुलझ पाया है। ऐसे में प्रदेश के हजारों युवा आज भी नौकरी की आस लगाए बैठे हैं। चार साल से चल रही प्रक्रिया में बार-बार विज्ञप्तियों में संशोधन, एक्स सर्विस मैन के आरक्षण के कारण यह भर्ती विवादों में है। इस पर युवाओं ने न्यायालय की शरण ली। हालांकि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से कुछ अभ्यर्थियों के परिणाम तो जारी कर दिए गए, लेकिन कुछ मामले ऐसे रहे जिनके कारण परिणाम जारी नहीं हो सके। इन विवादों के चलते मामला लंबित रह गया। लेकिन न्यायालय की ओर से परिणाम जारी करने का मामला आचार संहिता लगने से पूर्व निपटाने के आसार हैं। वहीं, वनरक्षक अभ्यर्थी छोटूराम गोदारा, रामकिशोर ईनाणिया, राहुल पंडित आदि ने भर्ती का परिणाम जल्द जारी करने की मांग की है।

यूं समझें भर्ती का गणित

- वनरक्षक भर्ती की प्रथम विज्ञप्ति 11 नवंबर 2020 को आई।

- इसमें कुल 1041 पद थे। एक्स सर्विसमैन के 292 पद थे।

- एक्स सर्विसमैन को कुल भर्ती का 12.5 प्रतिशत आरक्षण दिया था।

- 7 दिसंबर 2020 को कर्मचारी चयन बोर्ड ने नोटिफिकेशन जारी किया।

- इसमें वनरक्षक भर्ती के लिए एक्स सर्विसमैन का आरक्षण कुल 33 प्रतिशत रखा।

- 11 मार्च 2022 को दूसरी विज्ञप्ति जारी की गई।

- इसमें कुल 2300 पद आए।

- इसमें 33 प्रतिशत के रिजर्वेशन के अनुसार 692 पद एक्स सर्विस मैन के रखे गए।

पूर्व की सरकार ने समायोजित करने के आदेश निकाले

7 दिसंबर, 2022 को एक्स सर्विसमैन का पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने होरिजेंटल रिजर्वेशन चेंज कर दिया और एक्स सर्विसमैन को अपनी-अपनी कैटेगरी में ही समायोजित करने का आदेश निकाला। इसमें लिखा कि 7 दिसंबर, 2022 के बाद जो भी विज्ञप्ति आती है उसमें एक्स सर्विसमैन के लिए यह नया नियम लागू होगा।

फिर निकाली संशोधित विज्ञप्ति

सरकार के आदेश जारी किए जाने के बाद वनरक्षक की पूर्ण संशोधित विज्ञप्ति 21 दिसंबर, 2022 को निकाली गई। इसमें कुल पद 2646 हो गए। एक्स सर्विसमैन के 33 प्रतिशत आरक्षण के अनुसार 722 पद हो गए।

कर्मचारी चयन बोर्ड ने लगा दिया पुराने वाला नियम

जब भर्ती का परिणाम निकालने की बारी आई तो कर्मचारी चयन बोर्ड ने पहली विज्ञप्ति के अनुसार एक्स सर्विसमैन से संबंधित पुराना वाला ही होरिजेंटल रूल लगा दिया, जबकि आयु और पदों की गणना जारी की गई तीसरी विज्ञप्ति के अनुसार की जानी थी। रिजल्ट में भी एक्स सर्विसमैन से संबंधित नए वाले नियम को लागू करना चाहिए था। क्योंकि इसकी संशोधित विज्ञप्ति उस नियम के बाद आई थी। बोर्ड ने इस भर्ती में नया नियम नहीं लगाया और जल्दबाजी में 1710 पदों पर 6 दिसंबर 2023 को परिणाम जारी किया।

