>>: मार्च में दिल्ली में संपन्न होगी अहिंसा यात्रा

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भीलवाड़ा।
दिल्ली के लाल किले से 9 नवम्बर 2014 से शुरू अहिंसा यात्रा अगले वर्ष मार्च में दिल्ली में संपन्न होगी। यह घोषणा आचार्य महाश्रमण ने शनिवार को जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के दो दिवसीय अधिवेशन में की।
आचार्य ने कहा कि चातुर्मास के बाद भीलवाड़ा से विहार कर कोटा, सवाई माधोपुर, जयपुर, लाडनूं होते फरवरी 2022 में बीदासर पहुंचेंगे, जहां 158वां मर्यादा महोत्सव होगा। वहां से मार्च में आचार्य की ऐतिहासिक अहिंसा यात्रा दिल्ली जाएगी, जहां 9 वर्षीय यात्रा का समापन होगा। मालूम हो, २०१४ में दिल्ली से यात्रा शुरू हुई, जो नेपाल, भूटान व भारत के 20 से अधिक राज्यों में सद्भावना, नैतिकता एवं नशा मुक्ति के संदेश देते भीलवाड़ा पहुंची है।
आचार्य महाश्रमण ने सभागार में कहा कि मनुष्य से गलती होना स्वाभाविक है। वीतराग भगवान सर्वज्ञ होते हैं, उनसे कोई भूल नहीं होती परन्तु जब तक छद्मस्थता है तब तक कोई भूल हो सकती है। यह जागरूकता रहनी चाहिए कि कभी कोई भूल हो जाएं तो अतिशीघ्र प्रायश्चित कर लें ताकि यह संयम जीवन निर्दोष व सुरक्षित रह सके। शिष्य का गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण होना चाहिए। कोई बात हो तो उसे गुरु के सामने भद्रता, ऋजुता और सहजता से स्वीकार कर ले। जब व्यक्ति में प्रायश्चित की भावना रहती है तो उसका वर्तमान और भविष्य अच्छा बन सकता है।
तेरापंथी महासभा के वार्षिक अधिवेशन में आचार्य ने कहा कि समाज की उपयोगिता तभी सार्थक है, जब वो समस्या का समाधान कर सके। अवसर आने पर सहयोग और त्राणदाता बन सके। तेरापंथ समाज की सभी संस्थाएं हर दृष्टि से सतत प्रगतिशील है। 28 अक्टूबर 1913 में तेरापंथ के नवम आचार्य कालूगणी के समय गठन हुआ। 108 वर्षों से महासभा समाज में अपनी सेवाएं दे रही है। साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा ने कहा कि समाज के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता का कत्र्तव्य संघ एवं समाज के लिए लाभकारी बन सके, ऐसा प्रयास होना चाहिए। महासभा अध्यक्ष सुरेश गोयल व भंवरलाल बैद ने विचार रखे। संचालन महामंत्री रमेश सुतरिया ने किया।

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