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Table of Contents

नागौर. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस सह प्रभारी काजी निजामुद्दीन शनिवार को नागौर दौरे पर रहे। हालांकि सचिव काजी ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि अभी चुनाव व टिकट की बात नहीं कर रहे हैं, लेकिन यहां उनके दौरे को लेकर टिकट के दावेदारों ने न केवल उन्हें अपने आवेदन दिए, बल्कि पूरा शक्ति प्रदर्शन किया। कोई ढोल बजाते हुए सर्किट हाउस पहुंचा तो कोई कार्यकर्ताओं की फौज के साथ अपना दमखम दिखाने पहुंचा। काजी के दौरे को लेकर सर्किट हाउस के प्रवेश द्वार के आसपास एवं शहर में दावेदारों ने काजी के साथ खुद की फोटो वाले खूब होर्डिंग्स लगाए, ताकि खुद को दावेदारी में मजबूत साबित कर सकें।

60 से अधिक आवेदन, नागौर में सबसे ज्यादा
सर्किट हाउस में प्रदेश सह प्रभारी काजी को आवेदन देने वालों का दिनभर तांता लगा रहा। पूर्व में दिए गए समय के अनुसार कार्यकर्ता सुबह 9 बजे ही पहुंचने लग गए। हालांकि काजी खुद साढ़े 11 बजे के बाद नागौर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने शाम करीब पांच बजे तक कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर चर्चा की। दिनभर में जिले भर से आए 60 से अधिक टिकट दावेदारों ने अपने आवेदन दिए। इसमें सबसे अधिक नागौर विधानसभा क्षेत्र से थे। नागौर से हबीबुर्रहमान, डॉ. सहदेव चौधरी, ओमप्रकाश सेन, हनुमान बांगड़ा, दिनेश देवड़ा, हरिराम जाखड़, मोहम्मद इकबाल नागौरी, एचआर कुड़ी, शौकत अली, फरीद खां दायमा, आईदानराम भाटी, सदाकत हुसैन, कालू खां गौरी आदि ने आवेदन दिए। इसी प्रकार खींवसर से कुचेरा चेयरमैन तेजपाल मिर्धा, राघवेन्द्र मिर्धा, दुर्गसिंह चौहान आदि ने आवेदन दिए। मकराना से जाकिर हुसैन गैसावत के साथ इरफान चौधरी ने भी आवेदन दिया। इसी प्रकार जिले की हर विधानसभा से आए कार्यकर्ताओं ने टिकट की दावेदारी पेश की।

hariram jakhad

अंदर-बाहर हो गई परेड
प्रदेश सह प्रभारी काजी के कार्यकर्ताओं से मिलने को लेकर सर्किट हाउस में टेंट लगाया गया, लेकिन उन्हें कोई बाहर तो कोई अंदर ले जाकर अपनी बात कहता नजर आया। दो घंटे के कार्यकाल में उन्हें चार-पांच बार अंदर-बाहर की परेड करवाई गई। एक बार तो सर्किट हाउस के मुख्य गेट पर वरिष्ठ कार्यकर्ता हेमाराम बेड़ा खड़े हो गए और भीड़ को अंदर जाने से रोकने लगे। हालांकि काजी ने लगभग सभी से मुलाकात कर बात सुनी।

कांग्रेस कार्यालय में किया स्वागत
नागौर आने पर कांग्रेस जिला कार्यालय में काजी निजामुद्दीन का जोरदार स्वागत किया गया। बड़ी माला उन्हें पहनाई गई। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेसी नित्यानंद जोशी की याद में उनके पौत्र अविनाश जोशी व परिवार की ओर से तैयार करवाई गई प्याऊ का उद्घाटन किया।

ये रहे मौजूद
इस दौरान काजी के साथ राज्यमंत्री किशनलाल जेदिया, प्रदेश सचिव देसराज मीणा, कांग्रेस जिला प्रभारी गजेन्द्र सिह सांखला सहित स्थानीय पदाधिकारी राधेश्याम सांगवा, मोतीलाल चंदेल, दिलफराज खान, हीरालाल भाटी, अनोपचंद विश्नोई, राजेन्द्र फिड़ौदा, भंवराराम डूडी, भैराराम धुंधवाल, असलम चौधरी, अनवर गहलोत, विमल सोनी, शेर खान, रुस्तम प्रिंस सहित कई कांग्रेसजन उपस्थित थे।

नागौर। अजमेर बीकानेर हाईवे -89 पर शनिवार सुबह करीब पांच बजे थाट फांटा के पास दो बाइक सवार युवकों की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। पादूकलां थाना पुलिस के अनुसार रियांबड़ी निवासी कैलाशचंद मेघवाल (27) व फिरोज मोहम्मद (25) बाइक पर मोरारा गांव जा रहे थे। बीच रास्ते में अज्ञात ने कुचल दिया। दोनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। सूचना मिलने पर पादूकलां पुलिस मौके पर पहुंची। शवों को एम्बुलेंस से चिकित्सालय लेकर पहुंचे।


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दोनों युवक फोटोग्राफी का काम करते थे। वे बाइक पर मोररा से बारात के साथ कोड गांव शादी में गए थे। वहां फोटो व वीडियोग्राफी करने के बाद वापस बारात के साथ मोररा में दूल्हा-दूल्हन को ग्रह प्रवेश की फोटोग्राफी करने जा रहे थे। फिरोज पिता का इकलौता पुत्र था। उसके एक सात साल की बेटी व चार साल का बेटा है। जबकि कैलाश तीन भाइयों में सबसे छोटा था। मृतकों के परिजनों की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामल दर्ज कर जांच शुरू की है। पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव परिजनों को सुपुर्द कर दिए।


