>>: भगवान केशव की पंचकोसी परिक्रमा में श्रद्धालुओं ने दिखाया उत्साह

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भगवान केशव की पंचकोसी परिक्रमा में श्रद्धालुओं ने दिखाया उत्साह
केशवरायपाटन. हाडौती के पुष्कर के नाम से विख्यात केशव धाम पर मंगलवार को हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान केशव की पंचकोसी परिक्रमा लगाकर पूण्य अर्जित किया। यहां पर प्रात: 4 बजे से ही स्नानार्थी चंबल नदी पर पहुंचने शुरू हो गए थे। चंबल नदी में कार्तिक स्नान करने वाले महिला, पुरुषों, बालक, बालिकाओं ने भगवान केशव की मंगला आरती के दर्शन किए। भगवान के मनमोहक छटा व श्रृंगार देखकर श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे रहे। प्रात: 6 बजे केशव मंदिर से गणेश पूजन के बाद पंचकोसी परिक्रमा का आगाज किया गया। चंबल नदी की पूजा अर्चना कर श्रद्धालुओं ने नंगे पांव परिक्रमा शुरू की। प्रचलित किंवदंतियों के अनुसार यहां राजा ने चंबल नदी से भगवान विष्णु का विग्रह निकालकर तट पर प्राण प्रतिष्ठा करने के बाद कार्तिक मास में भगवान की पंचकोसी परिक्रमा लगाकर अपनी मनोकामना पूर्ण की।

आदिकाल से ही पंचकोसी परिक्रमा चली आ रही है जो निरंतर जारी है। इसके स्वरूप में धीरे-धीरे सुधार आता जा रहा है और श्रद्धालु जुड़तेे जा रहे हैं। यहां पर रंग-बिरंगे परिधान पहन कर भगवान केशव के जयकारों के साथ पंचकोसी परिक्रमा लगाई। यह पंचकोसी परिक्रमा केशव घाट से शुरू होकर राजराजेश्वर होती हुई विभिन्न घाटों में पूजा अर्चना करती हुई वराह मंदिर पहुंची। नहर के नाले के पास से डीजे की धुन में कृष्ण भक्ति में भजनों में झूमते श्रद्धालु जुलूस के रूप में गाजे-बाजे के साथ मात्रा हनुमान मंदिर पहुंची। यहां से स्वेतवाहन महादेव, रामलक्ष्मन की निमाड़ी होकर जम्बू दीप के दर्शन कर शाम को केशव धाम पहुंच कर परिक्रमा का सम्मान किया।

पंचकोसी परिक्रमा में यह है पौराणिक महत्व के तीर्थ
धनुषाकार बहती चम्बल नदी को साक्षी मान कर भगवान केशवराय महाराज की पंचकोसी परिक्रमा केशव दर्शन कर केशव घाट से शुरू की गई। इस आध्यात्मिक परिक्रमा में राजराजेश्वर महादेव सहस्त्रलिंग, जम्बूमार्गेश्वर, संकट मोचन हनुमान, माता अंजनी, वराह अवतार मंदिर, चामुंडा माता, वरुणसर आश्रम, स्वेतवाहन महादेव, भगवान कल्याणराय मंदिर, करकरा भैरव, नरसिंह, रूद्र तीर्थ, ऋण मोचन तीर्थ, स्वर्गद्वार तीर्थ, गरुड़ तीर्थ, हंस तीर्थ, ब्रह्म तीर्थ, जम्बूदीप आते हैं। परिक्रमा मार्ग पर चप्पे-चप्पे पर देवालयों है।

आंवली पूजन कर मनाई अक्षय नवमी
कार्तिक मास में अक्षय फल देने वाली अक्षय नवमी पर केशव मंदिर पर श्रद्धालुओं ने आंवली, तुलसी, पीपल पूजन कर परिक्रमा लगाई। यहां दिनभर मंदिर के पट खुले रहे। श्रद्धालु चर्मण्यवती में स्नान कर दर्शन करने आते रहे। जो श्रद्धालु परिक्रमा नहीं लगा पाए उन्होंने मंदिर में मंदिर की परिक्रमा लगाई। मंदिर में दिन भर चहल पहल बनी रही। यहां आने वाले श्रद्धालुओं ने गंगा मंदिर, चारभुजा मंदिर, जम्बूमार्गेश्वर पर पूजा अर्चना की। शहर के एक दर्जन मंदिरों में अक्षय नवमी पर विशेष पूजा अर्चना की गई।

स्वागत सत्कार की मची होड़
अक्षय नवमी पर भगवान केशव पर आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं का सैलाब देख कर शहर के लोग स्वागत सत्कार के लिए उमड़ पड़ी। जगह-जगह स्टाल लगा कर पुष्प वर्षा करते रहे। फल वितरण किए। जलपान की व्यवस्था में लगे रहे। नहर के नाले से मात्रा रोड तक पुष्प वर्षा की गई। विभिन्न संस्थाओं के कार्यकर्ता व्यवस्था में लगे रहे। इस परिक्रमा में कोटा, बूंदी, बारां सवाईमाधोपुर जिलों से भी श्रद्धालु परिक्रमा में भाग लेने आए। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

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