>>: Digest for June 01, 2023

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जिले में मर्ज होने के बाद से बंद 73 स्कूलों का फिर से उपयोग नहीं होने व भवनों के जर्जर होने को लेकर विधायक सीएम को पत्र लिखेंगे। उनका कहना है कि मर्ज हुए कई विद्यालय तो ऐसे स्थलों पर बिना सोचे-समझे ही बना दिए गए थे, जहां आबादी कम थी। इसके बाद उनको बंद कर दिया गया और लाखों रुपए की लागत से बने भवनों को भी उपेक्षित छोड़ दिया गया। इसका आरोप उन्होंने सरकारी कर्मचारियों पर लगाया। उनका कहना है कि कर्मचारी भवनों का उपयोग करने में भी अड़गा अड़ाते हैं ओर स्वयं सार-संभाल भी नहीं कर रहे है।

विधानसभा में उठाया था मामला
जिले के साथ ही पूरे प्रदेश में ऐसे सैकड़ों स्कूल है, जो मर्ज होने के बाद जर्जर हो रहे हैं। समाजकंटकों की शरण स्थली बने हुए हैं। इसे लेकर मैं विधानसभा में मामला उठा चुका हूं। राजस्थान पत्रिका की ओर से शुरू इस मुहिम के बाद अब मैं फिर से सीएम को इन भवनों का क्या-क्या उपयोग हो सकता है, सुझाव के साथ पत्र लिखूंगा। जिससे लाखों रुपए की सम्पत्ति बर्बाद नहीं हो।

खुशवीरसिंह जोजावर, विधायक, मारवाड़ जंक्शन
विधायक कोष से करवा देंगे जीणोZद्धार

मर्ज स्कूलों के कई भवन हमारे क्षेत्र में जर्जर हो रहे है। उनका उपयोग सरकारी कार्यालयों के लिए करने या अन्य सामाजिक कायोZं में करने के लिए सीएम को लिखा जाएगा। जो भवन जर्जर हो गए है, उनका जीणोZद्धार करवाकर उपयोग करेन के लिए विधायक व पंचायत कोष से राशि भी खर्च कर देंगे। आनन्दपुर कालू में हमने अस्पताल के लिए पुराना भवन देने के लिए सरकार को लिखा भी है।
अविनाश गहलोत, विधायक, जैतारण

सेंदड़ा के निकट जंगल में बकरियां चरा रही एक वृद्धा की चंद रोज पहले आदमखोर युवक ने हत्या कर दी थी और उसका मांस नोंच-नोंच कर खाया था। ऐसा ही खतरा अब पूरे जिले में मंडरा रहा है। जिले में पिछले पांच माह में पांच हजार से अधिक लोग कुत्तों के शिकार हो चुके हैं। इतना ही नहीं, जिले के सबसे बड़े बांगड़ मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में ही जनवरी से अब तक करीब 1700 लोग श्वानों के काटने के बाद रेबीज का टीका लगवाने पहुंच चुके है। लेकिन, नगर परिषद है कि न तो कुत्तों को पकड़ने के लिए कुछ कदम उठा रही है और न ही उनकी नसबंदी के लिए कोई उपाय कर रही है। इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।

इतने लोग हुए शिकार
जनवरी - 410
फरवरी- 345
मार्च- 345
अप्रेल- 280
मई - 325

बुजुर्ग व बच्चे सॉफ्ट टारगेट
शहर व गांवों की हर गली में पांच से सात श्वान घूमते दिख जाते हैं। पशु चिकित्साधिकारियों की माने तो श्वान बुजुगोZं व बच्चों पर अधिक हमला करते है। बुजुर्ग विजयकुमार ने बताया कि वाहन चलाते समय कई बार श्वान पीछे भागते हैं। शहरवासी संजय सोनी का कहना है कि श्वान घरों तक में घुस जाते हैं। इसके बावजूद नगर परिषद श्वानों को नहीं पकड़ रही है।