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परिजनों का हुआ रो-रोकर बुरा हाल
परिजन शव लेकर घर पहुंचे तो चीख पुकार मच गई। महिलाओं का रो रोकर बुरा हाल था। दो युवकों की मौत के बाद कई घरों में चूल्हे नहीं जले।

लाडनूं. शहर के बापूजी नर्सिंग कॉलेज परिसर में आनंद परिवार समिति के तत्वावधान में शनिवार को आनंदपाल सिंह सांवराद की छठी पुण्य स्मृति में रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। शिविर में ११६८३ यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। सांगलिया पीठाधीश्वर ओमदास महाराज एवं मुख्य शहरकाजी सैयद मोहम्मद मदनी अशरफी व दिव्य धाम के गादीपति भरत दाधीच के सानिध्य में आयोजित रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
यहां हुई सभा में समिति के अध्यक्ष मंजीतपाल सिंह ने कहा कि अब समय आ गया कि आनंदपाल के साथ हुई राजनीतिक साजिश का जवाब देना चाहिए। कार्यक्रम में रावणा राजपूत समाज के प्रदेश अध्यक्ष रणजीत सिंह सोडाला ने समाज को एक मंच पर आकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की बात कही। क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजसिंह शेखावत ने कहा कि वह निकट भविष्य में पूरे राजस्थान में जाकर राजनीतिक अलख जगाएंगे। दोनों ही पार्टियों को घर का रास्ता दिखाएंगे। जोधपुर विधायक मनीषा कंवर पंवार ने कहा कि आनंदपाल सिंह ने सबके लिए सेवा की। ओबीसी नेता दौलतराम पैंसिया ने कहा कि जिन क्षेत्रों से कार्यकर्ता आए हैं वे अपने क्षेत्रों में राजनीतिक अलख जगाएं। समिति के महासचिव नंदकिशोर स्वामी ने कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया। वहीं योगिता सिंह ने संस्था की ओर से किए जा रहे जनकल्याण कार्यों की जानकारी दी। आसींद विधायक जबरमल सांखला ने सर्व समाज को आगामी चुनाव में ताकत दिखाने का आह्वान किया। जीवन सिंह शेरपुर ने भाजपा एवं कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। सभा को जोधपुर की एडवोकेट पूजा गहलोत, नरेंद्र सिंह कसुंबी, पृथ्वी सिंह जयपुर, डाबड़ा सरपंच ममता कंवर, रवि मेघवाल प्रदेश अध्यक्ष भीमसेना, संदीप सिंह चौनपुरा, क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष अनिल तिरड़िया, रणवीर सिंह बिरलोका ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम में नागौर जिला भाजपा देहात अध्यक्ष गजेंद्र सिंह ओडिंट, युवा नेता करणी सिंह राठौड़, भाजपा प्रवक्ता राजेंद्र सिंह धोलिया, दलित नेता कालूराम गेनाणा, पंचायत समिति सदस्य ओमप्रकाश बागडा सहित कई स्थानीय नेता मौजूद रहे।
शिविर में ११६८३ यूनिट रक्त संग्रह

रक्तदान शिविर में ११६८३ यूनिट रक्त संग्रह हुआ। २२४०६ संकल्प पत्र भरवाए गए, जिसमें आनंदपाल ब्लड डोलर ड्रीम्स टीम की मुख्य भूमिका रही। मंच संचालन शंकर आकाश ने किया।

रियांबड़ी (नागौर)। थांवला थाना क्षेत्र के अखावास गांव में शनिवार दोपहर में एक युवक स्नान कर था। इस दौरान अचानक मिट्टी की दीवार गिर गई। मलबे में दबने से युवक की मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार अखावास निवासी श्रवणराम रैगर (36) दोपहर में स्नान कर था। अचानक मिट्टी की दीवार ढह गई। मलबे में दबने से श्रवणराम की मौत हो गई। वह घर में इकलौता कमाने वाला था। परिवार पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा। लोगों ने मृतक के घर पहुंचकर परिवार को ढाढ़स बंधाया।

सूचना मिलने पर थांवला पुलिस मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर रियांबड़ी अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सुपुर्द किया। मृतक के तीन छोटे बच्चे हैं। श्रवण के बड़े पिता की दो पोत्रियों की रविवार को शादी है। सुबह बारातें आएंगी इसे लेकर घर में तैयारियां चल रही थी। अचानक शादी की खुशियां मातम में बदल गई।

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जानकारी के अनुसार अखावास में एक बारात किल्ला गांव से आएगी। दूल्हे सेठूराम के बड़े भाई रायचंद्र व छोटे भाई घनश्याम रेगर की 17 जून को देर रात में सड़क दुघर्टना में मौत हो गई थी। दोनों भाई घरेलू सामान लेने थांवला की तरफ आ रहे थे।

इसी दौरान कारवालों को ढाणी चौराहे पर एक चारे से भरे पिकअप ने वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में दोनों सगे भाइयों की मौत हो गई। दुल्हन के पीहर व ससुराल दोनों में गमी का माहौल है।

परिजनों का हुआ रो-रोकर बुरा हाल
परिजन शव लेकर घर पहुंचे तो चीख पुकार मच गई। महिलाओं का रो रोकर बुरा हाल था। दो युवकों की मौत के बाद कई घरों में चूल्हे नहीं जले।

