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सरकार किसी की बने, अलवर के हिस्से में आएंगे कई मंत्री Wednesday 29 November 2023 06:05 AM UTC+00 भाजपा-कांग्रेस में सरकार चाहे किसी की बने...अलवर का हमेशा बढ़ा है कद
- वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए अलवर के हिस्से में आ सकते हैं ज्यादा पद जिला राजनीति का प्रमुख केंद्र है। यहां से राजनीतिक निर्णय हों या फिर जनता की ओर से चुने गए जनप्रतिनिधियों का आंकड़ा। ये पूरे देश में पढ़ा और समझा जाता है। अलवर कई जिलों का राजनीतिक भविष्य तय करता है। यही कारण है कि चुनावों में यहां प्रमुख दलों के बड़े नेता आते हैं। इस बार चुनावों में भी कांग्रेस व भाजपा ने खूब जोर लगाया। स्टार प्रचारकों ने खूब माहौल बनाया। जानकार कहतेे हैं कि प्रदेश में इस बार सरकार चाहे किसी भी दल की बनें लेकिन अलवर को कई मंत्री मिलने तय हैं। यानी प्रदेश की राजनीति में अलवर की भागीदारी कम नहीं होगी। कुछ नेता कयाब लगा रहे हैं कि जीत गए तो वह मंत्री बनेंगे। इन प्रत्याशियों को पार्टियों ने बनाया मंत्री - वर्ष 1998 में कांग्रेस की सरकार बनी। अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस के 153 विधायक राज्य में जीते। अलवर में भी अधिकांश विधायक कांग्रेस पार्टी के ही जीते। उस समय गहलोत सरकार में खैरथल विधायक चंद्रशेखर को जेल राज्य मंत्री बनाया। - वर्ष 2003 में भाजपा की सरकार बनी। पार्टी के 120 विधायक जीते। अलवर से भाजपा के तीन ही विधायक जीते। इनमें से धर्मपाल चौधरी को सरकार में संसदीय सचिव बना कर लाल बत्ती दी थी। - वर्ष 2013 में फिर से भाजपा की सरकार बनी। राज्य में भाजपा के 163 विधायक जीते। अलवर में भी 11 में से 9 विधायक भाजपा के बने। इनमें पहले हेमसिंह भड़ाना को कैबिनेट मंत्री। इसके बाद बहरोड़ विधायक जसवंत यादव को भी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया। उस दौरान भाजपा में रहे डॉ रोहिताश शर्मा को अंतरराज्यीय जल निराकरण समिति का अध्यक्ष बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया। इसके अलावा संदीप यादव को युवा बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा दिया। देवी सिंह शेखावत को नगर विकास न्यास अलवर का अध्यक्ष बनाया। |
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