यह निकला परिणाम

परिणाम जारी होने के बाद सामने आया कि ओबीसी पुरुषों की 175 सीट होते हुए भी एक सीट नहीं दी। सारी सीट एक्स सर्विसमैन के लिए रिजर्व रख दी। जनरल पुरुष में भी 654 सीट होते हुए मात्र 150 सीट सिविल को दी। शेष 504 सीट एक्स सर्विसमैन के लिए आरक्षित रख दी। इस भर्ती में एक्स सर्विसमैन की 722 सीटों में से 679 सीट जनरल पुरुष और ओबीसी पुरुष से ले ली गई, जिससे ओबीसी पुरुष और जनरल पुरुष की अच्छी रैंक होते हुए भी इनका फाइनल सलेक्शन नहीं हो सका।

इनका कहना है

वनरक्षक भर्ती परीक्षा में एक्स सर्विस मैन के करीब सात सौ लोगों की भर्ती को लेकर न्यायालय में याचिका दायर की हुई है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। कोर्ट के अलावा जो प्रकरण बचे हैं, कोशिश की जा रही है कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता से पहले मामले का निस्तारण कर दिया जाए। कोर्ट में विचाराधीन मामले पर निर्णय आने के बाद ही विचार किया जाएगा।

आलोक राज, अध्यक्ष, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड

ISO certificate:रोजगार की चाह पाले युवाओं के लिए खुश खबरी है। न केवल अपने ही देश में बल्कि विदेशों में इन युवाओं को नौकरी के अवसर मिल सकेंगे। ऐसी ही उपलिब्ध महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेज डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय ने हासिल की है। यहां चल रही हाइटेक प्रयोगशालाओं को हाल ही में आईएसओ प्रमाण पत्र जारी किया गया है।

जानकारी के अनुसार इस महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों को बेहतर तकनीक और प्रौद्योगिकी के हिसाब से अध्ययन कराया जा रहा है। यहां उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग कर विद्यार्थियो को परम्परागत एवं डिजिटल एवं ऑनलाइन तरीके से शिक्षा प्रदान की जा रही है। डिजिटल एवं ऑनलाइन शिक्षा को ध्यान में रखकर लगातार लैब अपडेट कर उन्हे तकनीक से जोड़ा गया। इन सुसज्जित लैब से यहां अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को अच्छा लाभ मिला है। इसी कारण कॉलेज का ये प्रमाण पत्र जारी किया गया है।

प्रयोगशालाओं को करते हैं अपडेट

महाविद्यालय के सहायक आचार्य एवं सहायक छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ कमलेश कुमार मीणा ने बताया की सभी प्रयोगशालाओं को समय-समय पर अपडेट किया जाता है। नई तकनीक एवं आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित प्रयोगशालाओं से विदयाथीZ अध्ययन कर रहे हैं। इन्ही लैब के माध्यम से इनको रोजगारोन्मुखी शिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यहां से निकले विद्यार्थी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्चतम पदों पर आसीन हैं। इस महाविद्यालय की प्रयोगशालाओं को आईएसओ प्रमाणीकरण के लिए प्रयास किए जा रहे थे। जिसे अब सफलता मिल गई है। इस कॉलेज का आईएसओ 9001 : 2015 प्रमाणीकरण हो गया है। गौरतलब है कि इस प्रमाणीकरण को हासिल करने में दुग्ध व खाद्य प्रौद्योगिकी की हैड डा. नीकिता वधावन का भी खूब सहयोग रहा है।

कॉलेज के विकास पर एक नजर

  • 1978 में राजस्थान कृषि महाविद्यालय से कॉलेज की शुरूआत। इसमें केवल बीएसएसी साइंस ही था।
  • 1982 में खुद को एक अलग कॉलेज के रूप में स्थापित किया।
  • 1999 से लेकर अब नए सब्जेक्ट व विषयों को जोड़ा गया।
  • 300 विद्याथीZ वर्तमान में कॉलेज में अध्ययनरत।

कई प्रकार की हाइटेक लैब यहां मौजूद

डेयरी टैक्नोलोजी, फूड टेक्नोलोजी, डेयरी केमिस्टी, फूड केमेस्ट्री, डेयरी इंजीनियरिंग, फूड इंजीनियरिंग, डेयरी माइक्रोबायालोजी, फूड मइक्रोबायोलोजी, आंवला प्रोसेसिंग यूनिट, टॉमेटो रिसर्च प्लांट यहां मौजूद हैं। इसके अलावा यहां पर डेयरी टेक्नोलॉजी में बीटेक, खाद्य प्रौद्योगिकी में बीटेक भी विद्यार्थियों को करवाया जाता है।