डेह (नागौर). 'हमारी मातृभाषा राजस्थानी अपनी पहचान का मूल आधार है। मातृभाषा की कमजोरी का मतलब है मनुष्यत्व की हानि। यदि हमें मानवता को बचाना है तो मातृभाषा को बचना ही होगा।' यह बात अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति तथा नेम प्रकाशन डेह के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को डेह में आयोजित 'साहित्यकार सम्मान महोत्सव' में मुख्य अतिथि राजस्थानी के साहित्यकार प्रो. अर्जुनदेव चारण ने कही। प्रो. चारण ने कहा कि राजस्थानी मान्यता की मांग में साहित्यकारों का कोई स्वार्थ नहीं है, ना लोभ-लालच वरन यह मांग तो राजस्थान के आम युवा की रोजी-रोटी के लिए है। साहित्यकार तो अपना फर्ज समझकर समाज को सजग करने का कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम अध्यक्ष एवं राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर के पूर्व अध्यक्ष प्रो. देव कोठारी ने मातृभाषा मान्यता एवं साहित्य संवद्र्धन से होने वाले फायदों की बात करते हुए कहा कि मातृभाषा से ही मातृ संस्कृति एवं संस्कारों का संरक्षण संभव है। मातृभाषा मनुष्य को जड़ों से जोड़े रखने का उत्तम माध्यम है। इस लिए मायड़भाषा की मान्यता आम आदमी के अस्तित्व के लिए आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि मीठेश निर्मोही ने आज के राजस्थानी साहित्य सृजन की सराहना करते हुए विदेशी भाषाओं से राजस्थानी अनुवाद की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री गहलोत ने भेजा शुभकामना संदेश
विशिष्ट अतिथि अरुण प्रकाश गुप्ता ने साहित्यिक पुरस्कारों की सामाजिक उपादेयता पर बोलते हुए कहा कि किसी सच्चे साहित्यकार का सम्मान करना अपनी संस्कृति का सम्मान करने जैसा है। अपने भविष्य को सुखद एवं सुरक्षित बनाने के लिए ऐसे सम्मान समारोह आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि पृथ्वीराज रतनू ने डेह समारोह को मातृभाषा का महाकुंभ बताते हुए आयोजकों की प्रशंसा की। बुद्धाराम गर्वा ने कहा कि हमारी संस्कृति मातृभाषा राजस्थानी के कारण बची हुई है। हजारों वर्षों की समृद्ध परंपराएं, शकुन, रीति रिवाज, विवाह शादी से जुड़े संस्कार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुंचती है। राजेश विद्रोही ने राजस्थानी की साहित्यिक थाती की विशिष्टताएं बताते हुए कहा कि राजस्थानी कविता को उत्तरदायित्व बोध का साहित्य बताया। डॉ. हापूराम चैधरी ने राजस्थानी भाषा की मान्यता के व्यावहारिक पक्षों को उजागर करते हुए कहा कि एक डॉक्टर के पास आने वाले मरीज को अंग्रेजी नहीं आती और डॉक्टर हो राजस्थानी, ऐसे में मरीज की पीड़ा का उपचार कैसे हो। यदि राजस्थानी को मान्यता मिली तो यह समस्या हल हो जाएगी। कार्यक्रम की सफलता के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी शुभकामना संदेश भेजकर सम्मानित साहित्यकारों को बधाई दी।