कोई भी इलाका नहीं सुरक्षित
शहर के हर क्षेत्र में श्वानों के काटने की घटनाएं हो चुकी है। बजरंग बाड़ी, इंद्रा कॉलोनी, राजेन्द्र नगर, हैदर कॉलोनी, नया बस स्टैण्ड, केशव नगर, रामलीला मैदान, सवोZदय नगर में तो श्वानों ने एक ही बार में दो-तीन जनों को एक ही दिन में काटा है। पीडि़तों को तत्काल अस्पताल पहुंचकर इलाज करवाना पड़ा।

श्वान काटने पर यह करें
-घबराएं नहीं
-काटने वाली जगह को साफ करें
-घाव को साफ कपड़े या रूई से पौंछने के बाद एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं
-अस्पताल पहुंचे, जहां रेबीज का इंजेक्शन लगवाएं


राजस्थान में डॉग बाइट के साल दर साल आंकडे
वर्ष- डॉग बाइट के मामले
2019- 450558
2020- 324500
2021- 113976
2022- 78814 (नवंबर महीने तक)

हर पांच साल में होती गणना
(राजस्थान में श्वानों की संख्या)
वर्ष 2012- 11 लाख 51 हजार 015
2019- 12 लाख 75 हजार 596

Weather Report : राजस्थान में मई के दौरान सक्रिय रहे पश्चिमी विक्षोभ ने बारिश का 100 साल का रेकाॅर्ड तोड़ दिया है। मौसम विभाग ने आंकडे जारी कर खुलासा किया है कि वर्ष 1917 में 71.9 एमएम बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस बार मई के दौरान 62.4 एमएम बारिश हुई, जो पिछले 100 साल में सबसे ज्यादा रही है। मई के दौरान 1971-2020 के आंकडों के आधार पर इसकी लंबी अवधि के औसत (एलपीए) का 458 प्रतिशत रही है जो की सामान्य से बहुत अधिक (औसत से 358 प्रतिशत अधिक) दर्ज की गई है।

सभी जिलों में रेकाॅर्ड तोड़ बारिश
मौसम विभाग की माने तो मई के दौरान राजस्थान के सभी जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। बीकानेर शहर में गत 29 मई को एक दिन में 72.8 एमएम रेकाॅर्ड बारिश दर्ज की गई थी, जो अब तक की सबसे अधिक है। इससे पहले 1999 में एक दिन के भीतर सबसे अधिक 63.1 एमएम बारिश हुई थी।

मौसम विभाग के आंकड़े (बारिश एमएम.)
स्थान-----------वास्तविक----------सामान्य
अजमेर----------79.7-------------11.4
अलवर----------41.2-------------21.9
बांसवाड़ा---------7.8--------------4.7
बारां------------33---------------7
भरतपुर---------41.1-------------14.8
भीलवाड़ा--------56.1--------------11.6
बूंदी-----------55.4--------------7
चित्तौड़गढ़-------25.8--------------10.5
दौसा----------72.8--------------14.8
धौलपुर--------43.2--------------10.2
डूंगरपुर--------25.3--------------6.6
जयपुर--------77.8--------------17.6
जैसलमेर------34.9--------------6.7
झुंझुनूं--------107.9-------------25.1
करौली--------61.7--------------11.5
कोटा---------30.9--------------8.7
प्रतापगढ़------20.3--------------5.1
राजसमंद------56.6-------------12.4
सवाईमाधोपुर---66---------------10.7
सीकर--------125.8------------22.6
सिरोही--------232.8----------9.3
टोंक----------60.2------------10.9
उदयपुर--------28.1-----------9.7
बाड़मेर--------25.1-----------11.8
बीकानेर--------81.4-----------19.9
चूरू----------107.9------------23.2
हनुमानगढ़-----87.9------------17.7
जैसलमेर------52.9------------9.9
जालोर--------36.3------------8.4
जोधपुर--------81.3------------14
नागौर---------118.9-----------18.9
पाली----------66.3------------11
श्रीगंगानगर-----83.8-------------14


मई के दौरान पिछले 123 साल का रेकाॅर्ड
वर्ष----------------कुल बारिश (एमएम)
1917--------------71.9
1920--------------47.7
1982--------------37.6
2021--------------50.5
2023--------------62.4

 

 

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