इनका कहना है

महाविद्यालय डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उच्चतम मापदंडों के अनुकूल शिक्षण एवं परामर्श प्रदान कर रहा है। यहां समयानुसार आने वाले तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी बदलावों से विद्यार्थियों को परिचित कराया जाता है। इसी की बदौलत कॉलेज को आईएसओ प्रमाण पत्र मिला है।

डॉ लोकेश गुप्ता, अधिष्ठाता, डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, उदयपुर

मधुसूदन शर्मा
food grains: राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है, जिसका क्षेत्रफल भारत के कुल क्षेत्रफल का 10.41 प्रतिशत है। यहां कृषि लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। राजस्थान में कृषि वर्षा आधारित है। बारिश की कमी से कृषि उत्पादन कर पाना किसानों के लिए चुनौतियां बना हुआ है। इसके बावजूद यहां खाद्यान उत्पादन में वृदि्ध दर्ज की गई है। ये बात महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय के छात्र नरेन्द्र यादव की ओर से किए आर्थिक सर्वेक्षण के अध्ययन में ये बात सामने आई। वर्ष 2022-23 में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों ने राजस्थान के सकल राज्य मूल्य में मौजूदा कीमतों पर (जीएसवीए) 28.95 प्रतिशत योगदान दिया है, जो 2011-12 में 28.56 प्रतिशत था। राजस्थान की लगभग 7 करोड़ आबादी में से 1 करोड़ 36 लाख खेतिहर किसान हैं, जो की 49 लाख श्रमिको को रोजगार प्रदान करते हैं। अध्ययन में सामने आया कि 2011-12 में राजस्थान में कुल खाद्यान्न उत्पादन 178.38 लाख टन था,जो 2022-23 में बढ़कर 253.99 लाख टन तक हो गया। अध्ययन करने वाले नरेन्द्र ने बताया कि इस अध्ययन में कृषि के क्षेत्र में वृदि्ध नजर आई है। जो की सुखद पहलू है। इसी कारण से कृषि के क्षेत्र में बजट भी बढ़ाया गया है।

9.71 प्रतिशत की वृदि्ध

वर्ष 2022-23 में राजस्थान राज्य में खाद्यान्न फसलों की अनुमानित बुआई का क्षेत्रफल 154.98 लाख हेक्टेयर था। जिसका अनुमानित उत्पादन 253.99 लाख टन रहा। पिछले वर्ष की तुलना में उत्पादन में 9.71 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी प्रकार तिलहन का बुआई क्षेत्र 63.77 लाख हेक्टेयर और उत्पादन 99.78 लाख टन है।

2011-12 में खाद्यान उत्पाद

  • 2011-12 में राजस्थान में कुल खाद्यान्न उत्पादन 178.38 लाख टन था
  • 2022-23 में 253.99 लाख टन तक खाद्यान्न उत्पादन बढ़ गया।

तिलहन उत्पादन

  • 2011-12 में 63.31 लाख टन था
  • 2022-23 में यह 99.78 लाख टन हो गया।

दालों का उत्पादन

  • 2011-12 में राजस्थान में दालों का उत्पादन 21.32 लाख टन था।
  • 2022-23 में यह 47.42 लाख टन तक पहुंच गया।

सिंचाई जल की कमी, फिर भी उत्पादक राज्य

राजस्थान में सिंचाई जल की कमी है। इसके बावजूद ये सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राजस्थान में पानी की कमी की समस्या से निजात पाने के लिए खेत तलाई, सूक्ष्म सिंचाई अनुदान का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