साहित्कारों को किया सम्मानित
कार्यक्रम संयोजक लक्ष्मणदान कविया ने बताया कि राज्य स्तरीय साहित्यिक महोत्सव में रविवार को कुल 24 साहित्यकारों को उनके सृजनात्मक अवदान के लिए पुरस्कृत किया गया। राजस्थानी के इतिहासकार, समालोचक एवं अनुवादक डॉ. देव कोठारी को 51 हजार की धनराशि का रूपचंद समदडिय़ा राजस्थानी भाषा सेवा शिखर पुरस्कार से नवाजा गया। शेष 23 साहित्यकारों को 11-11 हजार धनराशि के पुरस्कार प्रदान किए गए। समारोह आयोजक पवन पहाड़िया ने बताया कि पुरस्कार सम्मान में नेमीचंद पहाड़िया स्मृति राजस्थानी पद्य पुरस्कार जोधपुर के श्यामसुंदर भारती को उनकी कृति कविता री फुलवाड़ी पर, अमराव देवी पहाड़िया स्मृति राजस्थानी गद्य पुरस्कार तिलानेस डेगाणा के मनोहरसिंह राठौड़ को उनकी कृति धरती री सौरम पर, सोहनीदेवी सूरजमल पांड्या स्मृति राजस्थानी व्यंग्य पुरस्कार गंगानगर के मंगत बादल को उनकी कृति भेड़ व ऊन रौ गणित पर, कमलादेवी पहाड़िया स्मृति राजस्थानी उपन्यास पुरस्कार चूंटीसरा नागौर के माणक तुलसीराम गौड़ को उनकी कृति जीत रौ सेवरो पर, मोहनदान गाडण स्मृति राजस्थानी भक्ति काव्य पुरस्कार टेहला नागौर के करणीसुत लखावत को उनकी कृति मां आवड़ सायर चरित मानस पर, सोहनदान सिंहढायच स्मृति डिंगल काव्य पुरस्कार मेवाड़ उदयपुर के देवकर्ण सिंह रूपाहेली को उनकी कृति बणी ठणी रा बालमा पर, जुगलकिशोर जैथलिया स्मृति राजस्थानी भासा सेवा सम्मान गोगेलाव के नारायणसिंह पीथळ को 43 वर्षों से मायड़ भाषा की सेवा पर, पारसमल पांड्या स्मृति राजस्थानी साहित्य पुरस्कार बीकानेर के राजेन्द्र जोशी को उनकी कृति जुम्मे की नमाज पर, मैनादेवी पांड्या स्मृति राजस्थानी महिला लेखिका पुरस्कार बीकानेर की सीमां भाटी को उनकी कृति हेत री हूंस पर, चण्डीदान देवकरणोत स्मृति राजस्थानी अनुवाद पुरस्कार जोलावास (उदयपुर) के शिवदानसिंह को उनकी कृति सांकळ पर, अमितसिंह चौहान स्मृति राजस्थानी बाल साहित्य पुरस्कार झोरड़ा (नागौर) के प्रहलादसिंह को उनकी कृति म्हारी ढाणी पर दिया गया। इसी प्रकार गोपालसिंह उदावत स्मृति राजस्थानी वय वन्दन पुरस्कार अलाय (नागौर) के शंकरलाल तिवाड़ी को चालीस वर्षों से राजस्थानी भासा सेवा पर, भंवरलाल बेताला स्मृति राजस्थानी गद्य पुरस्कार भदाणा बानां (नागौर) के डॉ. सुखदेव राव को उनकी कृति पिछाण पर, राजकंवर सिंहढायच स्मृति राजस्थानी भाषा लोक कलाकार पुरस्कार शिव (नागौर) के सत्यपाल सांदू को लोक कला संवर्द्धन हेतु, नाथूराम चौधरी स्मृति राजस्थानी यात्रा वृत्तांत पुरस्कार रोटेदा (बूंदी) के देवकी दर्पण को उनकी कृति कांकरी गूँधता पग पर, केशवदान सांदू शिव (गोटण) स्मृति राजस्थानी पद्य पुरस्कार होडा (माण्डलगढ़) के मोहनपुरी की कृति अचपळी बातां पर, बख्तावरदान जुगतावत स्मृति राजस्थानी निबंध पुरस्कार चक सचियापुरा बज्जू बीकानेर के संग्रामसिंह सोढा को उनकी कृति सतरंगी संस्कृति पर, बलदेवराम छीलरा स्मृति राजस्थानी साहित्य पुरस्कार नेनवा (बूंदी) के जयसिंह आशावत को उनकी कृति कुणसी साची बात पर, वैद्यराज बंशीधर पारीक स्मृति राजस्थानी पर्यावरण वानिकी पुरस्कार करमावास (पाली) के अर्जुनदान चारण को उनकी कृति राजस्थान रा रूंख पर, शिम्भुराम धोळिया स्मृति राजस्थानी कहाणी पुरस्कार बालोतरा (बाड़मेर) के धनराज पंवार को उनकी कृति राजस्थानी कहाणियां पर, मोहनलाल टोगसिया स्मृति राजस्थानी पैली पोथी पुरस्कार भवानीसिंह भावुक टापरवाड़ा (परबतसर) को उनकी कृति बिणजारा री बेलड़ी पर, रतनकंवर ऊमरदान खिड़िया स्मृति राजस्थानी गद्य पुरस्कार सींथळ (बीकानेर) के सुरेश सोनी की कृति रणभेरी भाग 6 पर, गीता देवी बजरंगदास गौतम स्मृति राजस्थानी लघु कथा पुरस्कार खांडप (बाड़मेर) के छगनलाल व्यास को उनकी कृति अस्सी लघुकथावां प्रदान किया गया।

इनका रहा सहयोग
जलदाय विभाग के एक्सईएन जे.के. चारण ने सरस्वती वंदना व डॉ. गजादान चारण ने राजस्थानी वाणी वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। युवा साहित्यकार डॉ. रामरतन लटियाल तथा राजेन्द्र कृष्ण फौजी ने राजस्थानी भाषा : दशा एवं दिशा विषय पद अपने विचार व्यक्त किए। स्वागत उद्बोधन कार्यक्रम संयोजक लक्ष्मणदान कविया ने दिया। आयोजन सचिव पवन पहाडिय़ा ने अतिथियों, श्रोताओं एवं प्रदेश के साहित्यकारों को आभार जताया। युवा गीतकार प्रहलाद सिंह झोरड़ा तथा लोकगायक सत्यपाल सांदू ने काव्यगीतों की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार आचार्य डॉ. गजादान चारण 'शक्तिसुत' ने किया।

ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में साहित्यकार अब्दुल समद राही, वीरेंद्र लखावत, बीड़दा राम सैनी, रामरतन विश्नोई, सीएल सांखला, गोकुलदान चारण, सांवलदान कविया, कुलदीप पारीक, गिरिराज व्यास, वाजिद हसन काजी, बजरंग लाल जेठू, अमरसिंह आसिया, मंजू सारस्वत, आशा गोदारा, श्रीकृष्ण मेघवाल एवं पुरस्कार प्रदाता भामाशाह प्रवीण पहाडिय़ा, पद्मकुमार पंड्या, महेन्द्र पहाडिय़ा, सुखदेवसिंह गाडण, सुनिल कुमार, राजेश कुमार पांड्या, देशराजसिंह अखावत, कालूसिंह बडग़ूजर, दुर्गासिंह उदावत, शिखरचंद बेताला, नीतिराज सिंह सांदू, बजरंगदान पारलू, शिंभुराम लामरोड़, श्यामसुंदर, भगवती प्रसाद पारीक, मेहराम धोळिया, शिवराज टोगसिया, महेन्द्रसिंह खिडिय़ा सहित मातृभाषा के स्नेहीजन उपस्थित रहे।

