>>: Digest for December 19, 2023

>>

Patrika - A Hindi news portal brings latest news, headlines in hindi from India, world, business, politics, sports and entertainment!

You are receiving a digest because your subscriptions have exceeded your account's daily email quota. Your quota has automatically reset itself.

नागौर. श्रीराम जन्म भूमि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लिए चल रहे संपर्क अभियान पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महंत भागीरथराम शास्त्री ने कहा कि भारतीय आदिकालीन श्रेष्ठ जीवन मूल्य, पद्धति व व्यवस्था आज भी जारी है। केवल इसे युगानुकूल करने की जिम्मेदारी हम सब की है। विश्व में एक मात्र भारत ऐसा देश है जहां अतिथि देवो भव का भाव सदा से श्रद्धा का विषय रहा है। आज भारत के योग की की गूंज विश्व में प्रभावी रूप से व्यक्त हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत माता, सरस्वती, लक्ष्मी व दुर्गा का समन्वित रूप है। मंदिर, मठ, गुरुद्वारा केवल मूर्ति पूजा के प्रतीक नहीं है, बल्कि हमारे गौरव पूर्ण मर्यादा के प्रतीक हैं। नंदलाल बाबाजी ने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। विश्व हिन्दू परिषद के जोधपुर प्रान्त संगठन मंत्री राजेश कुमार ने कहा कि मुगल काल में भारत में अनेक मंदिर इस योजना से तोड़े गये ताकि मंदिर तोडऩे के माध्यम से हिंदू का विश्वास, श्रद्धा और जीवन मूल्य टूट जाएगा। अंग्रेजों के समय में भी शिक्षा के माध्यम से ही मंदिरों को अधिग्रहण करके इस विश्वास को तोडऩे का कार्य किया गया। प्रयास है कि मंदिर सरकारी अधिग्रहण से मुक्त हो। इसके पूर्व काल में भी मंदिर धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना से खड़े रहे। सभी स्थानों पर मंदिर आधारित वेद शाला गोशाला आदि संचालित हो। उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा के माध्यम से युवा शक्ति को नशे से बचाने, लव जिहाद से बचने के लिए हिंदू बालिकाओं को भारत के मूल परंपरा के संस्कारों पर खड़ा करने की आवश्यकता पर बल दिया। विहिप के जिलाध्यक्ष रामेश्वर सारस्वत ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में महंत कमलेश भारती, महंत प्रकाश ओझा, मेघराज राव, विभाग प्रचारक गिरधारीलाल, धर्म प्रसार प्रमुख राधेश्याम टोगसिया, प्रताप सिंह राजपुरोहित, कोषाध्यक्ष गणेश त्रिवेदी, प्रांत के सत्संग प्रमुख पुखराज सांखला, विभाग के संगठन मंत्री कुलदीप शर्मा, बजरंग दल के हरिकिशन चौधरी, देवेंद्र टाक, अनिल खदाव, सुशील झाड़वाल, सुरेश अटल, नीलू खड़लोहिया, अनुपमा शर्मा, दुर्गा वाहिनी की माया सांखला, कविता सांखला, सरिता राव, बबीता बेनीवाल, महावीर गौ सेवा समिति के बलदेव सांखला आदि मौजूद थे।

खींवसर उपखण्ड के गांवों में लाइम स्टोन का दिन रात अवैध दोहन हो रहा है। यहां अवैध लाइम स्टोन को वैध बनाने वाली रॉयल्टी फर्म सरकार को ही चुना नहीं लगा रही, बल्कि मजदूरों के डीएमएफटी के लाखों रुपए भी डकार गई है। खनिज विभाग भी फर्म पर इतना मेहरबान है कि यहां सर्वाधिक अवैध खनन की जगहों पर चौकियां तक नहीं लगाई गई है। ऐेसे में इस रॉयल्टी फर्म के कार्मिकों की लूट रोकने वाला कोई नहीं है। स्थिति यह है कि 50-50 किलोमीटर दूर की वैध लीजों से रवाना मंगवाकर अवैध लाइम स्टोन को वैध किया जा रहा है, लेकिन विभाग कार्रवाई करने की बजाए दरियादिली दिखा रहा है।