रोजगार के साधन उपलब्ध कराता है पशुपालन

पशुपालन कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करता है। ये ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहायक बनाता है, जिससे यह कृषि जीडीपी के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान देता है। 2012 की पशु जनगणना के अनुसार राजस्थान में 512.06 मिलियन पशु धन था। 2019 में हुई पशु जनगणना में यह संख्या 536.76 मिलियन तक पहुंच गई। पशुधन से प्राप्त दूध ग्रामीण क्षेत्रों में आय का नियमित स्रोत है। वर्ष 2020-21 में देश के दूध उत्पादन में राजस्थान राज्य का योगदान 27983 हजार टन के साथ 14.63 प्रतिशत रहा। 2014-15 में राजस्थान में दूध उत्पादन 16934 हजार टन था।

फलों और सब्जियों के उत्पादन में वृदि्ध

आर्थिक सर्वेक्षण के आधार किए अध्ययन में सामने आया कि वर्ष 2011-12 की तुलना में वर्ष 2021-22 में फलों और सब्जियों के क्षेत्रफल और उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुई है। लेकिन इस 10 साल की अवधि में मसालों की खेती का क्षेत्र कम हो गया है, लेकिन अधिक उपज देने वाली किस्मों के कारण उत्पादन में वृद्धि हुई है।

उदयपुर. जनजाति क्षेत्र के विकास, पलायन और पर्यावरण से जुड़े कई ज्वलंत सवालों का जवाब देने के लिए जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी शनिवार को राजस्थान पत्रिका कार्यालय में थे। पत्रिका टी-टॉक में राजस्थान पत्रिका उदयपुर संस्करण के संपादक अभिषेक श्रीवास्तव से हुई विशेष बातचीत में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, प्रशासनिक व्यवस्था, आदिवासी अंचल में मूलभूत सुविधाओं, सुगम परिवहन समेत तमाम मुद्दों पर अपनी बात रखी। आदिवासी अंचल से लोगों के पलायन की समस्या पर मंत्री खराड़ी ने कहा कि वनोपज को बाजार उपलब्ध कराएंगे, जिससे रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश...

babulal_kharadi.jpg
IMAGE CREDIT: राजस्थान पत्रिका

Q-गांवों तक रोडवेज बस की व्यवस्था नहीं है, स्थिति में सुधार कैसे होगा?
A-अभी तक जितनी रोडवेज बसें चल रही थीं, वह खटारा थीं। हमारी सरकार ने नई बसें खरीदी हैं, जो जल्द ही उपलब्ध होंगी। वसुंधरा सरकार ने ग्रामीण परिवहन बसें चलाई थी, जो गहलोत सरकार ने बंद कर दी। रोडवेज गांवों तक पहुंचे, सुरक्षित आवागमन हो, ऐसा प्रयास है। उदयपुर को भी जल्द ही नई बसें मिलने वाली हैं।

babulal_kharadi_bjp.jpg
IMAGE CREDIT: राजस्थान पत्रिका

Q-गांवों में शिक्षक, चिकित्सकों की कमी है, व्यवस्था कैसे सुधारेंगे?
A-जनजाति क्षेत्र में शिक्षकों की कमी के कारण शिक्षा का स्तर भी कमजोर रहता है। चिकित्सक और बाकी कार्मिकों की भी कमी है। सत्ता बदलती है तो कर्मचारी किसी न किसी के खास बन जाते हैं। कर्मचारी शहर के आसपास बहुत हैं, उन्हें गांवों में भेजने के लिए कहा है। गांवों में सुविधा के लिए सीएम से भी कहूंगा। साथ ही प्रयास करेंगे कि जो कर्मचारी गांवों का रुख करते हैं, उन्हें प्रोत्साहित किया जाए।

