>>: फर्जीवाड़े की इंतहा...मौत से पहले सांसे गिनता है गिरोह

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जयपुर। मुर्दे को जिंदा बताकर क्लेम की राशि हड़पने वाला गिरोह क्लेम के नोटों के लिए गंभीर रूप से बीमार लोगों की अंतिम सांसे भी गिनता है। मौत से पहले इन बीमारों का बीमा करवा दिया जाता है। मौत के बाद अस्पताल का रिकॉर्ड नष्ट करवा कर क्लेम उठा लिया जाता है। इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन जांच की बजाय कंपनियों का ध्यान अधिक बीमा करने के टारगेट पर रहता है। यह टायरेट ही गिरोह के लिए फायदे का सौदा बनता जा रहा है।

कंवारे का करवाया बीमा, मौत नहीं हुई तो कर दी हत्या
गिरोह के लोग पैसा हड़पने के लिए किस तरह योजनाबद्ध वारदात करते हैं। उज्जैन के एक मामले से इसे समझा जा सकता है। यहां पर गिरोह ने छत्रीपुर चौक पर कियोस्क चलाने दिलीप का 36 लाख रुपए का बीमा करवा दिया गया। दिलीप कंवारा था, लेकिन एक महिला को उसकी पत्नी बनाकर नोमिनी बना दिया। गिरोह के लोग उसके बीमा की प्रिमियम राशि जमा करवाते रहे। जल्द पैसे लेने के लिए सुपारी देकर दिलीप की हत्या करवा दी गई। बाद में उस महिला ने दिलीप की पत्नी बनकर क्लेम का दावा कर दिया, लेकिन जांच में इसका खुलासा हो गया।

किसी की उम्र कम की तो किसी का वजन
बीमारी ही नहीं, दस्तावेजों में उम्र व वजन भी कम किया जा रहा है। पोलीसी में प्रिमियम की राशि जोखिम और उम्र के हिसाब से तय होती है। ऐसे में दस्तावेजों में फर्जी तरीके से उम्र और वजन भी कम कर बीमा करवाया जा रहा है।

पांच फीसदी मामलों की जांच, दो फीसदी गड़बड़
बीमा कंपनियों की ओर से बीमा के मामले में महज पांच फीसदी मामलों की जी जांच की जाती है। सूत्रों का कहना है कि इनमें से दो फीसदी मामलों में गड़बड़ सामने आती है।भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण के मामलों पर गौर किया जाए तो सामने आता है कि बीमा के 12609 मामले फर्जी पाए गए। इस पर प्राधिकरण ने करीब दो सौ करोड़ रुपए का भुगतान रोक दिया।

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