>>: एक परिवार की दास्तां; दबंगों ने तो हाथ-दांत ही तोड़ा, 'सिस्टम' ने तो खत्म कर दी न्याय की आस

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अलवर. हम एक ऐसे बावरिया परिवार की दास्तां बता रहे हैं जो अभी तक समाज की मुख्य धारा से नहीं जुड़ पाया। छत पाने के लिए जद्दोजहद की तो दबंगों ने प्लाट पर कब्जा करने के लिए पूरे परिवार पर हमला बोल दिया। किसी का हाथ तोड़ा तो किसी का दांत। किसी व्यक्ति के पैर पर कुल्हाड़ी मारकर नसें काटी तो किसी महिला की छाती पर लात मारी। इन दबंगों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस के सामने पूरा परिवार दिनभर खड़ा रहा। शाम हुई तो मेडिकल कराया गया पर दबंगों का ऐसा खौफ कि मेडिकल रिपोर्ट में हाथ-पांव सब जुड़ गए। स्थानीय पूरे प्रशासनिक व पुलिस अमले से हारकर पूरा परिवार एडीएम प्रथम उत्तम सिंह शेखावत के पास पहुंचा। हाथ जोड़कर महिलाओं ने कहा, कुछ नहीं बचा, सब तोड़ दिया। न्याय की आस सिस्टम से थी वह भी खत्म हो गई। आप कुछ करें, अन्यथा पलायन के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
इस तरह शुरू हुआ विवाद, प्रशासन ने ध्यान दिया न पुलिस ने
ये मामला बानसूर तहसील के हाजीपुर गांव का है। विद्या देवी का परिवार 27 अप्रेल को अपने प्लाट पर भवन निर्माण कर रहा था। आरोप है कि उसी समय नौ से दस लोग पहुंचे और उन्होंने निर्माण का विरोध किया। निर्माण नहीं रोका गया तो हमला कर दिया। कर्मजीत के सिर में चोट आई है। विद्या देवी का हाथ फैक्चर हो गया। अजय की दोनों पैरों की नस कुल्हाड़ी से काट दी। मोनिका का भी हाथ टूट गया। छाती पर लात मारने से पसलियां टूटने का खतरा बना हुआ है। हमले में सागर के दांत टूट गए। बमुश्किल आसपास के लोगों ने बचाया। विद्या देवी का कहना है कि स्थानीय पुलिस ने किसी भी दबंग के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। मेडिकल रिपोर्ट में भी दबंगों को बचा दिया गया। पूरा अमला दबंगों के साथ खड़ा है।

पुलिस अधिकारियों को जांच के निर्देश

एडीएम प्रथम से विद्या देवी ने कहा कि इतना खौफ है कि अब वहां रहना मुश्किल हो गया है। यदि हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो उनका जीवन संकट में है। घर में तीन महिलाएं हैं लेकिन खाना तक नहीं बना पा रहे हैं, सभी के हाथ टूटे हैं। यदि सिस्टम ने साथ नहीं दिया तो उनके पास कुछ सहारा नहीं होगा। वैसे वह सिस्टम से काफी नाखुश हैं। कार्रवाई करने की बजाय दबंगों को बचाया गया। एडीएम प्रथम ने पुलिस के अधिकारियों को यह मामला ट्रांसफर किया। साथ ही जांच कर आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए।

पता नहीं कितनी विद्या देवी न्याय के लिए लड़ रहीं

विद्या देवी का कहना है कि उन्हें आज पता लगा कि सिस्टम केवल नाम का है। पहुंच वालों का है। पता नहीं कितनी लाचार विद्या देवी इंसाफ की खातिर भटक रही हैं। गरीब को गरीब न समझकर अफसर जिम्मेदारी निभाएं तो सभी के चेहरे पर मुस्कान हो और दबंग सलाखों के पीछे।

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