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

नागौर. आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए जिले के पांच इंस्पेक्टर और 25 सब इंस्पेक्टर जल्द ही दूसरे जिले में स्थानांतरित होंगे। इनमें करीब डेढ़ दर्जन थाना प्रभारी हैं। कुचेरा और पादूकलां थाने में तैनात महिला थाना प्रभारी भी इसी सूची में शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार इन सभी को जिले में रहते हुए तीन बरस से अधिक का समय हो चुका है। कोतवाली, नावां और सदर थाना प्रभारी के साथ पुलिस लाइन में तैनात हरिराम जाखड़ और रामवीर जाखड़ पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर ) इसमें शामिल हैं , जबकि जिले से स्थानांतरित होने वालों में बीस सब इंस्पेक्टर है। नागौर से रेंज के तहत अन्यत्र स्थानांतरण के संबंध में इन सबसे दो विकल्प मांगे हैं।

सूत्र बताते हैं कि थाना प्रभारियों को लेकर खालीपन नागौर जिले का नसीब बन गई है। डीडवाना व नावां में नया महिला थाना तो बूडसू, निम्बीजोधा और सुद्रासन में थाना खोले जा रहे हैं जो नए जिले कुचामन-डीडवाना में आते हैं। ये खुलने जा रहे हैं। एसपी राममूर्ति जोशी ने हाल ही यहां का निरीक्षण कर उपयुक्त स्थान के साथ अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इन नए थानों में भी स्टाफ लगाया जा रहा है। बताया जाता है कि बूडसू और निम्बी जोधा को अभी नजदकी चौकी में शिफ्ट किया जा रहा है।

लम्बे समय से किल्लत बरकरार

सूत्रों का कहना है कि जांच का दारोमदार संभालने वाले एएसआई (सहायक उप निरीक्षक) पूरे जिले में बारह-तेरह प्रतिशत हैं। यही नहीं सीआई, एसआई और हैड कांस्टेबलों की किल्लत ने भी अनुसंधान में कोढ़ में खाज वाली कहावत को चरितार्थ कर दिया है। करीब सत्तर फीसदी अनुसंधान करने वाले ही नहीं होंगे तो काम कैसे चलेगा। और तो और याचिका पर फिलहाल फैसले के बाद विभाग का मूड तय नहीं हो पाया है, ऐसे में पदोन्नति तो रुकी ही है, कांस्टेबल भर्ती पर भी पेंच फंसा हुआ है।

ऐसे में कैसे हो पाएगी पूर्ति

पांच नए थाने खुल रहे हैं तो पहले ही अस्सी फीसदी पद एएसआई के खाली पड़े हैं। जिले में सौ से अधिक पद हैड कांस्टेबल तो करीब चालीस पद एसआई के रिक्त पड़े हैं। ऐसे में जब छह-सात साल से रिक्त पड़े पदों पर भर्ती नहीं हो रही तो नए थानों के बाद भी क्या पुलिस बेड़े की किल्लत दूर हो पाएगी।

इसलिए भी पड़ते हैं कम

बताया जाता है कि जिले के अधिकांश थानों में नफरी काफी कम है। इसके अलावा अधिकतर पुलिसकर्मी अन्य कामों में उलझे रहते हैं। धरना-प्रदर्शन के अलावा वीआईपी ड्यूटी के साथ गुमशुदा अथवा बदमाश की तलाशी में कई पुलिसकर्मी तो आमतौर पर बिजी ही रहते हैं। ऐसे में पहले से ही कम चल रहे पुलिसकर्मी और कम हो जाते हैं।

नागौर. टूटी सड़कों के साथ अतिक्रमण ही नहीं अवैध पार्किंग यातायात पुलिस के लिए मुसीबत है तो हादसों का कारण भी बन रही हैं।

सूत्रों के अनुसार नागौर शहर के विजय वल्लभ चौराहा समेत अन्य सड़कें ही नहीं जिले में अनेक क्षतिग्रस्त हैं। जरा सी बारिश में पानी भर जाता है तो ऐसे में तेज गति से चलते वाहन या तो पलट जाते हैं अथवा किसी दूसरे वाहन से भिड़ जाते हैं। टूटी सड़कों पर वाहन चालकों का चलना दूभर है तो उड़ती धूल आमजन के लिए मुसीबत बनी हुई है। रही-सही कसर फैलते प्रदूषण ने पूरी कर दी। आलम यह है कि दस साल में वाहनों की संख्या चौगुनी हो गई, लेकिन प्रदूषण मुक्त वाहन का सर्टिफिकेट लेने की कोई जहमत नहीं उठा रहा। टैक्सी हो या अन्य कई वाहन भले ही काला धुआं छोड़ रहे हों पर उनको पकडऩे के साधन-संसाधन तक नहीं हैं।

वैसे तो कई साल से प्रदूषण जांच केंद्र के वाहन मालिक व चालक अपने वाहन का प्रदूषण सर्टिफिकेट बनवा सकते हैं, लेकिन नागौर जिले में बिना इसके काला धुआं छोड़ते वाहन दौड़ लगा रहे हैं। बताया जाता है कि कई साल पुराने वाहन तो बिना इस सर्टिफिकेट के चल रहे हैं। बढ़ता प्रदूषण लोगों की मुश्किल बढ़ा रहा है ,जबकि सरकार अथवा स्वयंसेवी संस्था तक ने कभी इसको लेकर कोई अध्ययन नहीं किया।