Q-ग्रामीण प्रतिभाएं कैसे आइएएस-आइपीएस बनेंगी?
A-जनजाति विकास विभाग सालों से काम कर रहा है, बजट भी खूब खर्च हुआ, लेकिन उतना विकास नहीं हुआ। विधानसभा में भी मुद्दा कई बार उठाया है। शिक्षा का जैसा माहौल बनना चाहिए, नहीं बन पाया। अभी तक हम सरकारी नौकरी तक ही सोच रहे थे। मैंने स्पष्ट किया कि जनजाति क्षेत्र से आइएएस-आइपीएस चाहता हूं, उसके लिए कॉचिंग कराइए। कॉचिंग पहले ही हो रही है तो परिणाम अच्छा क्यों नहीं? बताया कि जिस गुणवत्ता की कॉचिंग होनी चाहिए, वे विभागीय प्रक्रिया में नहीं आते, क्योंकि वे जितना खर्च मांगते हैं, उतना विभाग नहीं दे पाता है। मैंने तय किया है कि सीएसआर फंड से अच्छी कोङ्क्षचग कराएंगे। अच्छे कॉचिंग संस्थानों से पढ़ाई कराएंगे। एमओयू करके विज्ञप्ति जारी करेंगे। तय किया है कि 80 फीसदी से अधिक अंक वाले विद्यार्थियों को आइएएस, आइपीएस की कॉचिंग कराएंगे। एमओयू में भी शर्त रखी है कि परिणाम नहीं देने पर कॉचिंग सेंटर का भुगतान रोकेंगे। क्योंकि हमें सफल परिणाम चाहिए।

Q-गांवों में सुविधाएं पहुंचाने में फोरेस्ट एरिया बड़ी समस्या है, क्या करेंगे?
A-धारा 3 (1) जे के तहत प्रावधान है कि वन क्षेत्र में भी मूलभूल सुविधा दे सकते हैं। राज्यपाल की बैठक में भी यह बात रखी। प्रयास यही है कि सालों से बसे गांवों तक बिजली, सडक़ पहुंचे। जिला कलक्टर को भी कहा है कि जहां आरक्षित वन नहीं है, वहां जमीन के बदले जमीन देकर सुविधाएं पहुंचाई जा सकती है।

Q-टीएसपी क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए क्या रोडमैप तैयार किया है?
A-निश्चित तौर पर पलायन बड़ा मुद्दा है। स्थानीय क्षेत्र में रोजगार के संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण पलायन होना बड़ी समस्या है। वन उपज इकट्ठा करके, उसे उचित बाजार उपलब्ध कराएंगे। बांस, शहद, तेंदूपत्ता, सीताफल आदि कई तरह की सामग्री आय का जरिया बन सकती है। रोजगार यहीं मिले तो पलायन अपने-आप रुक जाएगा।

babulal.jpg
IMAGE CREDIT: राजस्थान पत्रिका

Q-हमारे यहां प्रोसेङ्क्षसग यूनिट नहीं होने से सीताफल भी बाहर से आते हैं, यहां बढ़ावा देने के लिए क्या करेंगे?
A-हमारे जंगलों में सीताफल जैसे प्राकृतिक उत्पाद भी बहुतायत में होते हैं। पैदावार की कोई कमी नहीं है। औद्योगिक विकास विभाग से जमीन की बात हुई है। रिको क्षेत्र विकसित करने का प्रयास है, लेकिन जमीन नहीं मिल रही है। कोई व्यक्ति जमीन देने को तैयार है तो उचित मुआवजा देने की बात भी चल रही है।

Q-मौताणे की वजह से कई परिवार पलायन कर जाते हैं, पुनर्वास के लिए क्या करेंगे?
A-जातिगत झगड़े की वजह से ऐसा होता है। समझाइश करके वापस बसाएंगे। कई बार पहल नहीं करते और कुछ मामले राजनीतिक सपोर्ट की वजह से नहीं सुलझ पाते। मांडवा में भी ऐसा मामला है। मैंने आइजी से पुनर्वास कराने के लिए कहा। जो घटना है, उसकी नियमानुसार सजा मिले, लेकिन परिवार बसे।

Q राजस्थान-गुजरात बॉर्डर पर जमीन के हक का विवाद है, समाधान कैसे होगा?
A-बरसात में फसल और जमीन पर हक के लिए मरने-मारने को उतारू हो जाते हैं। मैंने पहले भी दोनों राज्यों की सरकारों से सवाल किए हैं। दोनों राज्यों का सीमांकन तो पहले हो गया। ठीक करने के दो ही तरीके हैं। जो जहां बैठा है, वहीं रह जाए, जमीन का आदान-प्रदान कर ले या एक-दूसरे को सहयोग करे।