सुविधाओं से अनजान श्रमिक
रॉयल्टी फर्म अवैध लाइम स्टोन से रॉयल्टी वसूलने के साथ मजदूरों के नाम पर डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउण्डेशन ट्रस्ट का पैसा भी डकार रही है, जबकि सरकारी सुविधाओं से अनजान श्रमिक कई बार चिकित्सा सुविधा के अभाव में काल कलवित हो रहे हैं। इनके बच्चे भी शिक्षा के अभाव में बाल श्रमिक बन रहे हैं। अत्यधिक चूना कली भट्टों एवं लीज खानों के कारण औद्योगिक नगरी कहलाने वाले भावण्डा-माणकपुर में श्रमिकों के लिए खुद का अस्पताल तो दूर सरकारी अस्पताल में चिकित्सक तक नहीं है। श्रमिकों को सुविधा के लिए भामाशाहों का मुंह तक ताकना पड़ता है।

वसूली में चूक नहीं

उपखण्ड क्षेत्र के लीज धारकों, चूना कली भट्टे मालिकों एवं अवैध लाइम स्टोन परिवहन वालों से रॉयल्टी फर्म की ओर से रॉयल्टी वसूली जा रही है। इस वसूली का आंकड़ा प्रतिवर्ष लाखों में है, जबकि श्रमिकों एवं पर्यावरण पर मिलने वाली सुविधाएं शून्य है। भावण्डा, माणकपुर सहित लीज की खानों पर काम करने वाले श्रमिक आज तक सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं ले पाए हैं।

नहीं हो रहा यह सब

नियमानुसार डीएमएफटी (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउण्डेशन ट्रस्ट) फण्ड से अच्छी सड़कें पर्यावरण शुद्धिकरण के लिए पेड़ पौधे, सामाजिक भवन, पर्यावरण पर गोष्ठियों के लिए भवन, चूना कली भट्टे एवं लीज खानों पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच करना। अस्पताल, पानी के जीएलआर, हौद, श्रमिकों के बच्चों के लिए स्कूल, मजदूर आवासीय भवन सहित विभिन्न सुविधाएं मिलनी चाहिए। जबकि इनमें से एक भी सुविधा नहीं मिल रही।

पेट्रोलिंग से निगरानी

खींवसर में खनन का लम्बा चौड़ा क्षेत्र है, हालांकि चौकी दो जगह लगाई गई है बाकी अवैध खनन की रोकथाम के लिए लगातार पेट्रोलिंग कर रहे है।