यातायात नियमों से अनजान भी

यातायात से जुड़े पुलिसकर्मी ही नहीं अन्य लोग भी मानते हैं कि नागौर जिले में कई चालक नियमों से अनजान हैं। कलक्ट्रेट सर्किल पर ट्रेफिक पुलिसकर्मी होने के बावजूद दाएं-बाएं से वाहन ले जाते हुए कई लोग दिख जाते हैं। यही नहीं ट्रैफिक लाइट नहीं है यदि ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी कोई संकेत देता है तो एक बारगी कई चालक समझ ही नहीं पाते। गाड़ी मोड़ते समय इण्डीकेटर का उपयोग करने में भी लोग फिसड्डी हैं।

घायलों को अस्पताल ले जाने में भी पीछे

बात यहीं खत्म नहीं होती, तकरीबन तीन साल पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले को पांच हजार का इनाम और पुलिस की तमाम झंझटों से मुक्त किया था। इसके लिए पूरे जिले की हर माह एक रिपोर्ट मुख्यालय को भी देनी पड़ती है। मजे की बात है कि तकरीबन तीन साल में आधा दर्जन नाम ही इस इनाम के लिए आगे भेजे गए हैं जबकि हादसे के बाद अधिकांश जगह घायलों को अस्पताल तक ले जाने के लिए पुलिस का ही इंतजार करते देखा गया है।

नागौर. राज्य सरकार पारंपरिक जलस्रोतों को बचाने के लिए समिति की मिली रिपोर्ट का अब तक क्रियान्वयन नहीं कर पाई है। समिति की ओर से तकरीबन 20 साल पहले राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपी गई थी। समिति का गठन खुद राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय की सलाह पर किया था।

समिति की सिफारिश लागू होती तो बदल जाती तस्वीर
राज्य सरकार बीस सालों के बाद भी पारंपरिक जलस्रोतों को बचाने में न केवल विफल रही है, बल्कि समिति की ओर से इनको बचाने के लिए दी गई रिपोर्ट को आज भी लागू करने में आनाकानी कर रही है। वर्ष 2003 में एक जनहित याचिका के माध्यम से पारंपरिक जलस्रोतों के बचाए जाने के प्रकरण में सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार को समिति का गठन करने की सलाह दी थी। ताकि पारंपरिक जलस्रोतों को बचाया जा सके। समिति में उस दौरान सिंचाई विभाग के निदेशक रहे वाईसी अग्रवाल, वाटरशेड विकास व मृदा संरक्षण विभाग के संयुक्त सचिव निदेशक एलबीएल माथुर एवं अधीक्षण खनन अभियंता राकेश हिरत को शामिल किया गया था। समिति ने प्रदेश में पारंपरिक जलस्रोतों के स्थिति की जांच करने के साथ ही इसको बचाने के लिए लागू किए जाने वाली सिफारिशें राज्य सरकार को सौंप दी थी। जानकारों का कहना है कि सरकार ने समिति से मिले निष्कर्ष के आधार पर की गई सिफारिशें लागू करती तो निश्चित रूप से पारंपरिक जलस्रोतों का न केवल संरक्षण हो सकता था, बल्कि पानी की कमी से जूझ रहे प्रदेश को इस संकट से भी छुटकारा मिल गया होता।

समिति की ओर से यह की गई थी मुख्य सिफारिशें...
समिति की सिफारिशों में नाला, नदियों, सहायक नदियों आदि जैसे जल निकासी चैनलों के रूप में दिखाई गई 15 अगस्त 1947 को सरकार के रूप में घोषित भूमि का रूपांतरण अवैध घोषित होना चाहिए। जलग्रहण क्षेत्र के आकार के आधार पर उपयुक्त दूरी पर निर्माण स्तंभों द्वारा जलग्रहण क्षेत्रों का सीमांकन सहायता से किया जाना चाहिए। जल निकासी चैनलों का सीमांकन होना चाहिए। गैर-आबादी वाले क्षेत्रों में उपयुक्त दूरी पर खंभे लगाकर या जल निकासी चैनल के आकार और उसके महत्व के आधार पर बगल की दीवार का निर्माण करके किया जा सकता है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में, जल निकासी चैनलों का सीमांकन अनिवार्य रूप से उचित ऊंचाई और मोटाई की दीवारों का निर्माण करके किया जाना चाहिए।. सरकारी स्वामित्व वाली झीलों एवं अन्य जल निकायों में उनके डूब क्षेत्र में निजी व्यक्तियों के खातेदारी अधिकार को सरकार के स्वामित्व में लाया जाए।. जलग्रहण क्षेत्रों में जल निकासी चैनलों का निरीक्षण इंजीनियरिंग पेशेवरों और पटवडिय़ों द्वारा किया जाना चाहिए। नाले में जहां-जहां रुकावटें हैं, उन्हें पुलिया बनाकर, नालों को गहरा और चौड़ा कर उपयुक्त रूप से दूर किया जाना चाहिए। जहां भी कोई निर्माण कार्य हो, जिससे जल निकासी नालियों में पानी के बहाव में बाधा उत्पन्न हो सकती है। वहां सिंचाई विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा। सबसे गहरे नाले तल से 2 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले एनीकटों की पहचान की जानी चाहिए। 2 मीटर से अधिक ऊंचाई को नष्ट किया जाना चाहिए। जहां-जहां आवासीय कॉलोनियों का निर्माण जल निकासी नालियों में प्रवाह को बाधित कर रहा है। वहां अवरोध को हटाया जाना चाहिए। नालों को और गहरा निर्मित किया जाना चाहिए। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में झीलों, तालाबों, जल निकायों की परिधि पर, जल निकाय की परिधि पर पक्की नाली का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि जल निकाय में घरेलू, औद्योगिक और अन्य अपशिष्टों का प्रवेश रोका जा सके। मृदा संरक्षण कार्य के लिए उपयुक्त दिशा-निर्देश जारी करना चाहिए। जिला प्रशासन को विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट पदार्थों के डंपिंग के लिए स्थान निर्दिष्ट करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति अपशिष्ट पदार्थ को अन्य स्थानों पर, विशेषकर जल निकासी नालियों में फेंकता पाया जाता है, तो कानून में उपयुक्त दंड का प्रावधान किया जाना चाहिए। सरकार को इस मामले में जागरूकता पैदा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। मार्बल स्लरी को निर्माण सामग्री के रूप में, गड्ढों आदि को भरने के लिए उपयोग करने की संभावना तलाशी जानी चाहिए, जैसा कि मक्खी के निपटान के लिए किया गया है
इनका कहना है...
कमेटी की सिफारिशों को लोगों के कल्याणकारी हित के लिए लागू करना आवश्यक है। पारंपरिक जलस्रोतों का जो क्षरण हुआ है। उसको पुर्नजीवित करने के प्रयास करने के साथ भूजल नीति को लागू करना अच्छा कदम होगा।
डॉ. विकास पावडिय़ा, कृषि अर्थशास्त्री, कृषि महाविद्यालय नागौर

