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रणथंभौर से बड़ा पार्क, फिर भी सरिस्का में पर्यटक कम Sunday 25 June 2023 06:06 PM UTC+00 अलवर. टाइगर रिजर्व सरिस्का में बाघों की संख्या बढ़कर 28 होने से पर्यटन को बढ़ावा मिला, लेकिन सफारी के लिए कम रूट पर्यटकों की राह में बाधा बने हैं। फिलहाल सरिस्का में सफारी के लिए तीन और अलवर बफर रेंज में दो रूट हैं, जबकि रणथंभौर में सफारी के लिए करीब 10 रूट खुले हैं। ज्यादा रूट होने से बाघों की साइटिंग भी आसान रणथंभौर में हर साल पांच लाख से ज्यादा पर्यटकों के पहुंचने का बड़ा कारण वहां बाघों की आसान साइटिंग है। इसका बड़ा कारण करीब दस रूट होने के कारण पर्यटकों को जंगल में घूमने का ज्यादा क्षेत्र मिलता है, इससे किसी न किसी रूट पर बाघ आसानी से दिखाई दे जाता है। वैसे रणथंभौर में बाघों की संख्या 75 से ज्यादा है, जिससे भी पर्यटकों काे आसानी से बाघ दिख जाता है, जबकि सरिस्का में अभी 28 बाघ हैं और रूट भी मात्र पांच है, इनमें दो रूट अलवर बफर जोन के हैं। इस कारण यहां बाघों की साइटिंग कम होने से पर्यटक भी कम पहुंचते हैं। सरिस्का में तीन, अलवर बफर में दो रूट टाइगर रिजर्व सरिस्का के सदर गेट से तीन रूट सफारी के लिए खुले हैं। इनमें पहला सदर गेट से कालाकुआं, धानका, उदयनाथ व सारूंडा, दूसरा सदर गेट से तारुंडा, लट्ठावाला, एस मोड, ब्रह्मनाथ, कालीघाटी, कांकवाड़ी तथा तीसरा रूट सदर गेट से भर्तृहरि तिबारा, करणाकाबास, आताग्वाल, कालीचौंतरी, उमरी, बेहडावाला, जलेबी चौक है। वही अलवर बफर रेंज में एक रूट बाला किला तथा दूसरा बारा लिबारी रूट हैं। इसलिए सरिस्का में पर्यटन रूट कम सरिस्का टाइगर रिजर्व में पर्यटन रूट कम होने के दो बड़े कारण हैं, इनमें पहला यहां की भौगोलिक िस्थति तथा दूसरा कोर एरिया में बसे गांव हैं। सरिस्का में ऊंची पहाडि़यां है, इस कारण नए रूट बनाने में परेशानी आती है, जबकि रणथंभौर में पहाड़ी ज्यादा ऊंची नहीं है, जिससे नए रूट बनाना आसान है। वहीं सरिस्का के कोर एरिया में 20 से ज्यादा गांव बसे हैं, इस कारण भी यहां नए रूट बनाने में परेशानी आती है। जबकि रणभंभौर में गांव नहीं है। |
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