खराड़ी ने गिनाई अपनी 5 प्राथमिकताएं

  1. जनजाति क्षेत्र के हॉस्टल में सुविधा नहीं होने से बच्चे बेमन से रहते हैं, जिससे पढाई नहीं कर पाते हैं। रहने, खानपान की बेहतर सुविधाएं मिले।
  2. हॉस्टल में बच्चों के लिए आने वाली विभिन्न तरह की सामग्री, जिस गोदाम से आ रही है, वहां सीसीटीवी कैमरे लगेंगे, जिससे सामग्री पर निगरानी रहेगी।
  3. जिन हॉस्टल में बालिकाएं रहती है, वहां भी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, क्योंकि बालिकाओं का जीवन संवेदनशील होता है, सुरक्षित रहे।
  4. जनजाति क्षेत्र के कई गांवों में आज भी बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उस स्तर पर नहीं हो पाई, जितनी होनी चाहिए थी। सुविधाएं देने का प्रयास।
  5. जनजाति क्षेत्र में किसानों के पास छोटी जोत की खेती है। सोलर से बिजली उपलब्ध कराकर सालभर फसल उत्पादन करने योग्य बनाएंगे।

उदयपुर नगर निगम गैराज समिति की बैठक सोमवार को अध्यक्ष मनोहर चौधरी की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान उप महापौर पारस सिंघवी, अधिशासी अभियंता (यांत्रिक) लखनलाल बैरवा एवं समिति सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में शहर में सफाई एवं निगम की ओर से करवाए जाने वाले कार्यों पर निर्णय किए गए।

अध्यक्ष चौधरी ने बताया कि असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने गोवर्धन सागर में वाटर स्पोर्ट्स एवं दूध तलाई में पैडल बोट शुरू करने को लेकर निर्देश दिए थे। इसी की पालना में जल्द ही पैडल बोट शुरू करने का निर्णय किया गया है। उप महापौर सिंघवी ने अधिशासी अभियंता को जल्द ही इस कार्य में अग्रिम कार्रवाई के निर्देश दिए।

समिति सदस्य देवेंद्र पुजारी ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में संचालित कई ओपन जिम मरम्मत के अभाव में अनुपयोगी हो रहे हैं। इस पर सिंघवी ने जल्द ही सभी जिम मरम्मत के टेंडर करने के निर्देश दिए।समिति सदस्य हीरा देवी मीणा ने कहा कि नगर निगम के कई वाहनों पर लंबे समय से रंग रोगन नहीं किया गया है। जिससे शहर में निगम की छवि को खराब हो रही है। इस पर शहर में संचालित सभी वाहनों पर रंग रोगन का निर्णय किया।

गैराज शाखा जारी करेगी अनुमति

बैठक में स्टार होटल्स को नाव एवं जेटी की अनुमति पर चर्चा हुई। अध्यक्ष ने बताया कि पहले यह कार्य निगम की गैराज शाखा द्वारा किया जाता था, लेकिन गैराज में अधिकारी के अभाव में यह कार्य राजस्व शाखा को सुपुर्द किया गया। अब गैराज शाखा में अधिकारी ने कार्यभार संभाल लिया है, इसलिए यह कार्य फिर से निगम की गैराज शाखा द्वारा किया जाएगा।समिति अध्यक्ष ने कहा कि सुखाडिया सर्कल पर नाव संचालित करने वाली फर्म की ओर से अव्यवस्था फैलाई जा रही है। महीनों तक पानी के होज की सफाई नहीं होती। पानी से दुर्गंध आती है। जिस पर कहा गया कि संबंधित ठेकेदार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

सिटी बस संचालक को लेकर हुए निर्णय

सदस्य पूनम सिंह रावत एवं कमलेश मेहता ने शहर के औद्योगिक क्षेत्र मादड़ी एवं कलडवास में सिटी बस संचालित नहीं होने के कारण यात्रियों की समस्याओं से अवगत कराया। बैठक में उपस्थित उप महापौर सिंघवी ने निगम में आने वाली इलेक्ट्रिक बसों में से एक नया रूट निर्धारित करने के निर्देश दिए।

You received this email because you set up a subscription at Feedrabbit. This email was sent to you at abhijeet990099@gmail.com. Unsubscribe or change your subscription.