-पेड़ को काटने पर संविधान में है सजा का प्रावधान तो सनातन में बताया पाप

-संविधान व सनातन है एक: संत दिनेश गिरी- जन चेतना संदेश कार्यक्रम के माध्यम से दिया हिन्दू राष्ट्र बनाने पर जोर, रूढिवादी कुरितियों को मिटाकर एकजुट होने का का संकल्प

लाइव रिपोर्ट

कुचामनसिटी. स्टेशन रोड पर रविवार को सांगलिया धूणी पीठाधीश्वर संत ओमदास महाराज के सानिध्य में जन चेतना संदेश कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संत ओमदास , शिवमठ धाम गाड़ोदा के संत महावीर जती , संत पुसादास सहित अन्य लोगों ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, भारत माता व संत के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इससे पूर्व में कनोई पार्क में भीमराव अम्बेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया। उसके बाद संत गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा के रूप में कार्यक्रम स्थल पहुंचे।

सर्व समाज ने की पुष्प वर्षा

जन चेतना कार्यक्रम में शामिल होने से पहले पुराने बस स्टैंड से संत ओमदास की शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में संत रथ पर सवार होकर लॉयन सर्किल से होते हुए एसबीआई बैंक, जवाहर स्कूल, कुचामन थाना होते हुए कार्यक्रम स्थल पर पौन तीन बजे पहुंचे। संत का लॉयन सर्किल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं, सर्व ब्राह्मण समाज व खटीक समाज की ओर से पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। एसबीआई बैंक मार्ग से कार्यक्रम स्थल मार्ग में स्वर्णकार समाज, खण्डेलवाल विप्र समाज, भार्गव समाज सहित अन्य सर्व समाज के लोगों ने पुष्प वर्षा की। शोभयात्रा में लोगों की काफी भीड़ रही।

सनतान व संविधान को बताया एक, छूआ-छूत को करे बंद

जन चेतना कार्यक्रम में संत ओमदास के साथ बुधगिरी मढी पीठाधीश्वर संत दिनेश गिरि , शिवमठ धाम गाड़ोदा, संत पुसादास , सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अर्चना सूर्वे, करण सिंह, बीएल रणवां मंचासीन रहे।संत दिनेश गिरि ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राजनेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए हमारा बंटवार कर दिया। जबकि संविधान में बाबा साहेब ने सभी को एकजुट होकर चलने का संदेश दिया है। यहीं बात सम्मान एवं संतान धर्म है। संतान धर्म में पेड़ (पीपल,बरगद) को काटने पर पाप बताया है तो संविधान में बाबा साहेब ने भी पेड़ काटने पर सजा का प्रवाधान रखा है। उन्होंने संविधान व सनातन को एक ही बताया और देश में छुआ छूत को लेकर चल रही रूढिवादी कुरीतिरयों को मिठाने पर जोर दिया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता अर्चना ने महिला शक्तिकरण के बारे में बताया। युवतियों को अपने माता-पिता का कहना मानने की बात कहीं।

छूआ-छूत बंद करें और सब मिलकर रहे

संत ओमदास ने कहा कि जब जीव का जन्म होता है तो वह ना तो कोई अधिकारी होता है ना कोई नेता, ना ही साधु-संत । सभी अपने कर्माे से बनते हैं। उन्होंने सांगलिया धूणी की स्थापना का प्रसंग सुनाते हुए हिन्दूओं में बिना भेद भाव किए पिछड़े लोगों व समाजों की रूढिवादी कुरीतियों को मिटाकर एक साथ रहकर सनातन धर्म को संगठित करने की बात कही। संत ने बताया कि उनके गुरू ने उन्हें एक भजन के माध्यम से एक बात कहीं शिक्षा ग्रहण कर कुकर्मों को त्यागों। उन्होंने कहा कि राजस्थान के साथ पूरे हिन्दुस्तान में जन चेतना का आयोजन होगा।