-जितेन्द्र भारद्वाज, खनिज अनुदेशक, खींवसर

-गुड्स ट्रेन का संचालन होने पर पशु पालकों को प्राइवेट वाहनों की अपेक्षा पांच गुना राशि कम करनी पड़ेगी व्यय
-संचालन शुरू हुआ तो फिर मेले में आने वाले पशु पालकों की तादाद बढ़ जाएगी तीन से चार गुना
नागौर. रामदेव पशु मेला में गुड़्स ट्रेन नहीं चलने से पशुपालकों को अत्याधिक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि ट्रेन संचालन शुरू कराने के लिए गत चार से पांच सालों में अथक प्रयास किए गए, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल पाई है। पिछले वर्ष भी ट्रेन संचालन की अनुमति दिए जाने के रेलवे की ओर से संकेत तो मिले थे, लेकिन ऐन मौके पर पता चला कि ट्रेन नहीं आएगी। जानकारों की माने तो इसकी वजह से पशु पालकों को अपने पशुओं को प्राइवेट वाहनों के माध्यम से परिवहन करने की स्थिति में केवल दो साल में ही 20 करोड़ से ज्यादा की राशि का नुकसान उठाना पड़ा था। जानकारों के इस बार भी ऐसा न हो, इसके लिए जिला अध्यक्ष भारतीय किसान टिकैत यूनियन अर्जुनराम लोमरोड ने भी संपर्क कर पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक से आवश्यक कदम उठाए जाने के लिए कहा है। ताकि यथासमय ट्रेनों का संचालन होने पर पशु मेला को फायदा हो सके। जानकारों का कहना है कि टे्रनों से पशु परिहवन की अनुमति नहीं मिलने की वजह से पशुपालकों को 20 करोड़ से ज्यादा का तो नुकसान उठाना पड़ा
परिवहन सुविधा नहीं मिलने से पशु पालकों की मेले से बढ़ी दूरी
रामदेव पशु मेला में गुड्स ट्रेन का संचालन नहीं होने की वजह से इस पर प्रतिकूल असर पड़ा है। पशुओं के लिए परिवहन की सुविधा नहीं होने के की वजह से पशु पालकों की रामदेव पशु मेला से दूरी बढऩे लगी है। यह दूरी प्रतिवर्ष बढ़ती चली जा रही है। बताते हैं कि पशुओं को परमिट के साथ ले जाने के लिए तमाम कानूनी औपचारिकताओं की पालना करनी पड़ती है। यह सारी औपचारिकताएं प्राइवेट वाहनों से परिवहन करने की स्थिति में नहीं पूरी की जा सकती है। ऐसे में ट्रेन का संचालन यदि शुरू हुआ तो फिर प्रदेश के पशुपालकों को फायदा होने के साथ ही रामदेव पशु मेला को भी संजीवनी मिल जाएगी।
प्रति पशुपालक इतना हो रहा नुकसान
बताते हैं कि प्राइवेट वाहनों से पशुओं का गंतव्यों तक परिवहन करने में प्रति पशु तकरीबन पांच से छह गुना ज्यादा किराया अदा करना पड़ रहा है। इसको इस तरह से समझा जा सकता है कि यदि ट्रेन में प्रति बोगी पशुपालक को ज्यादा से ज्यादा 20-22 हजार व्यय पड़ेगा, जबकि यही प्राइवेट वाहन से केवल एक पशु का परिवहन करने में ही उसे 60-70 हजार रुपए का व्यय करना पड़ता है। इसमें राह खर्च जोड़ लिया जाए तो उसे इसका व्यय तकरीबन एक लाख रुपए करना पड़ जाता है। जबकि ट्रेन से परिवहन करने की स्थिति में राह खर्च के साथ प्रति पशु किराए की दर औसतन पांच गुना रियायती दर पर चले जाएंगे। मेले में आने वाला पालक अपने साथ चार से पांच या कम से कम दो पशु खरीदकर जरूर ले जाते हैं। इस तरह से प्रति पशु परिवहन करने में पालकों को कितना नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसका अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है।
दो साल में दो हजार से ज्यादा पशु गए थे बाहर
रामदेव पशु मेला में वर्ष 2022 में कुल 882 पशु राज्य से बाहर गए थे। इसमें 784 गोवंश, 11 भैंस वंश एवं 87 अश्व वंश शामिल थे। वर्ष 2023 में राज्य के बाहर जाने वालों में 1141 गोवंश एवं 16 भैंस वंश शामिल थे। इन पशुओं का परिवहन पशुपालकों ने प्राइवेट वाहनेां के माध्यम से किया था। इससे प्रति पशु राह खर्च के साथ ही वाहन व्यय आदि शामिल करने पर लगभग एक लाख रुपए के हिसाब से आकलन में जोड़े जाने पर महज दो मेले में ही पशु पालकों को 20 करोड़ से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा। पशुपालकों का कहना है कि यदि सरकार अनुमति दे दे तो पशु मेला को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही उनको लगने वाला आर्थिक घाटा पर भी लगाम लग जाएगी।
इनका कहना है...
गुड्स ट्रेन संचालन के लिए पशु पालन विभाग की ओर से प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इस संबंध में जिला कलक्टर के साथ चर्चा कर इस कार्य में तेजी लाई जाएगी। ताकि पशु पालकों को इसका फायदा मिल सके।
डॉ. महेश कुमार मीणा, संयुक्त निदेशक पशुपालन नागौर
परिवहन सुविधा नहीं मिलने से पशुपालकों की मेले से बढ़ी दूरी
पशु मेला में से पशुओं के परिवहन के लिए गुड्स ट्रेन का संचालन शुरू कराने के लिए पशु पालन विभाग को अभी से ही प्रयास शुरू कर देना चाहिए। प्रयास रंग लाए तो पशुपालकों को न केवल चार से पांच गुना कम व्यय पर ही पशुओं के परिहवन की सुविधा मिल जाएगी, बल्कि रामदेव पशु मेला के प्रति पशुपालकों का क्रेज भी बढ़ेगा।
अर्जुनराम लोमरोड, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान टिकैत यूनियन नागौर

You received this email because you set up a subscription at Feedrabbit. This email was sent to you at abhijeet990099@gmail.com. Unsubscribe or change your subscription.