पांडाल में उमड़ी भीड़कार्यक्रम में मातृशक्ति की संख्या भी काफी रही। इस दौरान सभी ने हिन्दू धर्म के बंटवारे के कारण हुए धर्म में परिवर्तन की रूढिवादी कुरितियों को मिटाने का संकल्प लिया। इस मौके पर भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष रजनी गावडि़या व डॉ. बीएल गावडिय़ा ने संत को गदा भेंट की। भामाशाहा सुरेन्द्र सिंह कांसेडा ने एसी एसटी समाज के जरूरतमंद परिवार के शादी समारोह में लड़के के लिए घोड़ी की व्यवस्था करने की घोषणा की। कार्यक्रम में खारिया सरंपच देवीलाल दादरवाल, कर्नल नंदकिशोर ढाका, पूर्व विधायक परबतसर मानसिंह किनसरियां, मनजीत पाल सांवराद, जिला परिषद सदस्य बाबूलाल, भाजपा किसान मोर्चा बीकानेर संभाग प्रभारी ज्ञानाराम रणवां, डॉ. राजाराम प्रजापति, पूर्व विधायक विजय सिंह चौधरी, मनीष व्यास नावां, प्रमोद आर्य, भाजपा जिलाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह ऑडिट, अनिल सिंह मेड़तिया, पार्षद सुरेश सिखवाल, पार्षद तुलसीराम कुमावत, भवानी सिंह चावडियां, श्रीपाल सिंह रसाल, श्रीराम कुमावत सहित काफी संख्या कुचामन, नावां, मीठड़ी, मकराना बोरावड़, परबतसर सहित ग्रामीण क्षेत्र से लोग उपस्थित रहें।

मंच का संचालन विष्णु पारीक ने किया।

नागौर में कैसी रही रही बरसात---मौसम का ताजा अपडेट---खेत लबालब हुए या सूखे रह गए फिर...!
नागौर. विकट गर्मी के साथ उमस के बीच परेशान जिले को सोमवार शाम हुई बारिश से राहत मिली। इसमें सर्वाधिक 70 एमएम बारिश मकराना में हुई। जिले में अब तक हुई बारिश के आंकड़ों में मकराना में अब तक 262 एमएम बारिश चुकी है। बारिश के दौरान जायल में जहां एक मकान भरभराकर गिर गया, वहीं शहरी क्षेत्रों में सडक़ों पर बरसात के दौरान नदी बहती नजर आई। फिलहाल कोई जनहानि की खबर नहीं है।
ग्रामीण एवं शहर क्षेत्रों में सोमवार को जमकर बरसात हुई। झमाझम हुई बारिश से शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में चारों ओर पानी भरा नजर आया। डेगाना, जायल, रियाबड़ी, पबरतसर, मौलासर, नागौर, नावां, मेड़ता, मूण्डवा, मकराना एवं कुचामन क्षेत्र के इलाके बरसात से लबालब भरे नजर आए। गूढ़ा साल्ट एवं दुगस्ताऊ आदि गांवों के मुख्य मार्गों एवं संपर्क मार्गों पर पानी का दरिया बहता रहा। कई जगह खेतों में भी पानी भरा रहा। गांवों के साथ ही शहरी क्षेत्रों में जमकर हुई बरसात से कई घंटे तक सडक़ों पर पानी भरा रहने के कारण यातायात प्रभावित रहा। बरसात के दौरान बाहर निकले लोग बारिश लोग काफी देर तक पानी में फंसे रहे। घंटों की प्रतीक्षा के बाद पानी निकला, तब जाकर लोग अपने गंतव्यों के लिए रवाना हुए।

बरसात ने जमकर भिगोया, खेतों में भरा पानी, सडक़ों पर बहा दरिया
नागौर. विकट गर्मी के साथ उमस के बीच परेशान जिले को सोमवार शाम हुई बारिश से राहत मिली। इसमें सर्वाधिक 70 एमएम बारिश मकराना में हुई। जिले में अब तक हुई बारिश के आंकड़ों में मकराना में अब तक 262 एमएम बारिश चुकी है। बारिश के दौरान जायल में जहां एक मकान भरभराकर गिर गया, वहीं शहरी क्षेत्रों में सडक़ों पर बरसात के दौरान नदी बहती नजर आई। फिलहाल कोई जनहानि की खबर नहीं है।
ग्रामीण एवं शहर क्षेत्रों में सोमवार को जमकर बरसात हुई। झमाझम हुई बारिश से शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में चारों ओर पानी भरा नजर आया। डेगाना, जायल, रियाबड़ी, पबरतसर, मौलासर, नागौर, नावां, मेड़ता, मूण्डवा, मकराना एवं कुचामन क्षेत्र के इलाके बरसात से लबालब भरे नजर आए। गूढ़ा साल्ट एवं दुगस्ताऊ आदि गांवों के मुख्य मार्गों एवं संपर्क मार्गों पर पानी का दरिया बहता रहा। कई जगह खेतों में भी पानी भरा रहा। गांवों के साथ ही शहरी क्षेत्रों में जमकर हुई बरसात से कई घंटे तक सडक़ों पर पानी भरा रहने के कारण यातायात प्रभावित रहा। बरसात के दौरान बाहर निकले लोग बारिश लोग काफी देर तक पानी में फंसे रहे। घंटों की प्रतीक्षा के बाद पानी निकला, तब जाकर लोग अपने गंतव्यों के लिए रवाना हुए।

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